Feed on
Posts
Comments

सम्पादकीय |  कार्टून |  चेतन वाणी |  दिल्ली उंचा सुनती है |  दिल्ली दर्शन |  विशेष समाचार |  भविष्यफल |  विविधा |  मित्र को बताएं
परिचय |  अपनी दिल्ली परिवार  |  अपनी दिल्ली सम्मान |  अपनों की नज़र में |  चित्र दीर्घा |  आडियो / विडियो
सुझाव / शिकायत |  सम्पर्क करें |  महत्वपूर्ण लिंकस |  सदस्यता फार्म |  विज्ञापन फार्म

विश्वविद्यालय एडमिशन क्‍या कहना
भटक रहा है तन और मन क्‍या कहना
लगता है पैरिस ही उतरा दिल्ली में
चहुंओर है फन ही फन क्‍या कहना

मोहन जी की ये कैसी लाचारी है
महंगाई की जंग साथियो जारी है
कर्नाटक में कमल खिला देखा जबसे
लगता है अब लोकसभा की बारी है।

नगर नोएडा लगता कुछ घबराया है
एक पिता ने रिश्ता नहीं निभाया है
निठारी को नहीं भुला हम पाए थे
आरूषि ने फिर से हमें रुलाया है

अधिकारी भी चादर तानें लेटे हैं
नेतागण इक दूजे पर ऐठे हैं
जयपुर के ये बम धमाके बोल रहे
घर के दुश्मन घर में आकर बैठे हैं।

सांस सांस देश पे चढ़ाने वालों को नमन
अठारह सौ सतावन भूल नहीं पाते हैं
लक्ष्मी बाई, तांत्या टोपे, जफ़र की कुर्बानी
गली-गली, गांव-गांव, घूम-घूम गाते हैं
देश के लिए जो तन-मन-धन वार गए
उन रण बांकुरों पे वारी-वारी जाते हैं
जिनकी शहादत से भारत आजाद हुआ
उन बलिदानियों को शीश हम झुकाते हैं।

ना बिजली ना पानी है
गर्मी की मनमानी है
महंगाई ने मार दिया
दिल्ली की शैतानी है

आम आदमी रोता है तो रोने दो
खून खराबा होता है तो होने दो
हत्याएं सरेआम हो रही दिल्ली में
राजा अपना सोता है तो सोने दो।

नई सुबह और नया सवेरा लाया है
राग खुराना फिर से उसने गाया है
सर्कस से जो शेर निकलकर भागा था
हाथ जोड़ कर फिर सर्कस में आया है।

बजट का मटका देखो कैसे फूटा है
आम आदमी बिल्कुल टूटा-टूटा है
महंगाई का पंजा जम कर मार दिया
यू पी ए ने मिलकर हमको लूटा है।

गरम कढ़ाई में जो खुद ही तला गया
वर्दी को हथियार बनाकर चला गया
एनकाउंटर करते-करते ही राजबीर
खुद एनकाउंटर में ही देखो छला गया

« Newer Posts - Older Posts »

सम्पादकीय |  कार्टून |  चेतन वाणी |  दिल्ली उंचा सुनती है |  दिल्ली दर्शन |  विशेष समाचार |  भविष्यफल |  विविधा |  मित्र को बताएं
परिचय |  अपनी दिल्ली परिवार  |  अपनी दिल्ली सम्मान |  अपनों की नज़र में |  चित्र दीर्घा |  आडियो / विडियो
सुझाव / शिकायत |  सम्पर्क करें |  महत्वपूर्ण लिंकस |  सदस्यता फार्म |  विज्ञापन फार्म