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त्यौहार हमारे देश की समग्र संस्कृति और समृद्ध विरासत का प्रतीक हैं : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत की समृद्ध और जीवंत संस्कृति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि उगादी, गुड़ी पड़वा, वैशाखी, विशु जैसे त्यौहार हमारे देश की समग्र संस्कृति और समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं।
पूर्व उपराष्ट्रपति एम हामिद अंसारी, पूर्व प्रधानमंत्री, डॉ. मनमोहन सिंह, दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल और विभिन्न क्षेत्रों के कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने ‘उगादी मिलनÓ कार्यक्रम में भाग लिया, जिसकी मेजबानी उपराष्ट्रपति और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती उषा नायडू ने उपराष्ट्रपति भवन में की।
इस अवसर पर गणमान्यर व्यपक्तियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘उगादि’ का त्यौहार जीवन के सुखों और दुखों का सामना सदैव समभाव से करने का संदेश देता है।
उगादी चटनी का संदर्भ देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उगादी पच्चड़ी को नीम के फूलों, गुड़, कच्चे आम, मिर्च, इमली और नमक से बनाया जाता है और यह जीवन के सही सार और यात्रा के संकेत देती है।
उन्होंने कहा कि यह मानव जीवन को निर्मित करने वाले अनुभवों की विविधता और भावनाओं की मिश्रित प्रतीकात्मकता का संकेत है, जिसे हम सभी दैनिक जीवन में अनुभव करते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में आनंद किस प्रकार लिए जाए और जीवन में प्रसन्नीता और दुख को समभाव से जीने के साथ-साथ संघर्ष के क्षणों में आगे कैसे बढ़ा जाए, यह त्यौदहार इसकी भी प्रेरणा देता है।
श्री नायडू ने कहा कि उगादि जैसे भारतीय त्यौहार लोगों को स्मारण दिलाते हैं कि वे सभी एक ऐसी सभ्यता के उत्तराधिकारी हैं, जिनके पास मानवता के कल्याण की सार्वभौमिक, समावेशी और एकीकृत दृष्टि थी। उन्होंने कहा कि यह भाव हमारे देश को कालातीत और प्रासंगिक दृष्टि से युक्त बनाता है। इस अवसर पर डॉ. मदुगुला नागफनी शर्मा द्वारा पंचांगम (तेलुगु नववर्ष पंचांग) का पुनर्कथन, राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉलेज एंड टेक्नोलॉजी, नुज़विद, आंध्र प्रदेश के छात्रों द्वारा उत्कृष्ट योग प्रदर्शन और राजा रेड्डी एवं राधा रेड्डी के समूह द्वारा एक शानदार नृत्य प्रस्तुपति भी की गई।

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