अपनी दिल्ली (अंक 1)
Posted in चेतन वाणी on Sep 2nd, 2008 No Comments »
पांच साल का ये अपना इतिहास है
‘अपनी दिल्ली’ अपना है और खास है
इन्टरनेट से सारी दुनिया देख रही
पाठक का हमने पाया विश्वास है।
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Posted in चेतन वाणी on Sep 2nd, 2008 No Comments »
पांच साल का ये अपना इतिहास है
‘अपनी दिल्ली’ अपना है और खास है
इन्टरनेट से सारी दुनिया देख रही
पाठक का हमने पाया विश्वास है।
Posted in चेतन वाणी on Sep 2nd, 2008 No Comments »
वो आया और महफिल को ही लूट गया
जैसे कोई प्यार का झरना फुट गया
इश्मित के जाने से हमको लगता है
संगीत गगन का चम चम तारा टूट गया
Posted in चेतन वाणी on Sep 2nd, 2008 No Comments »
नोट उड़े संसद भवन, नेता बड़े महान
खतरे में हमको लगे, लोकतंत्र की शान
लोकतंत्र की शान, हुआ भारी घोटाला
पैसे लेकर नेता जी ने बदला पाला
कहे चेतन कविराय नोट की महिमा न्यारी
जीत गई सरकार, हार गई जनता सारी
Posted in चेतन वाणी on Jul 21st, 2008 No Comments »
अमरिका से हो रहा परमाणु इकरार
जिसके कारण कष्ट में मोहन की सरकार
मोहन की सरकार सिंहासन डोल रहा है
दल बदलू जी खुल कर चांदी तोल रहा है
कह चेतन कविराय ये कैसी डेमोक्रेसी
जनता की हर दम होती है एसी तैसी
Posted in चेतन वाणी on Jul 15th, 2008 No Comments »
अमरीकन इस डील से ऐसा मचा बबाल
मोहन की सरकार अब देखो है बेहाल
देखो है बेहाल महंगाई बात पुरानी
कांग्रेस और वामपंथ की एक कहानी
महंगाई से जनता का है ध्यान हटाना
छेड़ दिया परमाणु का नया बहाना
Posted in चेतन वाणी on Jun 10th, 2008 No Comments »
विश्वविद्यालय एडमिशन क्या कहना
भटक रहा है तन और मन क्या कहना
लगता है पैरिस ही उतरा दिल्ली में
चहुंओर है फन ही फन क्या कहना
Posted in चेतन वाणी on Jun 3rd, 2008 No Comments »
मोहन जी की ये कैसी लाचारी है
महंगाई की जंग साथियो जारी है
कर्नाटक में कमल खिला देखा जबसे
लगता है अब लोकसभा की बारी है।
Posted in चेतन वाणी on May 27th, 2008 No Comments »
नगर नोएडा लगता कुछ घबराया है
एक पिता ने रिश्ता नहीं निभाया है
निठारी को नहीं भुला हम पाए थे
आरूषि ने फिर से हमें रुलाया है
Posted in चेतन वाणी on May 19th, 2008 No Comments »
अधिकारी भी चादर तानें लेटे हैं
नेतागण इक दूजे पर ऐठे हैं
जयपुर के ये बम धमाके बोल रहे
घर के दुश्मन घर में आकर बैठे हैं।
Posted in चेतन वाणी on May 13th, 2008 No Comments »
सांस सांस देश पे चढ़ाने वालों को नमन
अठारह सौ सतावन भूल नहीं पाते हैं
लक्ष्मी बाई, तांत्या टोपे, जफ़र की कुर्बानी
गली-गली, गांव-गांव, घूम-घूम गाते हैं
देश के लिए जो तन-मन-धन वार गए
उन रण बांकुरों पे वारी-वारी जाते हैं
जिनकी शहादत से भारत आजाद हुआ
उन बलिदानियों को शीश हम झुकाते हैं।
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