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रोग निवारक उपायों से लोगों को अवगत कराना अत्यंत आवश्यक है : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने चिकित्सा विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे विद्यार्थियों में नैतिक, सामाजिक और आचार संबंधी मूल्य विकसित करने वाले पाठ्यक्रम के एक हिस्से के रूप में मानव मूल्यों से संबंधित शिक्षण देना शुरू करें। श्री नायडू राजस्थान के जयपुर में महात्मा गांधी चिकित्सा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
श्री नायडू ने इस विश्वविद्यालय की भूरि-भूरि प्रशंसा की, जिसने कुछ ही समय में स्वयं को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के एक महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में स्वयं को स्थापित कर लिया है। उन्होंने भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और किफायती मरीज देखभाल सुनिश्चित करने की दृष्टि से इस संस्थान को एक उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में स्थापित करने हेतु अपनी प्रतिबद्धता और समर्पण दर्शाने के लिए डॉ. एम.एल. स्वर्णकर एवं उनकी टीम की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा ही किसी भी राष्ट्र की प्रगति की नींव डालती है। उन्होंने यह भी कहा कि सही शिक्षा देने से नागरिकता से जुड़े मूल्य विकसित होंगे, लोगों को अज्ञानता से मुक्ति मिलेगी, लोग ज्ञान, सूचनाओं एवं कौशल से सशक्त होंगे और इसके साथ ही लोग न केवल अपनी, बल्कि राष्ट्र की नियति को भी विशिष्ट स्वरूप प्रदान करने के लिए नई भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में समर्थ होंगे।
उपराष्ट्रपति ने यह राय व्यक्त की कि उच्च शिक्षा से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को एक ऐसी प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जो विद्यार्थियों को प्रासंगिक एवं सही शिक्षा प्रदान करे और इसके साथ ही उन्हें कौशल से लैस करे। उन्होंने कहा कि देश-विदेश में नजर आ रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए भारत के शैक्षणिक मूल्यों में व्यापक सुधार की जरूरत है।
श्री नायडू ने विश्वविद्यालयों से ऐसी व्यापक चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने को कहा, जो युवा चिकित्सा स्नातकों के समग्र व्यक्तित्व को विकसित करे। श्री नायडू ने पाठ्यक्रम में चिकित्सा संबंधी नैतिक मूल्यों, मानव व्यवहार से जुड़े विज्ञान, दर्शन शास्त्र, संस्कृति, विरासत, ध्यान और योग जैसे विभिन्न विषयों को भी शामिल करने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कभी भी हार न मानने को कहा। उन्होंने कहा कि न तो सफलता और न असफलता ही स्थायी होती है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में असंतुलित बुनियादी ढांचागत विकास का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने शहरी क्षेत्रों के आधुनिक अस्पतालों की भांति ही ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में भी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने पर विशेष जोर दिया।
श्री नायडू ने निजी क्षेत्र से विशेषकर ग्रामीण-शहरी खाई को पाटने के लिए सरकार के प्रयासों में साथ देने का अनुरोध किया। उन्होंने एमबीबीएस स्नातकों को प्रथम पदोन्नति देने से पहले उनके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 3 साल तक सेवाएं देना अनिवार्य करने का भी सुझाव दिया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जा सके।
श्री नायडू ने किफायती चिकित्सा सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में लोगों को चिकित्सा संबंधी खर्च को अक्सर अपनी जेब से ही पूरा करना पड़ता है। उन्होंने इलाज के कारण गरीब मरीजों के ऋण जाल में फंस जाने पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने 500 मिलियन गरीब एवं आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए ‘आयुष्मान भारत : राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजनाÓ का शुभारंभ किए जाने पर प्रसन्नता जताई।

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