महापौर अवतार सिंह ने उप-राज्यपाल से मुलाकात की

नई दिल्ली। उत्तरी दिल्ली के महापौर अवतार सिंह ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की और उन्हें उत्तरी दिल्ली नगर निगम की वित्तीय स्थिति से अवगत कराया। यह निर्वाचित होने के बाद महापौर की उपराज्यपाल मोहदय से पहली मुलाकात थी । उनके साथ इस अवसर पर उपमहापौर योगेश वर्मा भी थे।
अवतार सिंह ने कहा कि उत्तरी दिल्ली के महापौर के रूप में पदभार संभालने के बाद सबसे पहले उन्होंने निगम की वित्तीय स्थिति का जायजा लिया, उन्होंने देखा की वित्तीय स्थिति में बहुत बदलाव नहीं हुआ है। अपर्याप्त धन के कारण वेतन के साथ-साथ विकास कार्यों में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि निगम ने जिन योजनाओं को शुरू करना था, उनमें से कई योजनाओं को वित्तीय संकट के कारण शुरू नहीं किया जा सका है। अवतार सिंह ने कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने वित्तीय संकट को खत्म करने के लिए राजस्व अर्जित करने की कई योजनाएं शुरू की है, जिस में से कुछ अंतिम चरण में हैं और जल्द ही पूरा करने की संभावना है।
अवतार सिंह ने कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम, दिल्ली की कुल 180 लाख आबादी में से लगभग 75 लाख लोगों को अर्थात की कुल आबादी के लगभग 43 प्रतिशत लोगों को नागरिक सेवाएँ प्रदान कर रही है।
अवतार सिंह ने कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम संसाधनों के विषम वितरण के कारण अपने स्थापना के बाद से एक असंतुलित स्थिति में थी क्योंकि अधिकतम राजस्व वाले क्षेत्र दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के पास चले गए और अधिकतम व्यय वाले क्षेत्र जैसे की छह प्रमुख अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेदिक अस्पताल, 100 औषद्यालय और लगभग 700 स्कूलों में पढऩे वाले लगभग 3 लाख छात्रों को अल्पाहार जैसे व्यय उत्तरी दिल्ली नगर निगम के हिस्से में आए।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा अप्रैल 2016 से लागू किया गए पांचवें दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशों से भी उत्तरी दिल्ली नगर निगम को ज्यादा फायदा नहीं हुआ क्योंकि इसकी कई सिफारिशें जो निगम के वित्तय संकट से उभार सकती थी उन्हे लागू ही नहीं किया गया। जो कि इस प्रकार है :-
-वित्त आयोग द्वारा अस्पतालों के लिए करीब 300,00 करोड़ रुपये विशेष अनुदान प्रस्तावित किया गया था, स्वीकार नहीं किया गया ।
-वित्त आयोग द्वारा जल निकासी के रख-रखाव के लिए लागत रु 80. 100 करोड़ लागत प्रतिपूर्ति की सिफारिश की गई थी। स्वीकार नहीं किया गया ।
-पुनर्विकास कालोनियों पर व्यय की प्रतिपूर्ति के प्रावधान को बंद कर दिया गया। रुपये 44.06 करोड़ रुपये जो कि स्थानीय निकायों द्वारा ऐसी कॉलोनियों तक विस्तारित नागरिक सेवाओं के लिए प्रतिपूर्ति का एक प्रकार हुआ करता था।
-वित्त आयोग द्वारा विभाजन के बाद से सभी 3 निगमों की बकाया देनदारी को सहायता पैकेज के रूप में परिवर्तित करने की थी जिसे दिल्ली सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किया गया. उत्तरी निगम को 729.61 करोड़ रुपये की राहत मिल सकती थी ।
-वित्त आयोग ने पाया कि ऋण में से कर की कटौती के माध्यम से ऋण चुकाने की प्रक्रिया अनुचित है : जिसे स्वीकार नहीं किया गया। निगम पर कुल बकाया ऋण 2037.54 करोड़ है।
-वित्त आयोग ने कहा कि अनुशंसित ऋण को केवल उत्पादक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए और यदि प्राप्तकर्ता इकाई 30-45 दिनों के भीतर ऋण वापस करने की स्थिति में नहीं है, तो इसके बदले अनुदान दिया जाना चाहिए : दिल्ली सरकार द्वारा यह भी स्वीकृत नहीं किया गया।
– वित्त आयोग ने स्थानीय निकायों के लिए कर सुधारों और नए कर प्रस्तावों के लिए प्रोत्साहन की सिफारिश की थी : जिसे भी स्वीकार नहीं किया गया।
-वित्त आयोग ने सिफारिश की कि दिल्ली सरकार को स्थानांतरण शुल्क पर संग्रह शुल्क की लागत को 3.5 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत करना चाहिए -इसे भी स्वीकृत नहीं किया गया -उत्तरी दिल्ली नगर निगम को इस से लगभग 10.00 करोड़ की बचत होती।

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