सविता चड्ढा के लेख संग्रह ‘’कहाँ गए ये लोग’’ का हिन्दी भवन में लोकार्पण

repaglinide novonorm Cheongju-si नगर Cuddapah australia casino online free संवाददाता

rubbel adventskalender Tábor नई slubberingly bingo games दिल्ली। हिन्दी भवन सभागार में सविता चड्ढा के लेख संग्रह Bangaon muito cedo pra namorar ‘’कहाँ गए ये लोग’’ का भव्य लोकार्पण सुविख्यात साहित्यकार, समाज शास्त्री, समाज सुधारक एवं सुलभ के संस्थापक  डॉ विदेश्वर पाठक ने किया ।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए आथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के महासचिव  डॉ शिव शंकर अवस्थी ने लेखिका के अब तक के लेखन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया की लेखिका वर्ष 1984 से निरंतर लेखरत हैं और अब तक उनकी 34 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । श्री अवस्थी ने बताया की सविता चड्ढा  की लोकार्पित कृति उन 17 दिवंगत साहित्यकारों पर केन्द्रित हैं जिनके साथ सविता जी का अब तक का साहित्यक सफर रहा है ।

सविता चड्ढा ने अपने वक्तव्य में पुस्तक में  शामिल सभी 17 साहित्यकारों को याद किया और उनके बारे में अपने संस्मरण भी सुनाये। सविता जी का मानना  है, हमारे जीवन में, जो भी हमारे जीवन को प्रकाशित करने और मार्गदर्शन करने में महत्ती  भूमिका निभाते हैं हमें उनके प्रति कृतज्ञ होन चाहिए ।  अपने साहित्यिक गुरु राज कुमार सैनी से अपनी बात शुरू करते हुए सविता जी ने आशा रानी वोहरा , दिनेश्नंदिनी डालमिया, विष्णु प्रभाकर, यशपाल जैन, डॉ नगेन्द्र , डॉ नारायणदत्त पालीवाल, जय प्रकाश भारती , डी राज कंवल, ओम प्रकाश नामी, महेंद्र खन्ना, ओम प्रकाश लागर, जगदीश चतुर्वेदी, वीरेंद्र प्रभाकर और डॉ जय नारायण  कौशिक  जी पर लिखे अपने लेखों पर प्रकाश डालते हुए कई महत्वपूर्ण अनुभव सुनाये ।

लोकार्पित कृति पर डॉ घमंडीलाल अग्रवाल ने, कहाँ गए ये लोग, लेख संग्रह को  को अनूठी कृति बताया तो अतुल प्रभाकर ने कहा की सविता जी का हिन्दी प्रेम और साहित्यकारों से आत्मीय लगाव  इस पुस्तक के सृजन की नीव है ।सुधाकर पाठक ने सविता जी के लेखन को समाजोप्योगी बताते हुए कृति की प्रशंसा की ।

डॉ विंदेश्वर  पाठक ने अपने वक्तव्य में लेखिका की  इस कृति को बहुत ही उपयोगी और ज्ञानप्रद बताया । उन्होंने  कहा चिरंजीवी साहित्य वही होता है जो अंदर से उपजता है और जिसके सृजन में लेखक की अपनी प्रेरणा होती है। बाहरी डंडे के ज़ोर से जो लिखा जाता है वह निष्प्राण होता है और अधिक दिनों तक टिकता भी नहीं। इस पुस्तक को सविता जी ने अपने अंतस की उपज से लिखा है, अपने मन से लिखा है,मनोयोग से सँजोया है,इसलिए ये चिरंजीवी होगी और नई पीढ़ी के लिए विशेष उपयोगी होगी ।

डॉ गोविंद व्यास ने कहा अक्सर हमारी पीढ़ी पर आरोप लगता है की हम बजुर्गों का सम्मान नहीं करते इस पुस्तक की लेखिका ने  इस अररोप को गलत सिद्ध कर  दिया है । 17 दिवंगत साहित्यकारों पर आपने अपने अनुभवो का खजाना पाठकों के लिए दिया है । उनहोंने विशेष रूप से पुस्तक के अंत में दिये 17  दिवंगत साहित्यकारों  के रंगीन चित्रों  का उल्लेख भी किया और कई लेखों पर अपनी बात कही।

प्रख्यात व्यंगकार और साहित्यकार डॉ हरीश नवल ने  लेखिका के इस प्रयास की सराहना करते हुए , पुस्तक में उल्लेखित लेखों के संदर्भ में कृति की सराहना की । उन्होंने महादेवी वर्मा जी की एक पुस्तक का  संदर्भ देते हुए कहा की लेखिका की इस पुस्तक में एक नई विधा का जन्म हुआ है जिसका बाद में अनुकरण हो सकता हैं। इस पुस्तक में लेख, रेखाचित्र और संस्मरण तीनों विधाओं का बखूबी समावेश किया गया है।

डॉ श्याम सिंह शशि ने इस कृति को महत्वपूर्ण बताते हुए पुस्तक में से कई दृष्टांत प्रस्तुत किए ।उन्होंने  लेखिका के प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।  डॉ बी एल गौड़ ने अध्यक्षीय सम्बोधन मे लेखिका के अबतक के लेखन पर प्रकाश डाला और इस कृति की भरपूर सराहना की । डॉ सरोजिनी प्रीतम ने लेखिका की संवेदनशीलता और लेखन के ढंग की विशेष सराहना करते हुए उपस्थित  सभी  साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार प्रकट किया ।

इस अवसर पर देश के कई साहित्यकार और सहित्यप्रेमी उपस्थित रहे , सर्वश्री अशोक जैन, डॉ राधे शाम बंधु, डॉ हरी सिंह पॉल, आशा शैली ,जय सिंह आर्य, अनीता प्रभाकर, देवेन्द्र मित्तल ,सरिता गुप्ता , नवीन कुमार जग्गी, अशोक कुमार ज्योति, कीर्तिवर्धन, मंगलेश कुमार, रमा सिंह, संतोष खन्ना ,प्रकाश सूना, आमोद कुमार, सरोज शर्मा, सीमाब सुल्तानपुरी, विमला कौशिक, विदुषी शर्मा ,डॉ दमयंती शर्मा, डॉ पुष्पलता भट्ट, पंकज त्यागी, जुगल किशोर, जगदीश चावला , नीतू सिंह राय, प्रवीण कुमार ,अमरजीत कौर, मोहर सिंह प्रजापति, देवेन्द्र कुमार , सूरज प्रकाश, शुचिता चड्ढा, सुषमा प्रकाश, सोनल चड्ढा ,दीपाली चड्ढा, मुस्कान, अभिराज , मणिराज, मनमीत  कोछर , पूनम मटिया, ज्योतिका कालरा, अनुराधा ,बालकीर्ति, विजय शर्मा, हामिद खान, विजय राय, भुपेन्द्र सेठी अमन  और हिन्दी भवन,  हिंदुस्तानी भाषा अकादमी और सुलभ की और से कई महत्वपूर्ण महानुभावों की उपस्थिती उल्लेखनीय रही।

 

 

 

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