हिन्दी (अंक 5)
Sep 12th, 2007 by admin
जैसे अंग्रेजी ही सब कुछ
इसके बिना नहीं कुछ जैसे
रूस, चीन, जापान, जर्मनी
फिर सबसे आगे हैं कैसे?
छोटे-छोटे देश गर्व से
अपनी भाषा बोल रहे हैं
एक अभागे हम हैं ऐसे
हिन्दी को कम तोल रहे हैं
सौ करोड़ की इस भाषा का
दुनिया कब सम्मान करेगी
कब भारत की गली-गली से
अंग्रेजी प्रस्थान करेगी
हम अंग्रेजी को तज देंगे
आओ यह संकल्प उठाएं
हिन्द निवासी, हिन्दी वालो
आओ हिन्दी को अपनाएं