विश्व विजेता भारत (अंक 8)
Sep 27th, 2007 by admin
भारत ने 24 साल के लम्बे अंतराल के बाद एक बार फिर वर्ल्ड कप जीत लिया। हालांकि यह ट्वंटी-ट्वंटी मैचों का वर्ल्ड कप था, लेकिन इस जीत को किसी भी मायने में वर्ल्ड कप 1983 की जीत से कम नहीं माना जा सकता। क्योंकि पहली बात तो यह कि ट्वंटी-ट्वंटी मैचों में भारत का अनुभव न के बराबर था और दूसरी बात यह कि इस टीम में सचिन, सौरभ, द्रविड़ जैसे दिग्गज खिलाड़ी शामिल नहीं थे। बावजूद इसके भारत की युवा ब्रिगेड ने अपने शानदार प्रदर्शन से न केवल चयनकर्ताओं को भी चौंका दिया बल्कि इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और वर्तमान वर्ल्ड चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया जैसी उन टीमों को भी धूल चटा दी जिनका प्रतिनिधित्व क्रिकेट जगत के धुरंधर खिलाड़ी कर रहे थे।
इतना ही नहीं भारत ने पाकिस्तान को पहले ग्रुप मैच में और फिर फाइनल में पीट कर वर्ल्ड कप में यह भी साबित कर दिया कि आंकड़ों के हिसाब से पाकिस्तान भले ही भारत पर भारी पड़ता हो लेकिन वर्ल्ड कप के दौरान उसे भारत के हाथों पिटना ही होगा। भारत की इस शानदार जीत के पीछे जो सबसे बड़ा कारण रहा, वह था सभी खिलाडि़यों का एकजुट होकर देश के लिए खेलना। इस वर्ल्ड कप के दौरान पहली बार यह बात दिखाई दी कि प्रत्येक खिलाड़ी अपने लिये नहीं बल्कि देश के लिए खेल रहा था। जिस खिलाड़ी को जितना मौका मिला, उसी खिलाड़ी ने अपने चयन को पूरी तरह से सार्थक कर दिखाया।
इस वर्ल्ड कप में जहां रोहित शर्मा, रॉबिन उथप्पा, युसूफ पठान, जोगिन्द्र शर्मा जैसे नवयुवक खिलाडि़यों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला वहीं इरफान पठान व हरभजन सिंह ने भी अपने शानदार प्रदर्शन के बल पर चयनकर्ताओं को यह बता दिया कि उन्हें अभी तक टीम से बाहर रखने का फैसला कितना गलत था। कप्तान की भूमिका में महेन्द्र सिंह धोनी ने भी यह साबित कर दिया कि यदि प्रतिभाशाली खिलाडि़यों का साथ मिले तो बिना अनुभव के भी सफलता पाई जा सकती है।
उपकप्तान युवराज सिंह व उत्तर प्रदेश के गेंदबाज आर.पी. सिंह ने वर्ल्ड कप भारत की झोली में डालने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। युवराज सिंह द्वारा इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए मैच में स्टुवर्ड ब्रॉड के एक ही ओवर में लगाए गए छः छक्के तथा मात्र 12 गेंदों पर बनाया गया अर्धशतक लम्बे समय तक क्रिकेट प्रेमियों को याद रहेगा। वर्तमान टीम के इस शानदार प्रदर्शन को देखते हुए यह कहना गलत न होगा कि यह युवा ब्रिगेड बना दिग्गज खिलाडि़यों के भी वर्ष 2011 में होने वाले विश्व कप में भी जीत का झण्डा गाड़ सकती है।