अमर सिंह (वर्ष-6, अंक 10)
Posted in चेतन वाणी on Oct 13th, 2008 No Comments »
गद्दारों से कदम-कदम पर द्वंद करो
जनमानस की रक्षा का प्रबंध करो
आतंकवाद के वकील बने जो घूम रहे
अमर सिंह को अब तिहाड़ में बंद करो
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Posted in चेतन वाणी on Oct 13th, 2008 No Comments »
गद्दारों से कदम-कदम पर द्वंद करो
जनमानस की रक्षा का प्रबंध करो
आतंकवाद के वकील बने जो घूम रहे
अमर सिंह को अब तिहाड़ में बंद करो
Posted in चेतन वाणी on Oct 13th, 2008 No Comments »
सार्वजनिक स्थलों पर नहीं होगा धूम्रपान
रामदोस जी ने किया खुल कर ये एलान
खुल कर ये एलान, करेंगे अब जुर्माना
बीड़ी, सिगरेट देख-भाल कर ही सुलगाना
कहे चेतन कविराय नियम लगता है भारी
कानून को तोड़ेंगे अपनी है लाचारी
Posted in चेतन वाणी on Oct 13th, 2008 No Comments »
गोयल जी तो गोल हैं, डॉकटर हैं नाराज
दिल्ली में अब आएगा मल्होत्रा का राज
मुखी जी परेशान हैं, अरुण भी है बेचारा
खुराना तो अपने आपसे खुद ही हारा
कहे चेतन कविराय बुढ़ापा सबसे आगे
नौजवान हैं पीछे-पीछे और अभागे
Posted in चेतन वाणी on Sep 24th, 2008 No Comments »
सीमाओं पर जाना होगा
वन्देमातरम् गाना होगा
बम बम बम बम रटने वालों
खुद को ‘बम’ बनाना होगा।
Posted in चेतन वाणी on Sep 15th, 2008 No Comments »
राज तुमहारा कैसा ये अभियान है
हिन्दी को गाली देना आसान है
वीर मराठा तुमको इतना ध्यान रहे
हिन्दी से ही भारत की पहचान है।
Posted in चेतन वाणी on Sep 15th, 2008 No Comments »
कभी किसी की जीत किसी की हार है
नेतागण को बस कुर्सि से प्यार है
कुर्सि के चक्कर में देखो संकट में
पानी-पानी-पानी आज बिहार है
Posted in चेतन वाणी on Sep 15th, 2008 No Comments »
खर्चा हुआ तमाम, देखिए दिल्ली में
वाहन बिन लगाम, देखिए दिल्ली में
फलाई ओवर खूब बनाओ, तुम बेशक
ट्रेफिक हर दम जाम, देखिए दिल्ली में
Posted in चेतन वाणी on Sep 2nd, 2008 No Comments »
अभिनव बिंद्रा पदक तुमहारा पावन है
तेरी शूटिंग सच में ही मनभावन है
सौ वर्षों से स्वर्ण पदक की प्यास लिए
पदक नहीं लगता आंखों में सावन है।
Posted in चेतन वाणी on Sep 2nd, 2008 No Comments »
पांच साल का ये अपना इतिहास है
‘अपनी दिल्ली’ अपना है और खास है
इन्टरनेट से सारी दुनिया देख रही
पाठक का हमने पाया विश्वास है।
Posted in चेतन वाणी on Sep 2nd, 2008 No Comments »
वो आया और महफिल को ही लूट गया
जैसे कोई प्यार का झरना फुट गया
इश्मित के जाने से हमको लगता है
संगीत गगन का चम चम तारा टूट गया
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