दधिचि देहदान समिति ने देहदानियों का 35वां उत्सव मनाया

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मेडिकल कॉलेज के सभागार में दधिचि देहदान समिति द्वारा देहदानियों का 35वां उत्सव मनाया गया। विदित हो दधिचि देहदान समिति विगत 21 वर्षों से समाज में देहदान और अंगदान के लिए लोगों को प्रेरित करने का कार्य कर रही है। समिति द्वारा प्रेरणा लेकर अब तक 10,000 से अधिक लोगों ने देहदान एवं अंगदान का संकल्प लिया है। समिति द्वारा आज तक 885 नेत्रदान एवं 232 देहदान करवाये जा चुके हैं। इसके साथ ही 8 स्किन दान एवं दो अस्थिदान भी करवायें जा चुके हैं।
डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर सभागार में समिति द्वारा 48 अंगदानी, देहदानी परिवार के सदस्यों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में डॉ. जे.एम. कौल ने अपने वक्तव्य की शुरूआत देहदानियों के परिवार के प्रति देहदान करने के लिए कृतज्ञता व्यक्त करके की। डॉ. कौल ने देहदान की आवश्यकता और प्राचीन काल से लेकर आज तक देहदान को लेकर प्रचलित मान्यताओं पर बात की और कहा कि धर्म और विज्ञान के सामंजस्य बिठाना चाहिए। उन्होंने बताया कि हमारी धार्मिक मान्यताएं देहदान को प्रोत्साहित करती हैं। साथ ही ये भी कहा जिस बॉडी को आपने दान किया है, उसका ध्यान रखिए।
रिठाला विधायक महेन्द्र गोयल ने दधिचि देहदान समिति के सभी कार्यकर्ताओं को इस कार्य के लिए बधाई दी और देहदानी परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि कुछ लोग पद्चिन्हों पर चलते हैं, कुछ पद्चिन्ह बनाते हैं और देहदानी परिवार ऐसे ही लोग हैं जिनके बनायें पद्चिन्हों पर चलकर समाज का कल्याण संभव होता है।
स्वास्थ्य एवं उद्योग मंत्री दिल्ली सरकार सत्येंन्द्र जैन ने कहा कि हम जिस समाज रहते है वहां मरने के बाद मृतक का अधिकार उसके शरीर पर नहीं रहता। उसके परिवार के लोग तय करते हैं कि उसके शरीर का क्या होगा? लेकिन समाज के भले के लिए आवश्यक है मृतक की इच्छा का सम्मान हो और यदि उसने तय किया है कि उसके अंग या शरीर का दान किया जाये तो बिना परिवार की इच्छा के भी उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनके शरीर दान किया जाये।
परम पूज्य महामंडलेश्वर 1008 आचार्य स्वामी अनुभूतानंद जी ने देहदानी परिवारों का आभार व्यक्त किया और आशीर्वाद देते हुए कहा कि आप 100 वर्ष जियें लेकिन उसके बाद आपके शरीर का क्या हो ये तय किया जाना चाहिए। उन्होंने दधिचि देहदान समिति के संस्थापक आलोक कुमार को इस समिति के निर्माण के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि यदि मनुष्य मानवता के लिए कार्य नहीं करता तो वह पशु समान होता है। इस अवसर पर उन्होंने आदि देहदानी महर्षि दधिचि को भी याद किया। प्राचीन ग्रंथो का उल्लेख करते हुए उन्होंने देहदान को करने में धर्म कहीं से रुकावट नहीं बनता। यदि आपका शरीर मरने के बाद किसी के काम आता है तो आपका जीवन पूर्ण हैं। आप मृत्यु के बाद भी जीवित रहतें हैं। शरीर मरता है, चेतना जीवित रहती है। एक 13 वर्षीय अंगदानी सुरभि की मां सीमा बिंदल ने अपने अनुभव को सांझा किया। उनके अनुभव ने वहां उपस्थित सभी लोगों को भावविल्ह कर दिया। सुरभि के अंगों से 8 लोगों को जीवन मिला।वो मरकर भी जीवित है। दधीचि देहदान समिति की ओर से सुरभि के परिवार का सम्मान किया गया। एक हृदय प्राप्तकर्ता संदीप मल्होत्रा ने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया। संदीप की पत्नी हिमानी ने उस परिवार को धन्यवाद दिया जिसने अपने प्रियजन का हृदय दान किया। उन्होंने कहा कि उस परिवार के प्रति मेरा परिवार सदैव कृतज्ञ रहेगा। समाज को अंगदान और देहदान के लिए आगे आना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एम.पी.गुप्ता ने देहदान के बारे में लोगों को प्रेरित किया। आपने अपनी धर्म पत्नी के अंगदान करके समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया था।
समिति के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने उत्तरी दिल्ली समिति के कार्यकर्ताओं को धन्यवाद किया कि उनके प्रयासों से 600 से अधिक लोगों ने देहदान का संकल्प लिया है। उन्होंने समाज में देहदान की बढ़ती स्वीकार्यता में दधीचि देहदान समिति के कार्यों की सराहना की।
इस अवसर पर सुश्री मंजू प्रभा द्वारा संपादित एक स्मारिका ‘मानवता के लिए देहदान-अंगदान-नेत्रदानÓ का विमोचन भी किया गया।
इस कार्यक्रम में डॉ. पुनीता महाजन, राजेश चेतन, प्रमोद गुप्ता, नीरज रायजादा, डॉ. विजय आनंद गुप्ता ‘विद्यार्थीÓ, महेश पंत, सुधीर गुप्ता, विशाल चड्ढा, कमल खुराना महामंत्री दधिचि देहदान समिति मौजूद रहे। विनोद अग्रवाल, ज्ञान प्रकाश तायल, महेन्द्र चौधरी, मनीष गोयल, मुकेश दुआ, कृष्णकांत अग्रवाल ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया।

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