आईपैक्स भवन वेलफेयर सोसाइटी ने अनवरत 100 वीं साहित्य गोष्ठी आयोजित कर, रचा कीर्तिमान

नई दिल्ली । आईपैक्स भवन में प्रत्येक माह अविराम रूप से आयोजित साहित्यक गोष्ठी “काव्य परम्परा” की 100 वींगोष्ठी विशद कवियित्री सम्मेलन के रूप में सानन्द सम्पन्न हुई।
सोसाइटी केप्रधान सुरेश बिन्दल ने सर्वप्रथम संरक्षक डॉ गोविंद व्यास, मंगल नसीम, गुनवीर राणा, उमा शंकर गोयल आदि से दीप प्रज्ज्वलित कराया।महामंत्री प्रमोद अग्रवाल, सुशील गोयल व आशु गुप्ता ने इसमें सहयोग दिया।
काव्य परम्परा के 100 वें संयोजन तक की अविस्मरणीय यात्रा के सलाहकार कवि श्रेष्ठ राजेश चेतन, पूर्व संरक्षक उदय प्रताप सिंह के साथ अनेक साथी कवियों प्रवीण शुक्ल, मनीष मधुकर, योगेन्द्र शर्मा आदि के संयोजन में सहयोग हेतु प्रशंसा की। दुशाला पहनाकर संरक्षक डॉ गोविंद व्यास का सम्मान किया। उन्होंने टीम को सफल शतकीय आयोजन पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।आमंत्रित कवियित्रियों का पुष्प गुच्छ से सम्मान किया गया।
संस्था प्रधान सुरेश बिंदल ने अतीत के झरोके से झांकते हुए अपने उद्गार प्रकट करते हुये कहा कि अनेक उतार-चड़ाव व खट्टे-मीठे अनुभवों के साथ यह शतकीय यात्रा सम्पूर्ण हुई हैं।
गोष्ठी की संचालिका श्रीमती बलजीत कौर ने माँ बागेश्वरी की वंदना का बनारस से पधारी डॉ ममता वार्ष्णेय से शुभारम्भ किया।

सर्वप्रथम नैनीताल से पधारी सुश्री गौरी मिश्रा ने काव्य पाठ किया-

“घुटन को छोड़ कर शहरों की तुम्हारे गांव आयी है
मोहब्बत डोर से चलकर के ये नंगे पांव आयी है
जो पहुंची हूँ बुलंदी पर परेशां हो रहे हैं सब
जली है धूप में मुद्दत तो जाके छाँव आयी है।”

बनारस की डॉ ममता वार्ष्णेय ने तरन्नुम में मधुर गीतों से खचाखच भरे सभागार में समां बांधा-

“कैसे कह दूँ जीवन बस साँसों का आना जाना है
हर पल में अहसास नया जो ये वो सफ़र सुहाना है।”
“वक्त की धारा बदलूँ हारी बाजी को भी जीत लिखूँ
सबके मन पर आशाओं के मनभावन से गीत लिखूँ
शब्दों को मथ कर कर्मों की कश्ती तक पहुंचाना है।”

गाज़ीपुर से पधारी सौम्य कवियित्री श्रीमती रश्मि शाक्य ने अपनी मधुर संवेदना जागृतवाणी से ज्ञानी श्रोताओं को झकझोर दिया-

“इक अधूरे इश्क का मौसम गुलाबी है
इसलिए इस धूप का परचम गुलाबी है।”
“ज़रा रख दो न अपने पाँव मेरे दिल के ज़ीने पर।
प्रणय के गीत मैं रच लूं भोज-पत्रों के सीने पर।
अभी रुकना हृदय की वीथिका में फिर चले जाना,
कोई वादा मेरा लेकर कोई वादा मुझे देकर।”

अब बारी थी संचालिका और हाज़िरजवाबी के लिए सुप्रसिद्ध फरीदाबाद से पधारी श्रीमती बलजीत कौर “तन्हा” की।उन्होंने लगभग तीन घंटे चले कवियित्री सम्मेलन को अपने हास परिहास से न केवल जीवंत किया अपितु अपनी श्रेष्ठ रचनाओं से श्रोताओं की वाहवाही भी लूटी-
“किसी को चाह लो,तो चाहत हो जाती है
अपना बना लो तो आदत हो जाती है।
मैने जान लिया दिल मे रहता है खुदा
लोगो को हँसा दो,इबादत हो जाती है।”
बलजीत कौर तन्हा ने हस्य के साथ पारिवरिक पृष्ठ भूमि पर गंभीर रचना पढ़कर श्रोताओ को अभिभूत कर दिया।
दिल्ली की उर्वशी उर्वी ने अपने दोहों से श्रोताओं को गुदगुदाया।
दो चरणों मे चले कवियित्री सम्मेलन में शेरों के द्वारा वरिष्ठ शायर मंगल नसीम ने अपनी त्वरित टिप्पणी से सभी कवियों को शुभाशीष व काव्य परम्परा परिवार को सैकड़ो बधाई दी। कवि गुनवीर राणा ने भी शुभकामनाएं दी।
राष्ट्रगान के साथ सम्पन्न हुए सम्मेलन हेतु प्रमोद अग्रवाल ने सभी का हार्दिक आभार व्यक्त किया और क्षेत्र की सामाजिक संस्था इंद्रप्रस्थ अग्रवाल समाज द्वारा सभी को रात्रिभोज पर आमंत्रित किया।
इस शुभ-अवसर पर अनुपम मनोहारी गुब्बारों की सजावट से सजे सभागार में सुषमा सिंह, प्रभात अग्रवाल, बीना ब्रह्म प्रकाश, अशोक खुराना, मदन खत्री, सतेंद्र अग्रवाल, आर के अग्रवाल, योगेन्द्र बंसल, उमेश गोयन्का आदि 300 से अधिकगणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी के साथ,सहयोगवसमर्थन से एक सफल काव्य यात्रा का सैकड़ा सम्पूर्ण हुआ।
इतिहास साक्षी रहेगा इस अनुपम काव्य आयोजन का।

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