माँ हंसवाहिनी साहित्यिक मंच द्वारा कवि सम्मेलन में “पुलवामा के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि”

नई दिल्ली।माँ हंसवाहिनी साहित्यिक मंच” द्वारा गाज़ियाबाद के वसुंधरा, सेक्टर 3 के एस. जी. होम्स के प्रांगण में बहुत ही शानदार एवं भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ । जो कि पुलवामा के शहीदों को समर्पित किया गया ।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वन्दना से अल्का शर्मा ने अपनी सुरीली आवाज में की , इसके बाद नम आंखों से शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए 2 मिनट का मौन व्रत रक्खा गया ।
वरिष्ठ गीतकार जनाब अशोक मधुप अध्य्क्ष की भूमिका में रहे एवं संचालन को निर्देश पाबला ने अपनी जोरदार आवाज़ में और लाजवाब अंदाज़ में बहुत ही उम्दा निभाया । आमन्त्रित कवियों में चेतन आनन्द, जगदीश मीणा ,इब्राहिम अल्वी, सर्जन शीतल, इन्द्रजीत सुकुमार, आज़म हुसैन , गुरचरन मेहता रजत, जोगिंदर सिंह, फ़ैज़ बदायूँनी, अलका शर्मा, ममता लडीवाल ,संजय कुमार गिरि ,असलम बेताब, कीर्ति श्रीवासत्व, शोभा सचान, नरेश शर्मा, लक्ष्मी बिमला नेगी, पीयूष कांति, ओम प्रकाश कल्याणे, आशीष प्रकाश, सभी ने बेहद उम्दा काव्य पाठ किया । संस्था की तरफ से शॉल ओढ़ा कर एवं गलमाला पहना कर सभी कवियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया । देश प्रेम का रंग सभी की रचनाओं में नज़र आया और होली के रंग में भी कुछ रचनाएँ रंगी हुई नजर आईं । अध्य्क्ष रहे अशोक मधुप जी ने अंत में बहुत ही शानदार काव्य पाठ किया , सोसायटी के बहुत से मित्रो नें गलमाला पहना कर उनका विशेष स्वागत एवं सम्मान किया ।
आयोजकों में संस्था के अध्यक्ष जगदीश मीणा, उपाध्यक्ष ममता लड़ीवाल, महासचिव मनोज कामदेव, कोषाध्यक्ष निर्देश पाबला, मीडिया प्रभारी संजय कुमार गिरि सभी अंत तक मौजूद रहे, संस्था की तरफ से आयोजक मंडल का भी विशेष सम्मान किया गया । सभी ने अपनी बहुत ही बेहतरीन रचनाओं से श्रोताओं को अंत तक सुनने के लिए रुकने के लिए मजूबर किया । एस जी होम्स के प्रांगण में 100 से अधिक श्रोता एकत्रित हुए, और कवि सम्मेलन का भरपूर आनन्द ले रहे थे । कार्यक्रम लगभग 4 घण्टे से अधिक समय तक चला, कार्यक्रम में श्रोताओं की उपस्थिति शुरू से अंत तक बराबर बनी रही ।
इसके साथ ही संस्था में उपस्थित विंग कमांडर योगेश दहिया जी को संस्था की तरफ से विशेष रूप से सम्मानित किया गया उन्होंने भी काव्य पाठ किया । कवियित्री पारो चौधरी जी को भी सम्मानित किया गया ।
कार्यक्रम के अंत में समापन पर एस जी होम्स के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने सभी कवियों की प्रशंसा की, सभी का हार्दिक धन्यवाद किया और इस तरह के प्रयास को साहित्य के क्षेत्र में एक सराहनीय कार्य बताया । संयोजक के रूप में पीयूष कांति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही I
कवियों द्वारा पढ़ी गई रचनाएं —-
चीख चीख कर अंतर्मन में अलख जगाने आया हूँ
एक नयी आज़ादी का मैं विगुल बजाने आया हूँ -गुरचरन मेहता रजत
यहाँ लहू में घुलकर बहता गीता का ज्ञान अमर है
यहाँ वीरों के साहस पर स्वयम गर्वित हुआ समर है –पीयूष कांति
किसी भी हीर ने न रंग लगाया आज होली में
हमारे दिल में फिर से दफ़न है कई राज होली में
किसी रांझे पे न बीती जो हम पे आज बीती है
वहां टालते रहे गुजिया बिना आवाज़ होली में –आशीष प्रकाश सक्सेना
बहुत खाली मार साथी अब उठा तलवार साथी
संगठन है तेरी नौका हौसला पतवार साथी –ओम प्रकाश कल्याणे
माँ भारती की संतति
यशस्वी तेरी कीर्ति
तू झूझता है सीमा पर
चौकस खड़ा है हर प्रहर
ऋणी है ये वसुंधरा
दिशा दिशा तेर प्रति माँ भारती —कीर्ति श्रीवास्तव
हरे भगवे के चक्कर में जो हिंदुस्तान डूबेगा
तो मजहब की सुनामी में हरेक इंसान डूबेगा
बहेगी रक्त की नदियां उठेगा ज्वार भावों का
भवर के बीच में अल्लाह और भगवान डूबेगा–निर्देश शर्मा पाबला
वतन की रक्षा की ख़ातिर जवानी दे गया है वो
भटकते यूथ को जीवन के मानी दे गया है वो।
हजारों स्वप्न देखे होंगे महकी सेज के जिसने…
किसी के हाथ में अपनी निशानी दे गया है वो।–ममता लड़ीवाल
छूने दो आसमां, बेड़ियाँ खोल दो
उनको सम्मान का रत्न अनमोल दो
बेटियां क्यूँ रहें, घर की दहलीज तक
विश्व का उनके हाथों में भूगोल दो –जगदीश मीणा
देश पर मर मिटे अपना सब वार के
अमर भी वो हो गए ये जन्म धार के
युग युगों तक जिन्हें भूलेगा न वतन
धन्य है ये धरा ऐसे सूत पाल के –अलका शर्मा
हिंदुस्तान में रहती हूँ दिल हिन्दुस्तानी रखती हूँ
जो शहीद हो गए वतन पर उनकी कहानी लिखती हूँ -शौभा सचान
दुर्गा जैसी शान भी मैं कल्पना जैसी उड़ान भी मैं
इंद्रा जैसा स्वाभिमान भी मैं लता के सुरों की तान भी मैं —लक्ष्मी बिमला नेगी
धर्म के नाम पर मत कफ़न बांटिये
मत सियासत की ख़ातिर वतन बांटिये
खून की होलियाँ ने खेलिए देश में
देश को सिर्फ चैन ओ अमन बांटिये –डॉ अशोक मधुप
पांच सितारा होटल के खानों के बदले
माँ की रोटी दाल बड़ी प्यारी लगती है –असलम बेताब
बहारों में खिला जो फूल अपने ही चमन का है
यहाँ बहता हुआ पानी सदा ही आचमन का है
बहा कर खून अपना जो करे है देश की रक्षा
हुआ जो आज है घायल सिपाही भी वतन का है–संजय कुमार गिरि
कुछ लोग यहां रिश्ते ऐसे भी निभाते हैं
तकलीफ़ भी देते हैं,मरहम भी लगाते हैं—-फैज बदायुनी
तेरी पावन गंगा जल से ,
ये पूजा पाठ करवाते हैं,
फिर तुम्हीं मे हे मइया,
हवन सामग्री फेकवाते हैं,
ये ज्ञानी या अज्ञानी है ,
ये हम समझ नहीं पाते हैं—-पारो चौधरी

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