सॉफ्ट पावर का इस्तेमाल आतंकवाद से मुकाबला करने हेतु करना चाहिए : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली। उपराष्ट्रप्रति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत को अपने नैतिक और सांस्कृतिक शक्ति का इस्तेमाल सही मायने में एक शान्तिपूर्ण, ईमानदार और न्यायसंगत दुनिया की स्थापना के लिए जनमत को प्रभावित करने में करना चाहिए।
सॉफ्ट पावर पर आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सॉफ्ट पावर किसी देश की वह क्षमता है जिससे वह अपनी प्राथमिकताओं को आकार देता है और बल प्रयोग से हटकर अपनी अपील एवं आकर्षण के जरिए अपने प्रति दूसरे देशों के व्यवहार को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि इसमें संस्कृति, मूल्य, अंतर्निहित ज्ञान, आध्यात्मिकता, ज्ञान और विदेश नीति का इस्तेमाल करते हुए दृढ़ संकल्प, एजेंडा फ्रेमिंग और सकारात्मक आकर्षण के जरिए दूसरों को प्रभावित करने की योग्यता भी शामिल है।
श्री नायडू ने मौजूदा समय में मानवता के खिलाफ जारी आतंकवाद का मुकाबला करने में भारत के सॉफ्ट पावर का इस्तेमाल करने का आह्वान करते हुए कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देशों को अलग-थलग करने के लिए वैश्विक जनमत तैयार किया जाना चाहिए।
श्री नायडू ने कहा कि भारत किसी पर हमले करने का कभी भी हिमायती नहीं रहा और यह एक न्यायसंगत दुनिया में अन्य देशों के साथ शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ रहने में विश्वास करता है। भारत हमेशा ही पूरी मानवता के कल्याण और बेहतरी के लिए सॉफ्ट पावर के इस्तेमाल में यकीन रखता है। उन्होंने कहा कि सहभागिता और देखभाल भारतीय दर्शन का मूल है। श्री नायडू ने कहा कि सॉफ्ट पावर में किसी देश के वे सभी तत्व शामिल हैं जो दूसरे लोगों, समुदायों या देशों को आकर्षित करते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने भारतीय भोजन, योग, फिल्म, खेल, संगीत और नृत्य का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल के बाद दुनिया के कई देशों में योग का अभ्यास किया जाने लगा है। उन्होंने कहा कि डोसा और बटर चिकन की लोकप्रियता भारत के सॉफ्ट पावर का एक उदाहरण है। उन्होंने सॉफ्ट पावर की श्रेणी में अमिताभ बच्चन, रजनीकांत, प्रियंका चोपड़ा जैसी फिल्मी शख्सियतों के साथ ही खेल से जुड़े सचिन तेंदुलकर, एम.एस. धोनी, विराट कोहली और विश्वनाथन आनंद का भी नाम लिया।
सॉफ्ट पावर पर तीन दिवसीय सम्मेलन के मौके पर सांसद और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष डॉ. विनय प्रभाकर सहस्रबुद्धे, ईसा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु और अन्य बड़ी हस्तियां मौजूद थीं। (पीआईबी)

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