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लोगों को धर्म और जाति के नाम पर बाँटा जा रहा है: केजरीवाल

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि देश में लोगों को धर्म और जाति के नाम पर बाँटा जा रहा है और उनमें नफरत के बीज बोए जा रहे हैं जिनसे समाज में वैमनष्य की भावना को बढ़ावा मिल रहा है और देश कमजोर हो रहा है। ऐसे में साम्प्रदायिक सौहार्द और कॉमी एकता को बढ़ावा देने वाले ऐतिहासिक फूल वालों की सैर जैसे उत्सवों को धूम-धाम से मनाया जाना चाहिए और लोगों में एक दूसरे के प्रति प्रेम आदर और सद्भावना के संदेशों को जोर-शोर से फैलाना चाहिए।
श्री केजरीवाल ने ये विचार आज अंजुमन सैर ए गुलफरोशां के प्रतिनिधिमंडल द्वारा फूलों का पंखा प्राप्त करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर पूरा दिल्ली सचिवालय शहनाई की गूँज से गुंजायमान हो उठा। आयोजकों ने मुख्यमंत्री को फूलों का पंखा भेंट कर उन्हें फूलों से लाद दिया। इस मौके पर आयोजकों ने उपस्थित मुख्य सचिव, श्री अंशु प्रकाश को भी पंखा भेंट किया।
साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक फूलवालों की सैर महरौली स्थित महान सूफी संत ‘ख्वाजा कुतुबद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह‘ पर दोनों समुदाय- हिंदू और मुसलमान ढोल-ताशों के साथ फूलों की चादर और पंखा चढ़ाएंगे और पांडवकालीन ‘योगमायाजी मंदिर’ में फूलों का छत्र और पंखा चढ़ाएंगे। हमारे देश की विविधता और राष्ट्रीय एकता और अखंडता का भव्य और समृद्ध स्वरूप देखने को मिलेगा, जब 17 नवंबर को भारत के विभिन्न राज्यों से आनेवाले सांस्कृतिक दल इस समारोह में अपनी लोककलाओं की झलक पेश करेंगे और दरगाह और मंदिर के लिए सजे धजे पंखे लाएंगे।
अंजुमन सैर ए गुलफरोशां की महासचिव श्रीमती उषा कुमार ने इस सांस्कृतिक उत्सव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुगल काल से चले आ रहे साम्प्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता के संदेशवाहक मेले फूलवालों की सैर को सन् 1942 में अंग्रेजों ने भारत छोड़ो आंदोलन के विरोध में तथा अपनी विभाजनकारी निति फूट डालो और राज करो के अंतर्गत बंद करा दिया था। इसे दोबारा 1961 में दिल्लीवासियों की अपील पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पं जवाहरलाल नेहरू ने शुरू कराया था।

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