ताजा ख़बर

रामनिवास गोयल ने पुस्तक “जाटव समाज का उद्गम एवं दलित आन्दोलन” का विमोचन किया

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने आज समाजसेवी व लेखक डा. ओम प्रकाश मौर्यद्वारा लिखित पुस्तक जाटव समाज का उद्गम एवं दलित आन्दोलन का दिल्ली विधानसभा में विमोचनकिया। इस अवसर पर विधायक श्री विषेश रवि, विधायक मनोज कुमार और विधायक राजू धिंगानके अलावा बड़ी संख्या में जाटव समाज से जुड़े लोग और पत्रकार मौजूद थे।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने कहा कि लेखन कार्य आसान कार्य नहीं है। उन्होंनेकहा कि जाति व्यवस्था किसी भी ग्रंथ में नहीं थी, कुछ लोगों ने अपने निजी फायदे के लिए समाज कोजाति बंधनों में बांध दिया। उन्होंने समाज के हर उस वर्ग को दलित बताया जो अभावों में रहता है।
उन्होंने ने दलित समाज के प्रबु़द्ध लोगों को आगे आकर अपने समाज के लोगों को सही दिशा दिखाने औरशिक्षा की ओर अग्रसर करने का अह्वान किया और इस बारे में उन्हें चिंतन करने का भी सुझाव दिया।
श्री गोयल ने कहा कि देश की प्रगति के लिए जातिविहीन समाज की संरचना की महत्ती जरूरत है।जातिवाद के आधार पर अत्याचार और दमकारी प्रहार की भरत्सना की जानी चाहिए।
पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री रामनिवास गोयल ने पुस्तक केलेखक डा. ओम प्रकाश मौर्य को बधाई दी और उनका स्वागत फूलों का गुलदस्ता एवं शाल देकर किया।
श्री गोयल ने यह भी कहा कि हमारे राष्ट्र व संस्कृति के विकास को सुनिश्चित करने में देश के हरमजहब और जाति के लोगों की अहम भूमिका रही है। राष्ट्र की सांस्कतिक एवं सामाजिक विराटता कोबनाए रखने में और देश के समग्र विकास में देश की सभी जातियों के लोगों ने अपना भरपूर योगदानदिया है।
श्री गोयल ने आगे कहा कि आज के वैज्ञानिक व प्रगतिशील युग में किसी जाति को छोटा या बड़ा कहनाठीक नहीं होगा और न ही किसी के द्वारा इन जातियों में भिन्नता का भेद बताना न्यायसंगत होगा।आज जरूरत इस बात की है कि प्रगति की दौड़ में सभी लोगों का साथ जरूरी है। विकास का लाभ सभीलोगों को मिले। कोई किसी को छोटा या बड़ा न समझे। सब सभी की भावनाओं का सम्मान और आदरकरें।
श्री गोयल ने कहा कि डा. मौर्य ने प्रस्तुत पुस्तक में अनुसूचित जातियों में जाटव जाति के उद्भव औरविकास पर सामाजिक, सांस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।
श्री गोयल ने कार्यक्रम के अंत में कहा कि डा. ओपी मौर्य को इसी विधानसभा में दिल्ली सरकार द्वाराडा. अम्बेडकर रत्न पुरस्कार से अनन्य सामाजिक सेवाओं के लिए पुरस्कृत किया गया था। श्री गोयल नेकहा कि इस अवसर पर मैं अपने हृदय की गहराईयों से डा मौर्य को उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक केलिए एकबार फिर दिल्ली विधानसभा में स्वागत किये जाने पर बधाई देता हॅू।
लेखक ने पुस्तक में सन 1931 के जनगणना सर्वेक्षण के अनुसार देश में जातियों की संख्या 6400 दर्शाई है जिसमें अनुसूचित जाति के लोगों की जातियों के संख्या 1208, पिछड़े वर्णों की संख्या 1931 और अन्य जाति के लोगों की संख्या 3229 बताई है .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *