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Archive for April, 2008

आम आदमी रोता है तो रोने दो
खून खराबा होता है तो होने दो
हत्याएं सरेआम हो रही दिल्ली में
राजा अपना सोता है तो सोने दो।

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नई सुबह और नया सवेरा लाया है
राग खुराना फिर से उसने गाया है
सर्कस से जो शेर निकलकर भागा था
हाथ जोड़ कर फिर सर्कस में आया है।

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बजट का मटका देखो कैसे फूटा है
आम आदमी बिल्कुल टूटा-टूटा है
महंगाई का पंजा जम कर मार दिया
यू पी ए ने मिलकर हमको लूटा है।

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