आइपैक्स भवन में काव्य परम्परा की 98 वीं प्रस्तुति का आयोजन

नगर संवाददाता
नई दिल्ली। आइपैक्स भवन में प्रत्येक माह अनवरत आयोजित काव्य परम्परा की 98 वीं प्रस्तुति का आयोजन हुआ। मां सरस्वती के समक्ष अतिथि कवियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन प्रधान सुरेश बिन्दल ने महामंत्री प्रमोद अग्रवाल एवं चेयरमैन सुशील गोयल द्वारा सम्पन्न कराया गया और पुष्प गुच्छ से मंचासीन अतिथि कवियों का सम्मान संयोजक आशु गुप्ता व डॉ अंजलि गुप्ता द्वारा किया गया।
गोष्ठी सुप्रसिद्ध स्वच्छन्द गीतकार स्व इंदीवर जी को सादर समर्पित रही। सुरेश बिंदल ने उनके जीवन एवं साहित्य यात्रा से सदन को परिचय कराया। 1960 70 के दशक के फिल्मी गीतकार इंदीवर ने अनेक मधुर गीतों का सृजन किया। उनके लिखे फ़िल्म पारसमणि, सरस्वती चंद्र, उपकार, पूरब और पश्चिम फ़िल्म के गीत बेहद लोकप्रिय रहे।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ आगरा से पधारी श्रीमती नूतन अग्रवाल ज्योति ने सरस्वती वन्दना से की।
गोष्ठी में आगरा से पधारे युवा कवि कुमार ललित ने अपने अंदाज में अनेक छंद और मुक्तक प्रस्तुत किये तथा उपस्थित काव्य प्रेमियों का दिल जीता।
“लगभग लगभग एक है, हर घर की तस्वीर।
बाहर बाहर है हँसी, भीतर भीतर पीर।”
” दरवाजा खिड़की किचन, आंगन रोशनदान।
आपस में पूछा करें, कहां गया इंसान।”
उन्होंने श्रृंगार रस की अभिव्यक्ति इस तरह प्रस्तुत की।
“जब बढ़ी गर्मी बहुत तो बदलियां अच्छी लगीं।
चाहतों के ताल में कुछ मछलियां अच्छी लगीं।
नींद आंखों से थी ओझल, रात भर थी कंपकंपी।
आ गए तुम पास तो फिर सर्दियां अच्छी लगीं।”
काव्य परम्परा में पधारी श्रीमती नूतन अग्रवाल ज्योति ने अपनी मर्मस्पर्शी रचनाओं से श्रोताओं की वाहवाही लूटी।
“लाड़ झरोखन ते झाँकें घर द्वारे लेवें बलैयाँ
जब जब बाबुल के घर आवें घर की सोन चिरैया ”
बिटिया के द्वारा सदैव किये जाने वाले समझौतों पर कुछ यूं कटाक्ष किया-
“सावन की झूला पटली, बाबा मेरी खो गयी है।
कितना ही ढ़ंढा मैंनें, अब मुझको मिलती नहीं है।।
पर तुम न खर्चा करना, भूली मैं बच्चा बनना।
बनकर वो कहे सयानी, बाबा में ठीक हूँ।।
श्रीमती नूतन अग्रवाल ज्योति नेबेटियों की सुरक्षा हेतु यू पढ़ा-
आज भी खो जाती हैं ये बेटियाँ बहु बनते ही
मिट जाता है वजूद इनका
एक देहरी पार करते ही….
दूसरी देहरी पर पहुँचते -पहुँचते
सो जाती हैं या सुला दी जाती हैं तोड़ देती हैं दम ये
बीस या बाइस की होते ही
बहुही बनती हैं बेटियां
अगर देनी है उम्र पूरी बेटियों को,
और बचानी है बेटियाँ
तो बचाना होगा, बहुओं को
तय कराना होगा सफर धरती से चाँद तक का
बहुओं को
आगे बढ़ाना होगा, बहुओं को.
जिस से जी लें अपनी उम्र पूरी, ये बेटियाँ…..
राष्ट्रगान से सम्पन्न हुई गोष्टी में क्षेत्र के जाने माने शिक्षाविद वेद प्रकाश पंचाल, मदन खत्री, योगेंद्र बंसल, उमेश गोयनका, सतेंद्र अग्रवाल आदि अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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