‘हमें दे दें अधिकार, 30 फीसदी तक कम कर देंगे मेट्रो किराया’

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। मेट्रो के फेज-4 को मंजूरी देने में हुई देरी पर विपक्ष ने जहां आप सरकार को घेरने की कोशिश की, वहीं डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया ने बीजेपी और केंद्र सरकार को देरी के लिए जिम्मेदार ठहराया। विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने सवाल उठाया कि आखिर 3 साल तक फाइल क्यों रोकी गई?
डेप्युटी सीएम ने विधानसभा में कहा कि जिस तरह से बीजेपी ने मोहल्ला क्लिनिक, डोर स्टेप डिलिवरी जैसी जनहित योजनाओं को रोकने की कोशिशें की, उसी तरह से बीजेपी ने कोशिश की कि मेट्रो फेज- 4 को क्लियर नहीं होने दिया जाए। इससे योजना में देरी हुई। डेप्युटी सीएम ने मेट्रो किराए में बढ़ोतरी का मामला उठाया। कहा कि मेट्रो दिल्ली का शौक नहीं, जरूरत है लेकिन लग रहा है कि हवा-हवाई तरीके से इसे चलाया जा रहा है। बीजेपी नहीं चाहती कि किराया कम हो। दिल्ली सरकार मेट्रो में बराबर की हिस्सेदार है और हमारी राय को भी महत्व मिलना चाहिए। सिसोदिया ने कहा कि अगर दिल्ली सरकार को अधिकार मिल जाए तो मेट्रो के किराए में 25 से 30 फीसदी तक कमी करके दिखा देंगे।
उन्होंने बीजेपी और केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जानबूझकर मेट्रो फेज-4 के प्रॉजेक्ट की लागत को बढ़ाया जाता रहा। पहले 57000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत बताई, अब 46000 करोड़ रुपये तय किए हैं। ट्रांसपॉर्ट मिनिस्टर कैलाश गहलोत ने कहा कि जिस तरह से अधिकारियों ने फाइलों पर ऑब्जेक्शन लगाए। कई रूट्स पर सवाल उठाए। साफ था कि केंद्र के इशारे पर यह किया जा रहा था। आप सरकार ने तमाम अड़चनों के बाद योजना क्लियर की है। उन्होंने कहा कि डीएमआरसी बोर्ड ने इस योजना को मंजूर नहीं किया था और केंद्रीय मंत्री कह रहे थे कि दिल्ली कैबिनेट पहले योजना को मंजूर करे। कुछ दिन पहले ही डीएमआरसी बोर्ड ने योजना को मंजूरी दी है। बीते बुधवार सरकार ने इसे क्लियर कर दिया।
पक्ष के नेता ने आप विधायक के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि सरकार की संकीर्ण राजनीति के चलते परियोजना की लागत कई सौ करोड़ रुपये बढ़ गई। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने दिल्ली सरकार से पूछा कि 3 साल बाद क्या बदलाव आ गया, जो सरकार को रोकी हुई योजना को हरी झंडी दिखानी पड़ी। आज भी अधिकारी वही हैं और उनकी आपत्तियां भी वहीं हैं, तो अब सरकार ने फाइल कैसे क्लीयर कर दी। यह काम तो 3 साल पहले भी हो सकता था।

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