इस देश को जानने के लिए अम्बेडकर को समझना जरूरी है : डा. नन्द किशोर गर्ग

नई दिल्ली | नवसंवत्सर के साथ रामनवमी, बैसाखी , रंगाली बिहू, डा. हेडगेवार और डा. अम्बेडकर जयंती और जलियांवाला बाग शताब्दी वर्ष का जो सिलसिला शुरू हुआ , उसका समापन महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलोजी और मैनेजमेंट में आयोजित बहुरंगी कार्यक्रम से हुआ | भारतीय संस्कृति, भक्ति , ओज और राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत इस कार्यक्रम में देश के जाने-माने कवियों और मनीषियों ने अपने वक्तव्यों और कविताओं से छात्रों को सम्मोहित किया |
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित दिल्ली टेक्निलोजीकल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो.योगेश सिंह ने कहा कि अच्छाई बोना सीखें, संवेदनशील बनें | उन्होंने छात्रों को शपथ दिलाई कि वे जीवन में ऐसा कोई काम न करें जो देश के खिलाफ हो | संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डा. नन्द किशोर गर्ग ने अपने संबोधन में डा. भीमराव अम्बेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस देश को समझने के लिए अम्बेडकर को समझना जरूरी है और उन्होंने समाज में जिस समरसता की बात कही, भगवान राम उसका साक्षात् रूप थे | उन्होंने राम को अपने जीवन में उतारा | उन्होंने कहा जब सामाजिक समरसता स्थापित हो जाएगी तो आरक्षण की वैशाखी स्वयं ही छूट जाएगी पूरा समाज अपने पांवों पर , अपनी योग्यता के बल पर ही चलेगा | इस अवसर पर इस वर्ष सिविल सर्विसेज परीक्षा में 38 वां साथ पाने वाले महाराजा अग्रसेन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलोजी के छात्र लक्ष्य सिंघल ने अपनी सफलता की कहानी छात्रों से साझा की | प्रबंधन की ओर से लक्ष्य को सम्मानित भी किया गया |
इटावा से आमंत्रित कवि डा. कमलेश शर्मा ने राम की सामाजिक समरसता को रेखांकित करते हुए अपनी कविता ‘…इसीलिए तो राम शबरी की कुटिया पर आये…’ का पाठ किया | अन्तराष्ट्रीय ख्याति-प्राप्त ओज के कवि डा. हरिओम पंवार ने अपनी कविता ‘संविधान बोल रहा हूँ…’ और ‘कश्मीर किसी के अब्बा की जागीर नहीं …’ से राजनीति और व्यवस्था पर करारी चोट करते हुए युवाओं में जोश का संचार किया | संस्थान की निदेशक डा. नीलम शर्मा के स्वागत वक्तव्य शुरू हुए कार्यक्रम का समापन महाराजा अग्रसेन टेक्नीकल एजुकेशन सोसायटी के उपाध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ | श्री मित्तल ने दो पंक्तियों के माध्यम से जीवन अपने कर्त्तव्य पालन का सन्देश देते हुए कहा –
ज़िन्दगी के रंगमंच पर इतनी खूबसूरती से निभाओ किरदार अपना ,
कि परदा गिरने के बाद भी तालियाँ बजती रहीं , तालियाँ बजती रहें |

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