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स्कूलों में बच्चों के साथ हो रहे अपराधों का निष्पक्ष एजेन्सी से सोशल ऑडिट होना चाहिए- शर्मिष्ठा मुखर्जी

नगर संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता व महिला कांग्रेस अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी ने गोल मार्किट क्षेत्र के एनडीएमसी विद्यालय में सरकारी कर्मचारी इलेक्ट्रीसियन द्वारा 6 साल की बच्ची का बलात्कार करने की कड़ी आलोचना की और कहा कि इस घिनौने अपराध के लिए अभियुक्त को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि यह अपराध मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के विधानसभा क्षेत्र नई दिल्ली के स्कूल में हुआ है, जबकि श्री केजरीवाल एन.डी.एम.सी के एक्स-आफिसियों चैयमेन भी है।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि वास्तव में यह चैकाने वाली घटना है कि अभियुक्त एनडीएमसी का एक स्थायी कर्मचारी है, जिसे एक महीने पहले ही रेगुलर किया गया था। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि एनडीएमसी में किसी भी व्यक्ति को नौकरी पर रखते समय उनके चरित्र की जांच नही होती है, क्या सरकार को यह नही पता करना चाहिए कि व्यक्ति का पहले क्या चरित्र रहा है। उन्होंने कहा कि गैर अपराधिक प्रवृति का व्यक्ति पहली दफा ऐसा अपराध नही कर सकता। जबकि उसने बच्ची से बलात्कार से दो दिन पहले भी छेड़छाड़ की थी। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने दिल्ली के स्कूलों में बच्चों के साथ हो रहे लगातार अपराधों का निष्पक्ष एजेन्सी से सोशल आडिट कराने की मांग की।

प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि एनडीएमसी में स्थाई कर्मचारी की बिना जांच के भर्ती के बाद इस तरह की घटना से कई सारे सवाल उठते है। उन्होने कहा कि यह सरकार की गैर जिम्मेदारी है कि अरविन्द केजरीवाल की विधानसभा के स्कूल में सीसीटीवी भी नही है। जबकि वे एनडीएमसी के चैयरमेन भी है। संवाददाता सम्मेलन में शर्मिष्ठा मुखर्जी के अलावा प्रवक्ता पूजा बाहरी, वरिष्ठ नेता श्री चतर सिंह, मुख्य मीडिया काॅआर्डिनेटर मेहदी माजिद व मीडिया काॅआर्डिनेटर शिवम भगत मौजूद थे।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि आरोप प्रत्यारोप का गेम शुरु हो गया है कि दिल्ली सरकार ने यह कहा कि एनडीएमसी स्कूल हमारे अन्तर्गत नही आता, जबकि स्कूल मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की विधानसभा में है। उन्होंने पूछा कि श्री मनीष सिसोदिया जो कि दिल्ली के शिक्षा मंत्री है, वो प्राईवेट स्कूलों की कार्यप्रणाली में दखलअंदाजी कर रहे है और एनडीएमसी और एमसीडी स्कूलों को नजरअंदाज कर रहे है। उन्होंने कहा कि पिछले महीने मनीष सिसोदिया की विधानसभा में भूख से तीन बच्चे मर गए थे और उन्हें इस घटना से कोई आघात नही हुआ। उन्होंने कहा कि एनडीएमसी और नगर निगम के सरकारी स्कूलों में जो घटनाऐ हो रही है उसकी दिल्ली सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। यह बहुत ही दुख की बात है कि यह अपराधिक घटनाएंे देश की राजधानी दिल्ली में हो रही है।

चैकाने वाले आंकडे बताते हुए शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि जनवरी 2018 से अप्रैल 2018 तक छोटी बच्चियों के साथ होने वाले अपराधिक मामले दिल्ली में 282 दर्ज हुए है। दिल्ली में महिलाओं और बच्चों के साथ अपराधिक मामलों में लगातार बढ़ौतरी हो रही है। जबकि केन्द्र सरकार और दिल्ली पुलिस यह दावे कर रहे है कि गृहमंत्रालय के अन्तर्गत महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर रोक लिए कई योजनाए बनाई गई है।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने प्रचार के लिए 5000 करोड़ विज्ञापन पर खर्च किए है। जबकि इसी राशि में देश भर में साढ़े चार करोड़ बच्चों के लिए मिड मील की व्यवस्था हो सकती थी। उन्होंने कहा 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चों के साथ बलात्कार के अपराध के लिए कानून में जो बदलाव किए गए है, जिसमें सजा-ए-मौत का प्रावधान है। सरकार को इस कानून का भी प्रचार करके देश की जनता को जानकारी देनी चाहिए ताकि कोई भी इस तरह के अपराध करने से डरे।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि छोटे बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामलों पर नेशनल कमीशन फाॅर प्रोटेक्शन आॅफ चाईल्ड राईट्स चुप क्यों है? उन्होंने कहा कि कोई भी सरकारी संस्थान छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ हो रहे यौन उत्पीड़न संबधी अपराधों की जिम्मेदारी लेने को तैयार नही है। दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार ऐसे मामलों पर आरोप प्रत्यारोप करके राजनीति कर कर है।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने ऐसे मामलों के लिए फास्ट ट्रेक कोर्ट बनाने का ऐलान किया तथा परंतु अभी तक इसका कोई अता पता नही है। उन्होंने कहा कि एक निर्भया का केस हुआ था जिसका कि कोर्ट में क्या हो रहा है सभी को पता चल रहा था, लेकिन ऐसे लाखों केस है जिनका किसी को पता नही चलता। उन्होंने कहा कि सरकार को एक पोर्टल बनाना चाहिए जिसमें ऐसे केसो की जानकारी पब्लिक डोमेन में मिल सके। उन्होंने जानना चाहा कि दिल्ली में फास्ट ट्रेक का क्या हुआ।

 

 

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