इश्मित (अंक 52)
Sep 2nd, 2008 by admin
वो आया और महफिल को ही लूट गया
जैसे कोई प्यार का झरना फुट गया
इश्मित के जाने से हमको लगता है
संगीत गगन का चम चम तारा टूट गया
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