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सेंट स्टीफेंस कॉलेज में “इंडिया दैट इज भारत” कार्यक्रम आयोजित

नगर संवाददाता

नई दिल्ली। यूथ फॉर स्वराज और सेंट स्टीफेंस कॉलेज की लीडरशिप सेल ने मिलकर दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में “इंडिया दैट इज भारत” कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का विषय था वर्तमान का कृषि संकट और युवाओं की भागीदारी। कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के जानकार पी. साईनाथ और स्वराज इंडिया के संस्थापक योगेन्द्र यादव ने छात्रों को संबोधित किया। कार्यक्रम में  डीयू के विभिन्न कॉलेज से सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया। इस दौरान तालाश भारत की…. अभियान के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी बांटे गये। हंसराज कॉलेज की कोमल सिंघल और किरोड़ी मल कॉलेज के रोहित यादव ने इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के दौरान गाँव में रहने के अपने अनुभव साझा किये।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पी साईनाथ ने देश में बढती आर्थिक विषमता और कृषि संकट पर विस्तार से अपनी बात रखी। मौके पर उन्होने कहा की खेती-किसानी का मौजूदा संकट ऐतिहासिक रूप से बड़ा और गहरा है। दशकों से बनायीं जाती रही किसान विरोधी नीतियों का परिणाम है कि आज किसान हाशिये पर धकेल दिया गया है। देश भर में किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है।

कार्यक्रम के दूसरे वक्ता और स्वराज इंडिया और जय किसान आन्दोलन के संस्थापक योगेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा की गाँव-खेत का सवाल महज किसान की आजीविका का सवाल नहीं है बल्कि यह हमारी सभ्यता और मानवता का भी सवाल है। एक सभ्य समाज अपने अन्नदाता के प्रति इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है? आज भारतीय कृषि आर्थिक, पारिस्थितिक और अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है। उन्होने युवाओं को देश भर में चल रहे किसान आन्दोलनों से जुड़ने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा की खेती किसानी के इस अभूतपूर्व संकट के पीछे राजनीति एक मुख्य वजह है। सभी सरकारों और राजनैतिक पार्टियों ने किसानों को ठगने और धोखा देने का काम किया है। दशकों से किसानों की अनदेखी और गाँव की उपेक्षा की जाती रही है। गाँव के श्रम और संसाधनों का इस्तेमाल कर शहरों का विकास किया जा रहा है। अब सरकार खेती-किसानी भी छिनकर कॉर्पोरेट को सौपना चाहती है.

कार्यक्रम के अंत में पी साईनाथ और योगेन्द्र यादव ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के युवा छात्रों से आगामी 30 नवम्बर को होने वाले किसान आंदोलन में सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की जिसमे देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की तरफ कूच करेंगे।

 

 

 

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