किसान मुक्ति मार्च में शामिल होने का न्योता लेकर दिल्ली देहात पहुंचे योगेंद्र यादव

online casino best canada नगर संवाददाता
नई दिल्ली ।दिल्ली आगामी 29-30 नवंबर को होने वाली किसान मुक्ति मार्च का न्योता लेकर योगेंद्र यादव दिल्ली देहात पहुंचे। इस मार्च में देश के सभी हिस्सों से भारी संख्या में किसान दिल्ली आ रहे हैं। जिसमें संसद का घेराव होगा और खेती के संकट पर विशेष सत्र की मांग की जाएगी। योगेंद्र यादव ने दिल्ली देहात के किसानों से इसमें शामिल होने का आह्वान किया है। सरकार की किसान विरोधी नीतियों से दिल्ली देहात के किसान भी उपेक्षित रहे हैं। लैंडपूलिंग पॉलिसी लाभकारी योजना है, लेकिन नए नोटिफाइड पॉलिसी के तहत जो नियम सरकार ने बनाये हैं वो किसानों के हक में नही है। पॉलिसी का लाभ लेने के लिए पांच एकड़ की बाध्यता तथा दो करोड़ प्रति एकड़ का विकास शुल्क, ये दोनों शर्त किसानों के लिए पूरा कर पाना संभव नहीं है क्योंकि 99% किसान के पास 5 एकड़ से कम ज़मीन है। अब किसानों के पास अपनी जमीन प्राइवेट बिल्डरों को बेचने के आलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा, जो कि किसानों के साथ धोखा है।
स्वराज इंडिया दिल्ली देहात मोर्चा के अध्यक्ष राजीव यादव का कहना है कि स्मार्ट सिटी के साथ स्मार्ट गांव भी बनाने की जरूरत है, इसके लिए प्रत्येक ग्रामवासी की खुद की जमीन में से कुछ हिस्सा उसके पास ही रहने दिया जाए, जो उन्हें स्मार्ट गांव में सामूहिक प्लॉटिंग के आधार पर दिया जा सकता है। इससे दिल्ली देहात की परम्परागत रहन-सहन व संस्कृति की रक्षा भी हो सकेगी व किसान के पास भी मालिकाना हक होगा।
मूलनिवासी जो 74/4 की जमीन से वंचित रह गए थे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर E.W.S. फ्लेट दिया जाए। ताकि दिल्ली देहात क्षेत्र में स्मार्ट सिटी के साथ स्मार्ट विलेज भी बनाया जा सके। गांव वालों की जायज मांगों और उनके अस्तित्व को बचाने के लिए स्वराज इंडिया के कार्यकर्ता गांव गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे। अगर सरकार ने इस पॉलिसी में आवश्यक सुधार नहीं किया तो न्यायालय के माध्यम से भी राहत दिलाने का प्रयास किया जायेगा।
सभा को संबोधित करते हुए स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि आज दिल्ली के विकास में दिल्ली देहात के किसान उपेक्षित क्यों है? उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा, “पिछले पांच साल में मोदी सरकार ने देश व दिल्ली के किसानों के लिए क्या किया है? कांग्रेस की सरकार 2013 में 120 साल पुरानी अंग्रेजों के ज़माने की जब क़ानून बदल कर नया भूमिअधिग्रहण बिल ला रही थी तो तत्कालीन विपक्ष के नेता व मौजूदा भाजपा सरकार में मंत्री सुषमा स्वराज राजनाथ सिंह पानी पी-पी कर उस क़ानून का विरोध कर रहे थे किंतु जब मोदी की सरकार आयी तो उससे भी बेकार कानून के लिए तीन-तीन बार अध्यादेश ले लायी। इस अध्यादेश में बड़े-बड़े बिल्डरों, भू-माफियाओं के हित व किसानों के अहित की बात है।

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