महिलाओं के नाम “फ़्रीडम अवार्ड्स” सम्मान

नई दिल्ली | उत्तर-पश्चिम दिल्ली सांसद डॉ. उदित राज एवं बुद्धा एजुकेशन फाउंडेशन की ओर से लगभग 2000 महिला प्रतिनिधियों ने रॉयल पेपर बैंक्वेट हॉल, पीरागढ़ी, नई दिल्ली पर विशाल सम्मलेन में भाग लिया और अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया | फ्रीडम अवार्ड्स के अंतर्गत पूरे देश से लगभग 60 महिलाओं को उनके अपने क्षेत्र में किये गए अद्वितीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया |
दशकों बीत गए फिर भी जितना भागेदारी, सम्मान और आर्थिक निर्भरता महिला समाज में होना चाहिए वह सपना ही बनकर रह गया है, इस सम्मेलन में विशेष रूप से महिलाओं की स्वतंत्रता का विषय रहा है | लड़कियां,महिलायें पढने-लिखने के बावजूद विभिन्न क्षेत्र जैसे आर्थिक,राजनैतिक, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि में योगदान नही दे पा रही हैं क्योंकि स्वतंत्रता का अभाव है | इस अवसर पर उन महिलाओं को “फ्रीडम अवार्ड” से सम्मानित किया गया जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दिया है | भारतीय समाज की समस्याएं अमेरिका और यूरोप या अन्य देशों से भिन्न है, हमारे समाज में आर्थिक परतंत्रता से ज्यादा कहीं सड़े-गले रीति-रिवाजों से है | मानसिक रूप से जितना शोषण महिलाओं का हमारे समाज में होता है उतना आर्थिक नही,पढ़ी-लिखी एवं सक्षम महिलायें भी आज़ादी के अभाव में अपनी क्षमता का उपयोग कर नही पाती हैं | लगातार सीबीएससी के 10वीं और 12वीं कक्षा में लड़कियां लड़कों से ज्यादा अच्छा कर रही हैं और यह उदाहरण समझने को काफी है कि जहाँ पर पुरुषवादी सोंच अवरोध नही बनती है वहां पर ये किसी से कम नही हैं | पढाई-लिखाई और परीक्षा की तैयारी, स्कूल या घर में की जाती है जहाँ पर सुरक्षा की समस्या नही है, इसलिए लड़कों से बेहतर करती है लेकिन व्यवहारीक और बाहरी दुनिया में किसी समय आना-जाना पड़ता है, कार्यस्थल पर भी पुरुषवादी सोंच होती है और इसके अलावा, तमाम रीति-रिवाज़ के बंधन भी आ खड़े होते हैं इसलिए आज़ाद रूप से न काम करने के वजह से पिछड़ जाती हैं
बुद्धा एजुकेशन फाउंडेशन उत्तर-पश्चिम लोकसभा में लगभग 11, 000 महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण दे चुका है |इसके अतिरिक्त घर पर ही जॉब वर्क उपलब्ध कराया जाता है ताकि महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम हो सके | वर्तमान में10,000 लोगों का पूरा हेल्थ चेक अप का अभियान चलाया जा रहा है | खामपुर और झीमरपुर के उन घरों में जहाँ शौंचालय नही था वहां सुविधा देकर के स्वच्छ भारत के उद्देश्य को पूरा किया | उन स्कूलों में जहाँ प्रोजेक्टर, कंप्यूटर,पानी आदि पीने की सुविधा नही थी वहां पर मुहैया कराया |सिलाई-कढाई केंद्र भी चल रहे हैं |
बुद्धा एजुकेशन फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. उदित राज ने कहा कि “भारत जबतक विकसित देशों की श्रेणी में नही जबतक कि महिलाओं की भागेदारी बढती नही है | भारत में महिलाओं का कुल घरेलु सकल उत्पाद में 17 % योगदान है,जो बहुत कम है | जहाँ तक लेबर फ़ोर्स पार्टिसिपेशन रेट है वह भी बेहद निराशाजनक है, सन 2004 में 35% हुआ करता था जो घटकर 25% हो गया अतः हर क्षेत्र में चिंताजनक स्थिति दिखाई पड़ती है |
इस विशाल सम्मेलन की तैयारी में श्री गौरव ग्रोवर,श्रीमती रचना शर्मा, श्रीमती सुप्रीत राज का विशेष सहयोग रहा है | हम उनको भी धन्यवाद देते हैं जिन्होंने फ्रीडम अवार्ड्स पाने वालों का मनोबल बढ़ाने के लिए उपहार दिए जैसे केवीआई फैशन हाउस से श्रीमती जसमीत कौर, वेलवेट बैग्स से नकुल गांधी, अल्प से श्रीमती भारती तनेजा आदि |उन्होंने अपने क्षेत्र में अद्वितीय सहयोग दिए हैं |

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