लोकसभा चुनाव में सार्थक विकल्प की कमी के कारण NOTA का बटन दबाएं : योगेंद्र यादव

नई दिल्ली । स्वराज इंडिया ने दिल्ली की वोटरों से आमजन के मुद्दों पर बात न कर रहे दिल्ली की तीनों पार्टियों को नकारने की अपील की है। स्वराज इंडिया द्वारा चलायी जा रही राष्ट्रव्यापी मुहिम “देश मेरा, वोट मेरा, मुद्दा मेरा” के तहत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में दिल्ली की जनता के पास चुनने लायक कुछ नही है। इसलिए स्वराज इंडिया के कार्यकर्ता दिल्ली लोकसभा चुनावों में बेहतर विकल्प के अभाव में नोटा का बटन दबाने के लिए प्रेरित करें।
योगेंद्र यादव ने कहा, “दिल्ली एक प्रदेश है, यहाँ तीन सरकार है और तीनों बेकार हैं। तीन सरकार इसलिए कि केंद्र और राज्य सरकार के अलावा दिल्ली नगर निगम भी अपनी सरकार चलाती है।
सेना की ओट में वोट मांगे जा रहे है और जनता के असली मुद्दे गायब होते जा रहे है। किसानों की आय दुगनी करने के वायदे साथ आई केंद्र की सरकार का आज हाल यह है कि किसानों की आमदनी अपेक्षाकृत कम हो गई। नोटेबन्दी , बेरोजगारी पर मोदी जी बात नही करना चाहते बेरोजगारी की बात करें तो ये फर्जी राष्ट्रवाद की बात करते हैं।
वही दूसरी ओर कांग्रेस का नाम आते ही सबसे पहले भ्रष्टाचार की याद आती है। दिल्ली में कांग्रेस हमेशा झूठे वायदे किये, अवैध झुग्गिओ को रेगुलराइज करने का वादा किया था जिसकी सच्चाई सबके सामने है।
वही तीसरी पार्टी आम आदमी पार्टी है जिन्होंने बड़े-बड़े होडिंग लगाते हैं कि “हम काम करते गए वो अड़ंगा लगाते गए” लेकिन सच यह है कि उन्होंने सिर्फ बहाने बनाये।
सवाल यह है कि अगर भाजपा वाले आम आदमी पार्टी सरकार को काम करने में अड़ंगा लगती है तो इन्होंने शराब के ठेके डेढ गुणा कैसे खोल दिये। दिल्ली का हाल यह है कि शराब की खफत दुगनी हो गई है। वही दूसरी ओर आम आदमी पार्टी की सरकार डीटीसी बसों की संख्या बढ़ाने की बात की थी लेकिन इसके उलट यह बढ़ाने के बजाय 700 डीटीसी बसें कम कर दी।
*सभा को संबोधित करते श्री यादव ने कहा आर्मी और राजनीतिक को कभी एक साथ नही जोड़ना चाहिए।
यह गलती पाकिस्तान कर चुका है नतीजा सब के सामने है।
पाकिस्तान में ऐसा हुआ कि राजनीति को साइड करके आर्मी देश चलाने लगा।*
मोदी जी ऐसा गलती मत कीजिए इसका अंजाम हमारे बच्चों को भुगतना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा काम करने वाले प्रधानमंत्री देखे हैं तो निकम्मे भी देखे हैं!
ईमानदार प्रधानमंत्री देखे हैं तो भ्रष्ट भी देखे हैं, पर इतना झूठा प्रधानमंत्री कभी नही देखा।
इसलिए अब वक्त है तीनों सरकारों से हिसाब माँगने का और अगर हिसाब नही मिलता है तो जनता के पास NOTA का बटन दवाने का ही विकल्प बचता है।

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