लोकतंत्र (अंक 51)
Sep 2nd, 2008 by admin
नोट उड़े संसद भवन, नेता बड़े महान
खतरे में हमको लगे, लोकतंत्र की शान
लोकतंत्र की शान, हुआ भारी घोटाला
पैसे लेकर नेता जी ने बदला पाला
कहे चेतन कविराय नोट की महिमा न्यारी
जीत गई सरकार, हार गई जनता सारी
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