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मोदी सरकार स्वच्छ भारत मिशन को पब्लिसिटी के लिये इस्तेमाल कर रही है : शर्मिष्ठा मुखर्जी

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी जो दिल्ली प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्षा भी है, ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार स्वच्छ भारत मिशन को एक फोटो खिचवाने या फोटोशॉप की तरह अपनी पब्लिसिटी के इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के पैसे का बहुत सारा हिस्सा मोदी के व्यक्तिगत प्रचार प्रसार के लिए किया जा रहा है। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि 15 सितम्बर 2018 को स्वच्छ भारत मिशन के तहत मोदी, उसके विजय गोयल व अन्य मंत्रियों तथा दिल्ली के सांसद उस दिन तरीके से झाडू भी नही पकड़ पा रहे थे और उन्होंने पहले से साफ क्षेत्रों की सफाई करने का ढोंग मचाया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन का मेन मकसद हाथ से की जाने वाली सफाई और खुले में शौच को समाप्त करना था परंतु पिछले हफते सीवर की सफाई करते हुए 6 लोगों की मौत हुई और देश की राजधानी में प्रातः रेल से जाते समय साफ तौर पर खुले में शौच करते लोग दिखाई देते है। जबकि दिल्ली में कई सरकारी विभाग यह दावा करते है कि दिल्ली खुले में शौच से मुक्त बना दिया गया है।
प्रदेश कार्यालय में संवादाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि सिर्फ शौचालय बनाना ही काफी नही है परंतु उनके अंदर पूरी तरह पानी की सप्लाई, सफाई और सुरक्षा भी होनी चाहिए। उन्होंने वंसत कुंज का उदाहरण देते हुए कहा कि सार्वजनिक शौचालय में एक लड़की के साथ दुष्कर्म किया गया । उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन का काम पेपरों में तो होता दिखाई देता है परंतु धरातल पर कुछ नही है। संवाददाता सम्मेलन में शर्मिष्ठा मुखर्जी के साथ वरिष्ठ नेता चतर सिंह व महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष व पदाधिकारी भी मौजूद थी।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत भारत सरकार के नियमों के अनुसार विभिन्न मदों में पैसा जारी किया जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी उसमें कुछ अपना प्रतिशत लगाती है। परंतु बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि दिल्ली सरकार को स्वच्छ भारत के तहत जो राशि मुहैया कराई गई वह खर्च नही की गई। उन्होंने कहा कि 2014-19 में 349.76 करोड़ केन्द्रीय सहायता के तहत इयरमार्क किया गया था परंतु 2015-16 के वित वर्ष के पश्चात कोई पैसा नही दिया गया और शहरी विकास मंत्रालय से 2016-17, 2017-18 और 2018-19 में दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम द्वारा पैसे को खर्च करने का प्रमाण न जमा करने के कारण उनको कौई पैसा स्वच्छ भारत मिशन अरबन के तहत नही मिला। अभी तक स्वच्छ भारत मिशन के तहत दिल्ली में 138.67 करोड़ रुपया ही रिलीज हुआ है।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने सोलिड वेस्ट मेनेजमेन्ट क्षमता के तहत एक भी यूनिट नही जोड़ा है और जिसमें 613.72 एमजीडी ही है जिसका74 प्रतिशत दिल्ली जल बोर्ड द्वारा ट्रीट किया जाता है अर्थात कांग्रेस की दिल्ली सरकार ने जो स्थिति छोड़ी थी आज वही चल रही है। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के द्वारा तेहखंड में एक प्लांट प्रस्तावित किया गया है परंतु उसका शुरु होना बाकी है।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि सच्चाई यह है कि दिल्ली में 675 स्लम व जेजे कलस्टर हैं जहां पर 3 लाख से जयादा झुग्गियां है। डीयूएसआईबी ने अप्रैल 2016 में एक सर्वे किया था जिसके तहत 226 जगहों पर 253 स्पाट चिन्हित किए गए जाहं पर खुले में शौच किया जाता है। उन्होंने कहा कि डीयूएसआईबी ने स्वच्छ भारत मिशन की गाईडलाईन के तहत 36600 वेस्र्टन टायलेट बनाने की जरुरत है अर्थात 30 लोगों के लिए एक टायलेट। उन्होंने कहा कि डीयूएसआईबी के खुद के एसेसमेन्ट के अनुसार स्लम व जेजे बस्तियों में 11470टायलेट की कमी है जबकि केवल 1021 सार्वजनिक शौचालय ही इस मिशन के तहत बनाई गई। उन्होंने कहा कि डीयूएसआईबी ने 1982 सामुदायिक टायलेट का लक्ष्य था उसमें से केवल 1299 ही बन पाए।

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