वार्षिक कार्निवल ‘प्रकृति 2018’ का आयोजन

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। दस्तकर वर्ष का सबसे बड़ा वार्षिक कार्निवल “प्रकृति 2018” के साथ वापस आ गया है। इस साल की थीम लोटस है ।लोटस के विषय से प्रेरित आपके सबसे पसंदीदा शिल्प और उत्पादों का एक विविध संग्रह और जो प्रकृति की भावना को जोड़ता है – चाहे वह जूट, केला फाइबर, लकड़ी की नक्काशी या लाह और ढोकरा की सजावट हों। रेडियंट बनारसी ब्रॉयड्स उत्तर प्रदेश, टस्सर बुनाई बिहार, कोटपाड़ बुनाई ओर्रिसा से, गरम चमकदार ऊनि कपडे का बना हुआ हिमाचल प्रदेश, गुजरात और कश्मीर की बनी हुई ब्लॉक प्रिंटेड एम्ब्रॉइडेड नैचुरली शुशोभित चमकीले ऍप्लिके कपड़ो का बना हुआ शाल । अंद्रेटा खुर्जा की ब्लू पॉटरी, लकड़ी के लैकर फर्नीचर ये साडी हेंडीक्राफ्ट सामान आप दस्तकार में पा सकते है । खूबसूरत और स्टाइलिश बनी हुई धुर्रिएस सिल्वर और बीडेड के और भी मनमोहक गहने और जूते भी आपको दस्तकार में मिलेंगे।
इस वर्ष हमारा विषय लोटस है । लोटस सिर्फ राष्ट्रीय फूल नहीं बल्कि यह शुद्धता और सचाई का भी प्रतीक है कई कहावतों में बोला जाता है की कमल हमेशा कीचड में ही खिलता है और अपनी खुशबू फैलता है । कमल से हम बहुत सारी टेक्सटाइल वाली डिज़ाइन जैसे ऍप्लिके, वीविंग, एम्ब्रायडरी, ब्लॉक प्रिंटिंग और मध्यम ऑफ़ बंदनी टाई डाई। यह आपको पुरे भारत वर्ष में देखने को मिलेगा जैसे कार्वेड, पेंटेड एंड एम्बॉस्ड इन मेटल, वुड एंड सेरेमिक,गिलास पेंटिंगों में।
उपरोक्त के अलावा, 16 वीं -25 नवंबर से, कपड़ा डिजाइनरों और मास्टर बुनकरों जैसे बोधी के माला सिन्हा, वीवर स्टूडियो, मलावीका चटर्जी, दयाल कुदेचा, ताण बाण, तासार के कौशिक गांगुली, तुनी हस्तशिल्प जैसे मास्टर बुनकर, वृक्ष, विमोर, घनश्याम सरोड, सूत्र हस्तशिल्प, चमन प्रेमजी वांकर, आशा सवला, मुरली साड़ी एम्पोरियम, रेमा कुमार, वाया बुनाई विरासत, संजक्ता रॉय, अली मोहम्मद। खत्री, कस्तूरि साड़ी, जातीयता, अंकिता नास्कर, भारतीय अगस्त, वनी वृत्ति, रेखा कपूर, चित्रण, अंबिका देवी, सेवा बनसकंठा, सौंदर्य कंथ और मृणालिनी।
इसके अलावा, पूरे भारत से विभिन्न क्षेत्रों और स्वादिष्ट व्यंजनों से सांस्कृतिक प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

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