राजबीर (अंक 34)
Posted in चेतन वाणी on Mar 31st, 2008 No Comments »
गरम कढ़ाई में जो खुद ही तला गया
वर्दी को हथियार बनाकर चला गया
एनकाउंटर करते-करते ही राजबीर
खुद एनकाउंटर में ही देखो छला गया
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Posted in चेतन वाणी on Mar 31st, 2008 No Comments »
गरम कढ़ाई में जो खुद ही तला गया
वर्दी को हथियार बनाकर चला गया
एनकाउंटर करते-करते ही राजबीर
खुद एनकाउंटर में ही देखो छला गया
Posted in चेतन वाणी on Mar 18th, 2008 No Comments »
बस्ती भर में हो रहा, होली का हुड़दंग
तुम घर में क्यूं बैठकर, करते मुझको तंग
पड़ोसन के गाल पे, जैसे मला गुलाल
बीवी का रंग हो गया, कुछ पीला कुछ लाल
एस.एम.एस. शुभकामना, ई-मेल से प्यार
इन्टरनेट पर हो रहा, होली का त्योहार
पनघट मुझको घूरता, पानी में है आग
पिया गये परदेश में, कैसे खेलूं फाग
लगा लिया है मांग में, […]
Posted in चेतन वाणी on Mar 11th, 2008 No Comments »
वक्त के तेवर पीएम जी पहचान गए
साम्यवादियों को भी थोड़ा जान गए
परमाणु मुद्दा सुलझाने को मोहन जी
वाजपेयी को भीष्मपितामह मान गए
Posted in चेतन वाणी on Mar 3rd, 2008 No Comments »
लोकसभा में खूब बजे हैं बाजे जी
सत्ता वाले मिल-जुल कर हैं नाचे जी
वित्ति मंत्री खूब पिटारा खोला है
चुनाव हमारे लगता है दरवाजे जी
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