नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने आज कहा कि राजधानी में भूख मुक्त अभियान के अन्तर्गत दिल्ली सरकार दो दर्जन से अधिक आपकी रसोई केन्द्र खोलेगी जिससे बेघर गरीब और बेसहारा लोगों को पोषक और ताजा आहार मिलने लगेगा। श्रीमती दीक्षित आज पश्चिमी दिल्ली के गुरु गोविन्द सिंह अस्पताल, रघुवीर नगर में आपकी रसोई के पांचवे केन्द्र का उद्घाटन कर रही थी। मुख्यमंत्री ने इस पांचवे केन्द्र के खोले जाने को दिल्ली सरकार और आईटसी मौर्या के बीच मानवीय संयुक्त उपक्रम बताया। इस अवसर पर दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री डॉ. योगानन्द शास्त्री, विधायक श्री रमेश लाम्बा और श्री माला राम गंगवाल और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। भागीदारी कार्यक्रम की नई पहल आपकी रसोई के द्वारा बेसहारा लोगों को कम एक वक्त भरपेट भोजन उपलब्ध कराना है। श्रीमती दीक्षित ने कहा कि भूख मुक्त दिल्ली अभियान को तेज किए जाने से कुपोषण पर भी अंकुश लगेगा क्योंकि कई बार देखा जाता है कि कुछ बच्चे कूडे को बीनकर खाने की वस्तुएं जुटाने की कोशिश करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार निर्धारित केन्द्रों पर तैयार भोजन वितरित करने का काम सुविधाजनक बनाने के लिए स्वयंसेवी संगठन और व्यापारिक घरानों को हरसंभव मदद देती रहेगी। आईटीसी मोर्या ने भोजन तैयार करने का कार्य बंगलौर की संस्था अक्षयपत्र को सौंपा है। अईटीसी मौर्या द्वारा लाया गया तैयार ताजा भोजन सौकड़ों लोगों को वितरित गया। सरकार नई पहल के अंतर्गत रैन-बसेरों के इस्तेमाल की अनुमति देगी जबकि भोजन उपलब्ध कराने वाली संस्थएं स्वच्छता से तैयार किया गया भोजन लाकर गरीबों में बांटेगी। इस अवसर पर दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री ड़ॉ योगान्द शास्त्री ने कहा कि भूख मुफत दिल्ली कार्यक्रम का उद्देश्य उन बेसहारा लोगों को भोजन उपलब्ध कराना है, जो अक्सर सड़कों पर भूखे पेट सोने को मजबूर हो जाते हैं। मुख्यमंत्री निजामुद्दीन, झण्डेवालान, चांदनी चौक और यमुना बाजार में ऐसे चार केन्द्रों का शुभारंभ पहले ही कर चुकी हैं। कंपनियों, व्यापारिक घरानों, सक्षम व्यक्तियों और संगठनों तथा स्वयं-सेवी संस्थाओं से आग्रह किया गया है कि वो एक ऐसे स्थान का चयन करें, जहां बेसहारा लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
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नई दिल्ली। दिल्ली मंत्रिमण्डल ने कुल मिलाकर रसोई खर्च में काफी राहत देने का फैसला किया है। आम आदमी के प्रति सरकार की प्रतिबद्घता के मद्देनजर ऐसा किया गया है। यह फैसला किया गया है कि प्रति एलपीजी सिलेण्डर में 50 रुपए कर समेत की बजाय कर समेत केवल 10 रुपए की बढोत्तरी होने दी जायेगी। मंत्रिमण्डल श्रीमती शीला दीक्षित की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
मंत्रिमण्डल की बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने बताया कि राजधानी में मुद्रास्फीति की दर पर काबू पाने के लिए यह फैसला किया गया है कि एलपीजी सिलेण्डर में बढोत्तरी केवल 10 रुपए तक सीमित होगी। श्रीमती दीक्षित ने यह भी कहा कि उनकी सरकार विगत में भी आम जनता को हर संभव राहत पहुंचाने के लिए अपने स्तर पर पहल करती रही है। मंत्रिमण्डल ने यह भी फैसला किया है कि बस भाड़े में कोई वृद्घि नहीं की जायेगी। सरकार दिल्ली सार्वजनिक परिवहन को और अधिक आरामदायक, वाजिब, तीव्र और आधुनिक बनाने के प्रयास कर रही है ताकि लोग डीटीसी बसों में यात्रा करना पसन्द करें। सरकार ने यात्रियों को लो क्लोर वातानुकूलित बसें, आधुनिक हरी लो फलोर बसें और दिल्ली मेट्रो की सेवाएं मुहैया कराकर कई विकल्प प्रदान किए हैं।
