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‘समझना मत मुझे अबला’ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह का आयोजन

नई दिल्ली। एम०के० साहित्य अकादमी पंचकुला (रजि०) एवं संस्कार भारती पंचकूला (इकाई) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह ‘अदब की महफ़िल कवियों का दिल’ का आयोजन इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2, पंचकूला में मुख्य अतिथि : श्रीमती लक्ष्मी रूपल जी (वरिष्ठ सहित्यसर्जक) तथा विशेष अतिथि: श्रीमती मीता खन्ना जी ( प्रख्यात गायिका ) व श्रीमती सुदेश नूर जी ( वरिष्ठ कवयित्री ) की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। समारोह का आगाज़ धेय गीत व समापन वन्देमात्रम से किया गया।
साहबाद से कुलवन्त सिंह ‘रफ़ीक’ तथा देविन्द्र बीबीपुरिया “मैहरम” प्रख्यात ग़ज़लकार भी इस समारोह सम्मिलित हुए और इस समारोह में चार चाँद लगा दिए।
श्री देविन्द्र बीबीपुरिया “मैहरम” ने अपने जीवन की पूँजी के विषय में कहा-
” मैं कहता हूँ मेरे जीवन की बस ये ही कमाई है।
मेरी अनपढ़ सी माँ ने मुझको पी०एच०डी० कराई है।”
कुलवन्त सिंह ‘रफ़ीक’ जी का शेर है —
“जदो कोई राज़ खोले तां बड़ी तकलीफ़ होन्दी ऐ
जदो विश्वास डोले तां बड़ी तकलीफ़ होन्दी ऐ”
डॉ०प्रतिभा ‘माही’ ने अपने हौसले को कुछ इस तरह प्रस्तुत किया, देखिये–
“पर्त दर पर्त जब भी खुली हूँ मैं।
आँसुओं से सदा ही धुली हूँ मैं।
रुख़ बदल डालूँगी इन हवाओं का।
आज इस बात पर आ तुली हूँ मैं।”
मंजू बिसला ने कहा– “नारी ग्रहणी हो या काम वाली, योगदान समाज मे उसका आँका नहीं जा सकता”
सुनीता गर्ग ने अपने अस्तित्व को दर्शाते हुए कहा — “नारी हैं इस युग की, कुछ करके दिखलाऊँगी, अपनी पहचान बनाऊँगी” ।
श्री गणेश दत्त ने मंच सँभाला और अपने गीत- ‘इस धरा का इस धरा पर सब धरा रह जाएगा’
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 1)- डॉ मोनिका सोनी 2)- सुश्री कंचन भल्ला 3)- सुश्री सुनीता गर्ग 4)- सुश्री मंजू बिसला 5)- सुश्री सीमा गुप्ता 6)- सुश्री करुणा 7)- सुश्री सुशीला अरोड़ा 8)- सुश्री कमला देवी 9)-श्री कुलवन्त सिंह ‘रफ़ीक’ 10)-देविन्द्र बीबीपुरिया “मैहरम” तथा सभी अतिथियों को पगड़ी,उपहार, माला व सगुन का नारियल देकर नवाज़ा गया।
वहाँ उपस्थित गरिमा गर्ग, नीरजा, सत्रजीत गौर , ओ०पी० सिहाग व अन्य कलामकारों ने अपने अपने भाव प्रकट किये तथा श्रोताओं ने पूरा आनन्द लिया। सुरेश गोयल जी ने समरोह के अंत में एम०के० साहित्य अकादमी पंचकुला (रजि०) एवं संस्कार भारती की तरफ से सभी का धन्यवाद व आभार व्यक्त किया और कहा समारोह की सफलता का श्रेय डॉ० प्रतिभा माही व उनकी टीम को जाता है।

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