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ई कॉमर्स पर गोलमेज सम्मेलन ने प्रेस नोट 3 को लागू करने तथा ई कॉमर्स के लिए रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित करने मांग की !

नई दिल्ली। ई कॉमर्स व्यापार पर नीति को लेकर आज देश के विभिन्न प्रमुख संगठनों ने कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल
इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के बैनर तले दिल्ली में एकगोलमेज सम्मेलन आयोजित किया जिसमें ई कॉमर्स के लिए एक सुदृढ़ नीति बनाने, व्यापार के समान अवसर दिए जाने, डाटा की सुरक्षा और छोटेव्यापारियों को ई कॉमर्स से जोड़ने की मांग की !

गोलमेज सम्मेलन में व्यापार, उद्योग, ट्रांसपोर्ट, किसान, लघु उद्योग, उपभोक्ता संगठनों के अलावा ई कॉमर्स कंपनियों, आर्थिक विश्लेषकों, चिंतकोंआदि ने भाग लिया ! विशेष रूप से स्वदेशी जागरण मंच, आल इंडिया ऑनलाइन वेंडर्स असोसिएशन, इंडियन सेलुलर असोसिएशन, फोरम अगेंस्टएफटीए , आईटी फॉर चेंज आदि ने भाग लिया !
सम्मेलन में पारित एक सर्वसम्मत प्रस्ताव में सरकार से मांग की गई की वर्ष 2016 के प्रेस नोट ३ को सख्ती से लागू किया जाए और अगर कोई कम्पनीउसका उल्लंघन करती है तो तत्काल दण्डित किया जाए तथा ई कॉमर्स की देख रेख और नियंत्रित करने के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन कियाजाए !

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2022 तक देश में डिजिटलइकॉनमी एक ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी तथा वर्ष 2030 तक यह कुल अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा 50 प्रतिशत बन जाएगी, ऐसे में ई कॉमर्स के लिएएक ठोस, समग्र एवं मजबूत नीति का होना बेहद जरूरी है जिसमें घरेलू व्यापार के हित सुरक्षित हों, आधुनिक टेक्नोलॉजी का समावेश हो तथा डाटासुरक्षा का मजबूत तंत्र हो !

सरकार द्वारा ई कॉमर्स के लिए नीति दस्तावेज़ जारी करने का स्वागत करते हुए श्री खंडेलवाल ने कहा की ई कॉमर्स कंपनियों के लिए सीमित इन्वेंटरीकी अनुमति किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती क्योंकि ई कॉमर्स कंपनियां केवल टेक्नोलॉजी प्रदाता हैं और उनका इन्वेंटरी से कोई लेना देनानहीं है, यदि ऐसा हुआ तो ई कॉमर्स का बुनियादी ढांचा ही हिल जायेगा ! उन्होंने कहा की ” बल्क परचेस” बहुत ही भ्रामक शब्द है जिसको सही तरीके सेपरिभाषित करना जरूरी है ! ई कॉमर्स कंपनियां किसी भी तरह का कोई डिस्काउंट नहीं दे सकती यह प्रावधान भी नीति में किया जाना आवश्यक हैक्योंकि वो ई कॉमर्स पर बिकने वाले सामान की मिलकियत उनकी नहीं है ! प्रत्येक ई कॉमर्स कम्पनी को अथॉरिटीज के साथ पंजीकृत होना जरूरी होनाचाहिए !

सम्मेलन में बोलते हुए अनेक वक्ताओं ने अफ़सोस जाहिर करते हुए कहा की ई कॉमर्स की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है वहीँ दूसरी ओर ई कॉमर्सबाज़ार का कोई अधिकृत आकंड़े न होने से इस व्यापार में किसंगतियों और मनमानी का बोलबाला है ! उन्होंने कहा की डाटा का बहुत ही महत्व है लेकिनअभी तक डाटा को लेकर बेहद उदासीनता है जबकि दूसरी तरफ डिजिटल वित्तीय ढांचे को भी नए सिरे से बनाने की जरूरत है ! इसी प्रकार छोटेव्यापरियों को ई कॉमर्स पर व्यापार के बड़े और निष्पक्ष अवसर मिले यह भी जरूरी है !

अनेक वक्ताओं ने कहा की रूपए कार्ड ऑनलाइन रूप में पूरी तरह एक फेल सिस्टम है !इसकी जगह सरकार द्वारा वर्ष 2017 में जारी किया गया भारतक्यू आर को ई कॉमर्स में डिजिटल भुगतान के लिए अपनाते हुए प्रोत्साहित करना चाहिए वहीँ डिजिटल क़र्ज़ देने के लिए भी एक सुदृढ़ तंत्र विकसित होनाजरूरी है !

सम्मेलन में हुई चर्चा पर कैट सिफारिशों का एक श्वेत पत्र बनाएगा जिसे केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री सुरेश प्रभु को सौंप कर आगे की कार्यवाही करने काआग्रह किया जायेगा !
—————-नगर संवाददाता

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