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फ्लेक्सी फेयर खत्म करने के मूड में नहीं है रेलवे

नई दिल्ली, 22 अगस्त। रेल मुसाफिरों के लिए अच्छी खबर नहीं है। अब दोगुणा से अधिक किराया भरने को मजबूर जो यात्री फ्लेक्सी फेयर खत्म करने की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें यह खबर दुखी कर सकती है। दरअसल, रेलवे फ्लेक्सी फेयर खत्म करने के मूड़ में नहीं है।

हालांकि, यह जरूर हो सकता है कि इस स्कीम में कुछ बदलाव किया जाए लेकिन फ्लेक्सी फेयर पूरी तरह से खत्म नहीं होने जा रहा। रेल मंत्रालय की ओर से मंगलवार को यह साफ संकेत दे दिया गया है। यही नहीं, रेलवे ने पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु के उस दावे से भी किनारा कर लिया है कि 2020 तक ऑन डिमांड रेल टिकट उपलब्ध हो जाएगा। लेकिन अच्छी खबर यह है कि रेलवे ट्रेनों की सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए जल्द ही सभी ट्रेनों के इंजनों को जीपीएस से लैस कर देगा। इसके अलावा रेलवे लगभग 6 हजार रेलवे स्टेशनों को भी कैमरों से लैस करने जा रहा है।

जल्द ही इस बारे में टेंडर जारी कर दिया जाएगा। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि रेलवे फ्लेक्सी फेयर इसलिए खत्म नहीं करना चाहता, क्योंकि उससे रेलवे को मोटी आमदनी हो रही है। रेलवे का तर्क है कि हजारों की तादाद में चल रही ट्रेनों में से सिर्फ 168 ट्रेनें ही ऐसी हैं, जिनमें फ्लेक्सी फेयर सिस्टम लागू है। इस सिस्टम के लागू होने के बाद से राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी ट्रेनों में सीटें जैसे जैसे बुक होती जाती हैं, किराए में बढ़ोतरी होती जाती है। हालांकि रेल मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि रेलमंत्री पीयूष गोयल ने अभी फ्लेक्सी फेयर के बारे में आयी कमेटी की रिपोर्ट को पूरी तरह से स्टडी नहीं किया है लेकिन इस किराया प्रणाली को खत्म नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा रेलवे ने यह भी साफ कर दिया है कि 2020 तक ऑन डिमांड टिकट की उम्मीद न की जाए। रेलवे का कहना है कि इस तरह का दावा कभी किया ही नहीं गया। 2020 तक पैसेंजरों का ऑन डिमांड रेल टिकट का सपना साकार हो सकता है। लेकिन अब रेलवे ने इससे किनारा कर लिया है। रेलवे की ओर से यह भी कहा गया है कि सभी ट्रेनों के इंजनों को जीपीएस से लैस किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि अगले एक साल में सभी ट्रेनों में जीपीएस लगा दिया जाएगा ताकि यात्री खुद अपने मोबाइल पर ही ट्रेन की सही लोकेशन का पता लगा सकेंगे। इस तरह से पैसेंजरों को ट्रेन के आवागमन की सटीक जानकारी मिल सकेगी। इस बीच, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने दावा किया है कि मरम्मत का कार्य चलने के बावजूद बीते साढ़े तीन माह में ट्रेनों की लेटलतीफी पर लगाम लगी है और मई से अब तक ट्रेनों की पंक्चुएलिटी में काफी सुधार आया है।

जहां मई में 55 फीसदी ट्रेनें सही वक्त पर चल रही थीं, वहीं अब सही वक्त पर चलने वाली ट्रेनों की संख्या 73 फीसदी तक पहुंच गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यूपीए सरकार के 10 साल में 2327 एलएचबी कोच का निर्माण किया गया था जबकि एनडीए सरकार के आने के बाद तीन साल में ही 2385 एलएचबी कोच बनाए गए। चालू वित्तीय साल में 4410 एलएचबी कोच बनाने का टारगेट रखा गया है।

(वेबवार्ता)

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