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लोक शिक्षा परिषद् द्वारा “समर्पण सम्मान समारोह”

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। लोक शिक्षा परिषद् के द्वारा विद्यालयों के संचालन के लिए सहयोग करने वाले दानदाताओं के लिए “समर्पण सम्मान समारोह होटल ली मेरीडियन, नयी दिल्ली में आयोजित किया गयाI इस कार्यक्रम में संस्था को सहयोग देने वाले, उद्योग जगत की जानी मानी हस्तियों जिन्होने कम से कम 100 विद्यालयों का दान दिया है उन्हें “समर्पण सम्मान 2018” से सम्मानित किया गयाI
एकल अभियान देश में अग्रणी सामाजिक संगठन के रूप में करोड़ो गरीब ग्रामवासियों के शैक्षणिक एवं सामाजिक सशाक्तिकरण हेतु समर्पित है I यह अभियान “एक गाँव, एक शिक्षक, एक विद्यालय” के सिद्धान्त पर संचालित हो रहा हैI 1988 में झारखण्ड में 60 विद्यालयों से शुरू हुआ ‘एकल अभियान’ आज 76,611 विद्यालयों तक पहुँच चुका हैI जिसमें समाज के कुल 20,55,630 बच्चे एकल के ज्ञान पुंज से प्रकाशित हो रहें हैंI एकल आने वाले समय में 1,00,000 विद्यालय के लक्ष्य को जल्द ही पूर्ण करने की दिशा में अग्रसर हैI
इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित महानुभावों की गरिमामयी उपस्थिति रही और रमेश सरावगी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, वन बंधु परिषद्) का सानिध्य प्राप्त हुआ I मुख्य अतिथि सुभाष चंद्रा (सांसद- राज्य सभा, चेयरमैन – एकल ग्लोबल), दीप प्रज्वलन सुभाष अग्रवाल, मूलचंद अग्रवाल एवं चन्द्रप्रकाश अग्रवाल जी (मधुसूदन घी), विशिष्ठ अतिथि महेश गुप्ता जी (केंट आर ओ), बी.पी. अग्रवाल जी (प्रिय गोल्ड), शांति प्रकाश (काली मेहंदी), मुख्य वक्ता माननीय श्याम गुप्त (प्रणेता एकल अभियान), रहे एवं अध्यक्षता लक्ष्मी नारायण गोयल जी (अध्यक्ष न्यासी मंडल व उपाध्यक्ष एस्सेल ग्रुप) ने कियाI दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम कार्यक्रम की शुरुवात की गयी जिसमें हिमांचल प्रदेश के एकल विद्यालय के कार्यकर्ताओं एवं बच्चों द्वारा सांस्कृतिक एवं देशभक्ति से परिपूर्ण कार्यक्रम की प्रस्तुति की गयी, जिसने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया I तत्पश्चात समर्पित भाव से दान करने वाले दानदाताओं को सम्मानित किया गया I
एकल विद्यालय के लिए अविस्मरणीय सहयोग एवं समर्पित भाव से सेवा करने के लिए इस समर्पण सम्मान समारोह में भारत लोक शिक्षा परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र अग्रवाल को एकल रत्न से सम्मानित किया गया। भारत लोक शिक्षा परिषद के सम्मान समारोह में एकल के ग्लोबल चेयरमैन एवं राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्र ने कहा कि समर्पित भाव से सेवा करना हमारा कर्तव्य है और एकल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एकल शिक्षा के साथ साथ संस्कारों सहित शिक्षा देता है क्योंकि हमारी सभ्यता संस्कृति को बचाना हमारा परम कर्तव्य है यही कारण है कि हमारे बच्चों में आज भी संस्कार है।
एकल अभियान के प्रणेता माननीय श्याम जी गुप्त ने अपने ओजस्वी भाषण में कहा कि एकल में इतनी क्षमता है कि भारत एक बार फिर से विश्व गुरु बन सकता है क्योंकि एकल ग्रामीण एवं वनवासी क्षेत्र के बच्चों की पंचमुखी शिक्षा के लिए कार्यकर्ता है। वह दिन दूर नहीं जब भारतीय संस्कृति एक बार फिर पूरे विश्व का नेतृत्व करेंगी। भारत लोक शिक्षा परिषद के प्रधान श्री नंदकिशोर अग्रवाल ने बताया की एक विद्यालय के 1 वर्ष तक के संचालन में 20 हजार का खर्च आता है जिसमें 25 से 30 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इन्होंने एकल से जुड़ने के लिए लोगों को प्रेरित किया और अधिक से अधिक सहयोग की अपील की। एकल विद्यालय स्वामी विवेकानंद के इस वाक्य को चरितार्थ करता है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर बच्चे विद्यालय नहीं जा सकते तो विद्यालयों को बच्चों तक पहुंचना होगा इसी आदर्श वाक्य पर एकल अभियान आज संपूर्ण भारत में कार्यरत है।

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