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दिल्ली सरकार साठ फीट से छोटी सड़कों को अपने अधिकार क्षेत्र में लेना चाहती है: महापौर

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। उत्तरी दिल्ली के महापौर आदेश गुप्ता ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा की दिल्ली सरकार उत्तरी दिल्ली नगर निगम से साठ फीट से छोटी सड़कों के मरम्मत व सुधार कार्य को भी अपने अधिकार क्षेत्र में लेने की कोशिश कर रही है, जिसके लिए दिल्ली सरकार ने निगम को पत्र लिख कर इन सड़कों पर मरम्मत कार्य करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा है। प्रेस वार्ता के दौरान स्थायी समिति अध्यक्षा, सुश्री वीना विरमानी और नेता सदन तिलक राज कटारिया भी उपस्थित थे।
महापौर आदेश गुप्ता ने कहा की उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने दिल्ली सरकार से एल.ऐ रोड बजट शीर्ष में आंतरिक सड़कों और कॉलोनियों की सड़कों की मरम्मत व सुधार कार्य के लिए धन की मांग की थी। जिस के जवाब में निगम को दिल्ली सरकार से एक पत्र प्राप्त हुए जिस में कहा गया है की सभी तीनों निगमों के लिए प्रस्तावित 1000 करोड़ रुपये की निधि का प्रावधान किया है। उन्होनें कहा की इस फंड को बजट में निर्धारित किया गया था परंतु अभी तक उत्तरी दिल्ली नगर निगम को प्रस्तावित बजट में से कोई भी पैसा प्राप्त नहीं हुआ है। यह निगमों को पंगु बनाने की एक ओर साजिश है।
महापौर, ने कहा की उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने 17 विभिन्न योजनाओं के अंदर लगभग 80-85 सड़कों की मरम्मत व सुधार कार्य के लिए 91.05 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिल्ली सरकार को भेजा था। उन्होने कहा कि निगम अधिकार क्षेत्र में कुल 47 योजनाओं के अंदर 250 से अधिक सडको की मरम्मत व रखरखाव के कार्य के लिए 327 करोड़ रुपये की धनराशि की आवश्यकता है।
महापौर आदेश गुप्ता ने कहा कि अभी तक उत्तरी दिल्ली नगर निगम को दिल्ली सरकार से कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई है,जिसकी वजह से निगम मरम्मत कार्य करने में सक्षम नहीं हैं और नतीजतन, दिल्ली के नागरिक को परेशानी झेलनी पड़ रही हैं। उन्होने संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर का उदाहरण देते हुए कहा की वहां की सडकें इतनी खराब है जिस की वजह से वहा हवा में धूल के कणों की मात्रा बढ रही है। उन्होंने कहा की उत्तरी दिल्ली नगर निगम को साफ-सफाई, पार्कों के रखरखाव, सामुदायिक केंद्रों और सड़क की मरम्मत व रखरखाव आदि के कार्यो के लिए इस वित्तीय वर्ष में कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। महापौर ने कहा की दिल्ली आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) में सभी तीन निगमों से भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए जिस के लिए दिल्ली सरकार को उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने 7 नवंबर 2017 को नाम भेजे थे, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। डीयूएसआईबी में कार्यकाल केवल 2 साल का होता है जिनमें से लगभग एक वर्ष पहले ही निकल चुका है। उन्होने कहा की यह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बहिष्कार की रणनीति दर्शाता है। उन्होंने दिल्ली सरकार से नागरिकों के कल्याण के लिए कार्य करने के लिए अपील की। उन्होनें कहा की दिल्ली सरकार को संविधान का सम्मान करना चाहिए और दोष पूर्ण राजनीति करना बंद कर देनी चाहिए। उन्होंने दिल्ली सरकार से डीएमसी अधिनियम के अनुसार निगम को अपने कर्तव्यों व कार्यों करने के लिए तत्काल प्रभाव से धन जारी करने की भी अपील की।
स्थायी समिति अध्यक्षा, सुश्री वीना विरमानी ने कहा कि दिल्ली सरकार अपने अधिकार क्षेत्र के तहत क्षेत्रों में काम नहीं कर रही है और उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र पर अतिक्रमण करके उसे पंगु बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार न तो अपने अधिकार क्षेत्र में काम कर रही है, न ही निगम को काम करने दे रही है।
उन्होंने कीर्ति नगर औद्योगिक क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा की यह क्षेत्र डीएसआईआईडीसी के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिस की सडके इतनी खराब है की इनको तत्काल मरम्मत की जरूरत है। उन्होने कहा की इस क्षेत्र में सीवर के पानी की निकासी का भी कोई प्रावधान नहीं है, जिसके कारण शौचालयों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को ऐसे क्षेत्रों में कार्य करना चाहिए ताकि वहां रह रहे लोगों के जीवन को सुगम बनाया जा सके। नेता सदन तिलकराज कटारिया ने कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम दिल्ली सरकार के इस कदम का विरोध करता है। उन्होंने कहा कि हमारे फंड रोककर दिल्ली सरकार हमें काम नहीं करना देना चाहती है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो दिल्ली सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार उत्तरी दिल्ली नगर निगम का फंड जारी करने से बच रही है ताकि वह इसे अन्य मदों में इस्तेमाल कर सके।

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