अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कवयित्री सम्मेलन का आयोजन

नई दिल्ली। दिल्ली हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पखवाड़े के उपलक्ष्य में ‘एक शाम कविता की आतंरिक यात्रा के नाम कवयित्री सम्मेलन का आयोजन हिन्दी भवन, विष्णु दिगम्बर मार्ग (निकट बाल भवन सम्मेलन के अध्यक्ष महेश चन्द्र शर्मा पूर्व महापौर के सान्निध्य में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. रश्मि सिंह, आई.ए.एस., सचिव, नई दिल्ली पालिका परिषद् ने किया।
मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती ऋचा चतुर्वेदी, आकाशवाणी, विशिष्ट अतिथि सुश्री नलिनी उपस्थित थीं। अध्यक्षता डॉ. कुसुम अंसल, सुपरिचित साहित्यकार ने की। सान्निध्य डॉ. मधु पंत का प्राप्त हुआ। स्वागताध्यक्ष के रूप में श्रीमती अंजू आहूजा थी जिन्होंने सभी अतिथियों एवं कवयित्रियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन सम्मेलन की महामंत्री श्रीमती इन्दिरा मोहन एवं साहित्य मंत्री डॉ रचना विमल ने संयुक्त रूप से किया। हिन्दी सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ सरिता शर्मा, सुश्री कीर्ति माथुर, डॉ निशा भार्गव एवं सुश्री सुमेधा आर्या ने काव्य पाठ कर सभी को मंत्र मुग्घ किया। कार्यक्रम का उद्घान अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं आचार्य श्री रामदत्त मिश्र ‘अनमोलÓ के मंत्रोच्चारण से हुआ। सरस्वती वंदना डॉ कीर्ति काले ने की।
कार्यक्रम की रूप रेखा देते हुए सम्मेलन के अध्यक्ष एवं पूर्व महापौर महेश चन्द्र शर्मा ने बताया कि सम्मेलन पिछले 17 वर्षों से कवयित्री सम्मेलन का आयोजन करता आ रहा है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार व प्रगति के लिए निरंतर कार्यरत है। सम्मेलन द्वारा साहित्यश्री पुरस्कार, मालवीय जयंती, विवेकानन्द जयंती पर गोष्ठी, भाषण प्रतियोगिता और काव्य प्रतियोगिता का आयोजन करते हैं।
उद्घाटनकत्र्ता के रूप में उपस्थित डॉ रश्मि सिंह ने कहा कि दिल्ली हिन्दी साहित्य सम्मेलन इतने वर्षों से निरन्तर हिन्दी के प्रचार-प्रसार में कार्यरत् है इसके लिए मैं उन्हें बधाई देती हुई और आशा करती हूँ कि यह संस्था महेश चन्द्र शर्मा की अध्यक्षता में निरन्तर नई ऊंचाईयों को छुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ कुसुम अंसल ने कहा कि इस कवयित्री सम्मेलन में आमंत्रित कवयित्री बहनें अपनी रचनाओं से निरन्तर महिलों को प्रेरित एवं जागृत करने का काम कर रही हैं। इस आयोजन के लिए सम्मेलन को हार्दिक बधाई।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए श्रीमती ऋचा चतुर्वेदी सम्मेलन को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि विश्वास है सम्मेलन इसी प्रकार महेश चन्द्र शर्मा की अध्यक्षता में नए आयाम स्थापित करने में सफल होगा।
विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हए सुश्री नलिनी ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से महिलाओं को आत्मसम्मान से अपनी बात रखने का अवसर मिलता है और वह समाज को नई दिशा प्रदान करने में समक्ष होती हैं।
सान्निध्य वक्तव्य देते हुए डॉ मधु पंत ने कहा कि महिलाओं की भूमिका समाज में सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन पर बच्चों को संस्कारवान और शिक्षित करने का महत्वपूर्ण दायित्व होता है। जिस परिवार में महिलाएं अपने दायित्व को सही ढंग से निभाती हैं उस परिवार के बच्चें निश्चित रूप से शिक्षित और संस्कारवान होते हैं। महिलाओं को अपने दायित्व को समक्षना होगा।
कवयित्री सम्मेलन का संचालन करते हुए इन्दिरा मोहन ने कहा कि जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो समाज बढ़ता है, राष्ट्र बढ़ता है, समाज की प्रगति होती हैं और बच्चों में संस्कार पैदा होते हैं।
सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ कीर्ति काले, डॉ निशा भार्गव ने अपनी हास्य रचनाओं से सभी को आनन्दित कर दिया। इस अवसर पर अरूण बर्मन, सुरेश खण्डेलवाल, सुरेश चन्द्र दुबे, डॉ रवि शर्मा, आचार्य रामदत्त मिश्र अनमोल,डॉ. तारा गुप्ता, श्रीमती विनीता बियानी, श्रीमती सरोज शर्मा, डॉ संजीव सक्सेना, जय प्रकाश शर्मा आदि कवि, साहित्यकार, पत्रकार एवं हिन्दी सेवी उपस्थित थे।

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