होली (अंक 32)
Mar 18th, 2008 by admin
बस्ती भर में हो रहा, होली का हुड़दंग
तुम घर में क्यूं बैठकर, करते मुझको तंग
पड़ोसन के गाल पे, जैसे मला गुलाल
बीवी का रंग हो गया, कुछ पीला कुछ लाल
एस.एम.एस. शुभकामना, ई-मेल से प्यार
इन्टरनेट पर हो रहा, होली का त्योहार
पनघट मुझको घूरता, पानी में है आग
पिया गये परदेश में, कैसे खेलूं फाग
लगा लिया है मांग में, चुटकी भर सिन्दूर
होली आंगन आ गई, फौजी हमसे दूर