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संस्कार भारती ने चांदनी चौक के गौरी शंकर मंदिर में मनाया जन्माष्टमी महोत्सव

नगर संवाददाता

नई दिल्ली। संस्कार भारती चांदनी चौक जिला ने गौरी शंकर मंदिर मेंन्माष्टमी उत्सव का आयोजन किया | उत्सव में बच्चों ने श्री कृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता में भाग लिया साथ ही  नृत्य व संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत किया | कार्यकम का आयोजन गौरी शंकर मंदिर के उपाध्यक्ष श्री सुभाष गोयल एवं श्री प्रवीण जैन के मार्गदर्शन में हुआ |कार्यक्रम का शुभारम्भ संस्कार भारती दिल्ली के अध्यक्ष श्री राजेश चेतन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  श्री सुरेश बिंदल, प्रदेश उपाध्यक्ष  श्रीमती आरती अरोडा, चांदनी चौक जिलाध्यक्ष श्रीमती केनु अग्रवाल द्वारा  नटराज पूजन और दीप प्रज्ज्वलित से हुआ | श्री अरुण भार्गव ने दीप ध्येय गीत प्रस्तुत किया | चांदनी चौक जिला का गठन हाल ही में हुआ है | श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण राधा रूप सज्जा प्रतियोगिता का यह पहला प्रयास है | इस प्रतियोगिता में 70 के करीब 2 ½ से 10 साल के बच्चे भाग ने भाग लिया|  बच्चों के साथ साथ उनके अभिभावकों में अति उत्साह है | सभी बच्चों को प्रमाण पत्र दिए गए | श्रीमती आरती अरोडा ने प्रतियोगिता के घोषित करते हुए कहा कि यहाँ सभी बच्चे एक से बढकर एक कृष राधा, गोप -गोपियों, कंस सभी रूप में आये है | यह तय करना बेहद मुश्किल है कि कौन बेहतर है | श्री कृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं से सबका मन मोह लिया और आज यहाँ बच्चों की प्रस्तुतियों ने सबका मन मोह लिया | बंसीवाला, माखन चोर, रास रचाने वाले यहाँ सभी कृष्ण रूप देखने को मिले |

केनु अग्रवाल ने इस अवसर पर स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कृष्ण एक बहुत नटखट बच्चे हैं। वे एक बांसुरी वादक हैं और बहुत अच्छा नाचते भी हैं। वे अपने दुश्मनों के लिए भयंकर योद्धा हैं। कृष्ण एक ऐसे अवतार हैं जिनसे प्रेम करने वाले हर घर में मौजूद हैं। वे एक चतुर राजनेता और महायोगी भी हैं| कृष्ण का तो जन्म ही सत्य, धर्म और मानवता की रक्षा के लिये हुआ था| जहाँ कृष्ण में ग्वाल बालों के साथ हठखेलिया की, गोपियों के साथ नृत्य किया, गोपियों की मटकी फोड़ी, माखन चुराया वही  बचपन में ही उन्होंने कंस के अत्याचारों के विरुद्ध समाज जागरण किया और कंस का वध किया|

श्री पवन दीक्षित, श्रीमती अनीता अग्रवाल सहित सभी कार्यकारिणी पदाधिकारी एवं सदस्यों ने उत्सव के आयोजन में पूर्ण सहयोग दिया | सभी बच्चों ने मंदिर की विभिन्न मूर्तियों के आगे शीश नवाया |

 

 

 

 

 

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