कैट ने ई कॉमर्स के लिए रेगुलेटरी अथॉरिटी और ई कॉमर्स पालिसी घोषित करने की मांग की

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा ई कॉमर्स कंपनियों द्वारा गलत तरीके से किये जा रहे व्यापार पर नकेल कसने के लिए एफडीआई पालिसी में जोसंशोधन किये गए है उनके कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने स्वागत करते हुए कहा है की सरकार के इस कदम से अब ईकॉमर्स व्यापार में बराबरी की प्रतिस्पर्धा हो सकेगी एवं ई कॉमर्स निष्पक्ष व्यापार के रूप में उभर सकता है और देश भर के व्यापारी अब ईकॉमर्स के माध्यम से सरलता के साथ व्यापार कर पाएंगे !
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने आज यहाँ एक संवाददाता सम्मेलन में कहा की एफडीआई पालिसी में कल हुए संशोधन ईकॉमर्स व्यापार में जो छिद्र थे उनको बंद करेगा किन्तु यह बहुत जरूरी है की इस नीति का कड़ाई से पालन किया जाए तभी इसका लाभदेश के व्यापारियों को मिल सकेगा और ई कॉमर्स सही मायनों में देश में प्रगति करेगा ! इसके लिए उन्होंने सरकार से जोरदार मांग करतेहुए ई कॉमर्स के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित करने की मांग की जो देश में ई कॉमर्स व्यापार के देख रेख करे वहीँ दूसरी ओर पिछलेकाफी समय से लंबित एक समग्र ई कॉमर्स पालिसी की भी तुरंत घोषणा हो ! रेगुलेटरी अथॉरिटी को अधिकार संपन्न बनाना आवश्यक है !
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भारतीय एवं श्री खंडेलवाल ने कहा की गत एक वर्ष से अधिक समय से कैट लगातार इस मुद्दे परसरकार का ध्यान आकृष्ट कर रहा था और अब आखिरकार सरकार ने आवश्यक कदम उठा ही लिए हैं ! उन्होंने सरकार से मांग की कीइस पालिसी को 1 अप्रैल 2018 से प्रभावी किया जाए जिससे ई कॉमर्स बाज़ार में एकरूपता बनी रहे ! दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा कीगत वर्षों में ई कॉमर्स कंपनियों ने जमकर लागत से भी काम मूल्य पर माल बेचा, बड़े डिस्काउंट दिए, पोर्टल पर पंजीकृत व्यापारियों केसाथ भेदभाव रखा गया और अनेक उत्पाद केवल ई कॉमर्स पोर्टल पर ही बेचे गए ! इन क़दमों से साफ़ जाहिर है की ये ई कॉमर्स कंपनियांदेश के रिटेल बाज़ार में ई कॉमर्स के माध्यम से अपना कब्ज़ा ज़माना चाहती हैं जो सीधे रूप से देश के ऑनलाइन और ऑफ लाइनव्यापारियों के हितों के खिलाफ हैं !
श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने यह भी कहा की सरकार द्वारा संशोधित पालिसी के अनुसार अब किसी के साथ भी भेदभाव नहीं होसकता और इस दुष्चक्र को ध्वस्त किया जाना जरूरी है ! इस पालिसी को लेकर जो भ्रम था और जिसको लेकर ई कॉमर्स कंपनियों नेभारत के रिटेल बाज़ार को एक खुला मैदान समझ लिया था और अपने ही नियम तय करके व्यापार कर रही थी उस प्रवृति पर अब रोकलगेगी और देश में स्वस्थ ई कॉमर्स व्यापार का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा ! ई कॉमर्स में मार्केटप्लेस मॉडल पूरी तरह पारदर्शी हो, निष्पक्ष होऔर सबको बराबरी का मौका दे, देश में स्वस्थ ई कॉमर्स व्यापार के लिए ये बहुत जरूरी है क्योंकि इसका सीधा प्रभाव देश कीअर्थव्यवस्था पर पड़ता है ! उम्मीद है की अब यह सब संभव हो सकेगा !

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