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दिल्ली में वायु प्रदूषण ने पांच सालों में ली 981 लोगों की जान

नई दिल्ली, 08 अगस्त। दिल्ली में सन 2013 से 2017 के बीच अक्यूट रेस्पाइरेटरी इन्फेकशन (एआरआई) के चलते 981 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। संसद की स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 17 लाख लोग इस बीमारी से प्रभावित पाए गए हैं। रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण संबंधी बीमारियों का अधिक खतरा बताया गया है।कमेटी ने प्रदूषण की इस समस्या को देखते हुए संबंधित अथॉरिटीज के साथ तीन बैठकें भी कीं हैं। कमेटी का कहना है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के चलते होने वाली बीमारियों और स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को देखते हुए पर्यावरण मंत्रालय को स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ जल्द से जल्द जरूरी कदम उठाने चाहिए। कमेटी ने कहा कि इस प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित छोटे बच्चे, नवजात और दमा के मरीज हैं।

कमेटी ने स्वास्थ्य मंत्रालय को एक जागरुकता अभियान चलाने को भी कहा है, ताकि लोगों को वायु प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों के बारे में जागरूक किया जा सके। सन 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली टॉप-20 में शामिल थी। स्टैडिंग कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार शहरों में रहने वाले लोगों में ग्रामीण इलाके में रहने वाले लोगों के मुकाबले अधिक सांस संबंधी बीमारियों के लक्षण पाए गए। यूनीसेफ की पिछले साल की एक रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण के कारण बच्चों के दिमाग को बहुत नुकसान पहुंचता है। सेंटर फॉर चेस्ट सर्जरी के डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा संकट है।सरकारी एजेंसियों के अलावा लोगों को इस बात का समझना जरूरी है। इसके लिए जरूरी कदम भी उठाने होंगे। हाल में ही की गई एक जांच में डॉ. कुमार ने पाया था कि मार्च 2012 से जून 208 तक 150 लोग फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे थे, जिनमें से अधिकतर लोग नॉन-स्मोकर थे। ———–(वेबवार्ता)

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