परिसीमन (अंक 29)
Posted in चेतन वाणी on Feb 25th, 2008 No Comments »
नया विधेयक परिसीमन का आया है
नव खुशियां और नया सवेरा लाया है
दशकों से जो इक कुर्सी को तोड़ रहे
चेहरा उनका लगता कुछ मुरझाया है।
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Posted in चेतन वाणी on Feb 25th, 2008 No Comments »
नया विधेयक परिसीमन का आया है
नव खुशियां और नया सवेरा लाया है
दशकों से जो इक कुर्सी को तोड़ रहे
चेहरा उनका लगता कुछ मुरझाया है।
Posted in चेतन वाणी on Feb 20th, 2008 No Comments »
नोट छापने की ये कैसी बेला है
शेयर मार्केट लगे ठगों का मेला है
अनिल अम्बानी थोड़ा हमको समझाओं
जनता के संग खेल कौन सा खेला है?
Posted in चेतन वाणी on Feb 9th, 2008 No Comments »
कोई जाति कोई पंथ विशेष नहीं
प्रांतवाद का भी कोई परिवेश नहीं
राज ठाकरे को जाकर ये समझाओ
मुंबई भारत का हिस्सा है देश नहीं
Posted in चेतन वाणी on Feb 4th, 2008 No Comments »
वैद्य मौत का यार हमारे भारत में
कैसा है व्यापार हमारे भारत में
पुलिस के सम्मुख किड़नी बेच गया देखो
डॉक्टर सीमा पार हमारे भारत में
Posted in चेतन वाणी on Feb 4th, 2008 No Comments »
हाथ लगा और शेयर देखो फिसल गए
अम्बानी जी सबसे आगे निकल गए
आम आदमी जब भी गया दलाल स्ट्रीट
शेयर बन कर ‘शेर’ उसे ही निगल गए
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