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दिल्ली जल बोर्ड की विफलता के जिम्मेदार हैं केजरीवाल : मनोज तिवारी

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली के इंद्रपुरी इलाके में अब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट न बनाए जाने पर एनजीटी ने दिल्ली जल बोर्ड को 5 करोड़ रुपए सीपीसीबी को जमा करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने दिल्ली सरकार के दिल्ली जल बोर्ड से कहा कि अगर मई 2019 तक इंद्रपुरी इलाके में एसटीपी नहीं बना तो जमा कराए गए ये 5 करोड़ रुपए सीपीसीबी जब्त कर लेगी। दिल्ली जल बोर्ड ने एनजीटी को आश्वासन दिया था कि इंद्रपुरी इलाके में एसटीपी बना दिया जाएगा, लेकिन अब तक न तो एसटीपी लगवाया गया और न ही इंद्रपुरी के लोगों की समस्या हल हुई। काफी समय से लंबित जब एसटीपी का निर्माण कार्य दिल्ली सरकार द्वारा शुरू ही नहीं किया गया तो एनजीटी ने दिल्ली जल बोर्ड से इसकी वजह पूछी लेकिन इस बार भी दिल्ली जल बोर्ड का रवैया टालमटोल वाला ही था। दिल्ली जल बोर्ड ने एनजीटी से कहा कि मई 2019 तक एसटीपी बन जाएगा, जिसके बाद एनजीटी ने बतौर सिक्योरिटी 5 करोड़ रुपए सीपीसीबी में जमा कराने का निर्देश दिया है।
इस मुद्दे पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि एनजीटी द्वारा दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को रोकने के लिए लगातार कई सख्त आदेश जारी कर चुकी है, लेकिन इस पर दिल्ली की केजरीवाल सरकार बिलकुल भी गंभीर नहीं है जिस कारण प्रदूषण की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। दिल्ली की जनता जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अपने ऊपर हुए फैब्रिगेटेड मिर्ची अटैक पर विशेष सत्र बुलाते हैं। एयर क्वालिटी इंडेक्स बद से बदत्तर होता चला जा रहा है लेकिन दिल्ली सरकार झूठे आरोपों और नाटकीय राजनीति में व्यस्त है।
श्री तिवारी ने कहा कि अभी हाल ही में इंडस्ट्रीज से निकलने वाले दूषित पानी के निस्तारण की सही व्यवस्था न होने के कारण दिल्ली सरकार पर एनजीटी ने 50 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। साथ ही कुछ दिन पहले भी दिल्ली के चीफ सेक्रेट्री और जल बोर्ड पर एनजीटी ने एक-एक करोड़ का जुर्माना लगाया लेकिन केजरीवाल जी इस मुद्दे को गंभीरता से लेने को तैयार ही नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में एसटीपी की संख्या बहुत कम है और जहां एसटीपी ढंग से काम कर रहे हैं वहां पानी को ट्रीट करने के बाद उसके सही इस्तेमाल की व्यवस्था नहीं हो पाई है। जिस कारण दिल्ली में ग्राउंड वॉटर का दोहन और बढ़ गया है।
श्री तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के शासनकाल में जबसे उन्होंने जल मंत्रालय संभाला है तब से दिल्ली जल बोर्ड की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि 2 साल पहले 180 करोड़ के फायदे में चल रहा जल बोर्ड अब 800 करोड़ के घाटे में है। उन्होंने कहा कि हम उन घटनाओं को नहीं भूल सकते जिसने दिल्ली को सारे विश्व में शर्मसार कर दिया जब पानी को लेकर झगडे में कई लोगों ने अपनी जान गवाई। आज 21वीं शताब्दी में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की असफलताओं के कारण पानी की कमी के से हुए झगडे में लोग मर रहे हैं यह हमारे लिए अत्यंत दुखदायी है। लेकिन केजरीवाल जो खुद को दिल्ली का मालिक बताते हैं वह इतने संवेदनहीन व्यक्ति हैं कि उन्हें पानी से हुई मौतों का भी कोई गम नहीं सिर्फ अपनी ओछी राजनीति और निजी कामों के लिए दिल्ली की जनता के पैसे से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाते हैं और दिल्ली जल बोर्ड की नाकामियों पर सत्र नहीं बुलाया जाता, कोई चर्चा तक नहीं की जाती।
मनोज तिवारी ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल ने सत्ता में आने से पूर्व टैंकर माफियाओं को खत्म कर शीला दीक्षित सरकार के खिलाफ टैंकर घोटाले की जांच करने का वादा किया था और हम सभी जानते हैं कि सत्ता में आने के बाद उन्होंने उस घोटाले पर कैसे चुप्पी साध ली। जैसी सांठगांठ पूर्व मुख्यमंत्री शीला की टैंकर माफियाओं के साथ थी अब केजरीवाल सरकार ने भी टैंकर माफियाओं के साथ वैसी ही सांठगांठ कर ली है और पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त हो चुकी है। उन्होंने बताया कि हम सभी ने दिल्ली दूषित पानी और पानी की कमी की समस्या को देखा और जनता जानती है कि केजरीवाल जी ने उस समस्या के समाधान के लिए कुछ नहीं किया और जनता इसका जवाब उन्हें जरूर देगी।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यह दिल्ली का दुर्भाग्य है कि केजरीवाल दिल्ली के ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनके पास एक मात्र जल बोर्ड का विभाग है, उसे भी नहीं संभाल पा रहे और दिल्ली की जनता के पैसे से दूसरे राज्यों में जाकर राजनीति करते हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि अब उनकी दाल दिल्ली में नहीं गलेगी इसलिए दूसरे राज्यों में जाकर अपनी विफलताओं को उपलब्धि बता कर झूठ फैला रहे हैं। श्री तिवारी ने दिल्ली सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द इंद्रपुरी इलाके के साथ-साथ अन्य इलाकों का भी निरीक्षण किया जाये जहाँ पर एसटीपी की आवश्यकता है वहां अतिशीघ्र निर्माण कर दिल्ली की जनता को इस समस्या से मुक्ति दिलाएं।

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