महाकवि सुब्रमण्यम भरतियार ने तमिल साहित्य में पुनरुत्थान की अलख जगाई : वेंकैया नायडू

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का कहना है कि महाकवि सुब्रमण्यम भरतियार ने तमिल साहित्य में पुनरूत्थान की अलख जगाई और भारतीय संस्कृति के प्राचीन स्रोतों से प्रेरणा ग्रहण की। श्री नायडू नई दिल्ली में महान तमिल कवि श्री सुब्रमण्यम भरतियार की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर वित्त और शिपिंग राज्य मंत्री पी राधाकृष्णन और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भरतियार ने अपने पीछे काव्य और गद्य रचनाओं की अनूठी विरासत छोड़ी है और उनके कार्यों ने वर्तमान तमिल साहित्य को आकार और जीवंतता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के समान भरतियार भी अल्पायु रहे और उनका जीवनकाल मात्र 39 वर्ष का रहा, लेकिन उन्होंने अपने शब्दों और कार्यों द्वारा शाश्वत नाम और ख्याति प्राप्त की। उन्होंने कहा कि भरतियार एक समर्पित भारतीय राष्ट्रवादी और सामाजिक सुधारों के मुखर समर्थक भी थे।
श्री नायडू ने कहा कि श्री भरतियार ने अपनी एक कविता में लिखा था कि कोई जाति प्रथा नहीं है और जाति के आधार पर लोगों को बांटना पाप है। उन्होंने कहा कि श्री भरतियार ने मनुष्यों की समानता की वकालत की और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक तमिल काव्य के अग्रदूत महाकवि भरतियार ने सहृदयता दर्शाते हुए तेलुगू को ‘सुन्देरा तेलुगूÓ के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि सच्चे राष्ट्रवादी और देशभक्त भरतियार ने राष्ट्रवाद और वैचारिक स्वतंत्रता के प्रति प्रबल उत्साह का आह्वान किया।
श्री नायडू ने कहा कि उन्होंने जनमानस से शाश्वत आशावादिता रखने का अनुरोध करते हुए कहा कि अच्छा समय आने वाला है। उन्होंने कहा कि महाकवि भरतियार ने समस्त लोगों से बहादुरी के साथ, पथ में आने वाली विपरीत स्थितियों की परवाह न करते हुए निरंतर आगे बढऩे का अनुरोध किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि हम लोग वास्तव में भाग्यशाली हैं कि ऐसी महान विभूति ने हमारी मातृभूमि में जन्म लिया। उन्होंने कहा कि हम उन्हें सदैव याद रखेंगे और उनका लेखन आने वाली पीढिय़ों का स्वाधीनता की राह पर मार्गदर्शन करता रहेगा तथा उनका काव्य देशभक्ति, मानवीयता और प्रेम के लिए प्रेरित करता रहेगा।(पीआईबी)

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