प्रदूषण की बढ़ौत्तरी में यातायात तथा उद्योग धंधों का योगदान है: शर्मिष्ठा मुखर्जी

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने दिल्ली में असहनीय होते जा रहे प्रदूषण के स्तर की बढ़ौत्तरी के लिए केन्द्र की भाजपा सरकार और आप पार्टी की दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि दोनों ही सरकारें पिछले कुछ वर्षों से लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने में नाकामयाब रही हैं और न ही दोनो सरकारों ने इससे कोई सबक सीखा है। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण इस कदर बढ़ गया है कि वह प्रतिदिन 25 लोगों की जान ले लेता है क्योंकि इन मौतों में सांस व फेंफड़ों की बीमारी के लोग आते है। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने दोनो सरकारों से मांग की कि वे तुरंत प्रभाव से सर्दियों में बढ़ने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए एक आपातकालीन योजना लेकर आए ताकि दिल्ली वालों को आने वाले दिनों में प्रदूषण से राहत मिल सके।
प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा यातायात तथा उद्योग धंधों का योगदान है। उन्होंने कहा कि भलस्वा लैंडफिल साईट पर लगी आग के कारण भी वहां पर आसपास के क्षेत्रों में लोगों का जीना दुश्वार हो गया है जबकि भाजपा व आप दोनो सरकारें दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की जिम्मेदारी लेने की बजाए एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करते नजर आते है। संवाददाता सम्मेलन में शर्मिष्ठा मुखर्जी के साथ वरिष्ठ नेता चतर सिंह व एडवोकेट सुनील कुमार, चैयरमेन विधि एवं मानव अधिकार विभाग, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस भी मौजूद थे।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने इस झूठ का पर्दाफाश करते हुए कहा कि दिल्ली के पड़ोसी राज्यों हरियाणा तथा पंजाब में पराली जलाने के कारण दिल्ली में ज्यादा बढ़ रहा है। उन्होंने आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि पराली जलाने के कारण कुल प्रदूषण में केवल 11 प्रतिशत प्रदूषण का योगदान दिल्ली में होता है जो केवल 15-20 दिनों की अवधि के लिए ही होता है। उसमें भी भाजपा शासित हरियाणा का योगदान सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने की जगहों में हरियाणा में केवल 3.37 प्रतिशत की कमी आई है जबकि कांग्रेस शासित पंजाब में 45.82 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने बताया कि पंजाब में जहां 2016 में 80814जगहों पर पराली जलाई जाती थी, जबकि 2017 में केवल पराली जलाने की 43814 जगहें पाई गई। दूसरी ओर हरियाणा में जहां 2016 में 12769 जगह पराली जलाने की घटनाऐं थी वे 2017 में 12338 पाए गए अर्थात केवल 3.37 प्रतिशत की ही कमी आई।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि सर्दियों में पीएम 2.5 प्रदूषण का मुख्य स्रोत 28 प्रतिशत यातायात, जबकि उद्योग धंधे 30 प्रतिशत प्रदूषण बढ़ाने में योगदान करते है। 14 प्रतिशत घरों तथा कृषि क्षेत्र व कूड़ा जलाने के कारण बढ़ता है इसी प्रकार 17 प्रतिशत मिट्टी, रोड़ तथा निर्माण कार्यों के कारण होता है। दूसरे स्रोत केवल11 प्रतिशत प्रदूषण बढ़ाने के कारक है। इसी प्रकार सर्दियों में पीएम 10 के प्रदूषण स्तर को बढ़ाने में यातायात 24 प्रतिशत, उघोग धंधे 27 प्रतिशत, बायोमास बर्निंग से प्रदूषण 13 प्रतिशत, धूल से प्रदूषण 13 प्रतिशत ही बढ़ता है।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि उपरोक्त आंकड़े ये प्रदर्शित करते है कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा यातायात और उद्योग धंधे जिम्मेदार है। जबकि केजरीवाल दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नही है और दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए केवल पराली को जलाने को ही जिम्मेदार मानते है।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि दिल्ली में घटती व बदहाल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के कारण लोगों को यातायात के लिए अन्य साधन इस्तेमाल करने पड़ रहे है क्योंकि जहां कांग्रेस के समय में डीटीसी की 5223 बसें थी वे कम होकर केवल 3921 रह गई है। इसी प्रकार मेट्रों के बढ़े किराए के कारण भी लोगों को यातायात के अन्य साधन इस्तेमाल करने के लिए मजबूर कर दिया जो दिल्ली का प्रदूषण बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में मेट्रो फेस 3सितम्बर 2016 तक पूरा हो जाना चाहिए था जो दो साल लेट चल रहा है और फेस 4 के कार्य का तो कहीं अता पता नही है।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि दिल्ली मेरठ हाई स्पीड रेल कॉरिडोर भी आप पार्टी की दिल्ली सरकार के लचर रवैये कारण अधर में लटका हुआ है क्योंकि दिल्ली सरकार इस प्रोजेक्ट में अपना योगदान देने को लेकर टाल मटोल कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली मेरठ हाई स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट सफल हो जाता तो यहां का 90 प्रतिशत पब्लिक यातायात कम होने के कारण प्रदूषण भी कम होता।

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