श्रीमती दीक्षित ने बताया कि अनावश्यक खर्च पर अंकुश लगाने के लिए मितव्यता के उपाय किए जाएंगे। पहले कदम केञ् तौर पर यह फैसला किया गया है कि किसी शिष्टमंडल को विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी जायेगी।
सरकार खर्च की मौजूदा प्रवृत्ति पर बारीकी से नजर रखेगी ताकि इसे अधिक तर्कसंगत और न्यायसंगत बनाया जा सके और सामाजिक योजनाओं के लिए निर्धारित राशि का उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
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नई दिल्ली। कई वर्षो से त्रिनगर क्षेत्र व औद्योगिक क्षेत्र लारेंस रोड के व्यापारी ब्रिटानिया चौक के निकट रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे अण्डर ब्रिज के शुरू होने का इतंजार कर रहे हैं। लेकिन कुछ तकनीकि कारणों के चलते यह अण्डर ब्रिज जनता को निर्धारित समय पर समर्पित न हो सका जिस कारण यहां की जनता को विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर निगमायुक्त के एस मेहरा ने त्रिनगर विधान सभा क्षेत्र के विधायक अनिल भारद्वाज निगम पार्षद मनोज यादव व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लारेंस रोड क्षेत्र का दौरा किया और यहां के व्यापारियों व जनता की समस्याओं को सुनकर उन्हें तुरंत हल करने का आश्वासन दिया। श्री मेहरा ने ‘अपनी दिल्ली’ को बताया कि लारोंस रोड के व्यापारियों व जनता की इस समस्या का जल्द ही समाधान हो जायेगा। उन्होंने बताया कि सितम्बर माह तक लारेंस रोड अण्डर पास ब्रिज को एक साइड से शुरू कर दिया जाएगा और नवम्बर माह तक यह ब्रिज पूरी तरह जनता के लिए खोल दिया जाएगा। साथ ही यहां की सडक़ों का पुनः निमार्ण किया जाएगा। निगमायुक्त ने यह भी घोषणा की कि त्रिनगर विधान सभा क्षेत्र में शीध्र ही तीन नए रेलवे अण्डर ब्रिजों के निमार्ण कार्यो का शुभारंभ किया जायगा। श्री मेहरा ने अपने इस क्षेत्रीय दौरे मे पाया कि यह क्षेत्र तीन चार साइड से रेलवे क्रॉसिंग से जुडा हुआ है जिसके कारण यहां भारी जाम लगा रहता हैं औद्योगिक क्षेत्र होने के करण यहां माल वाहक भारी वाहनो का आवागमन ज्यादा है। कई बार सडक़ो में बने बड़े-बड़े गड्ढों के करण भारी वाहन पलट जाते है। इन समस्याओं से निपटने के लिए उन्होंने घोषणा की कि शकूर बस्ती, ओंकार नगर, रामपुरा मे तीन नए रेलवे अण्डर ब्रिजों का निर्माण अक्टूबर 2008 मे शुरू कर दिसम्बर 2009 तक जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। क्षेत्रीय विधयाक अनिल भारद्वाज, पार्षद मनोज यादव ने तीन नए ब्रिज निर्माण के कार्यो को निश्चित समयावधि मे बिना किसी विलम्ब के पूर्ण करने की मागं की ताकि ब्रिटानिया अण्डर ब्रिज के निमार्ण मे हो रही देरी की भांति जनता को परेशानी न उठानी पड़े। तत्पश्चात निगमायुक्त ने डी.एम.आई. डी.सी. कॉम्पलैक्स, लारेंस रोड, जे. जे. कलस्टर इंदिरा कालोनी, जे. जे . कलस्टर गोल्डन पार्क,अशोका पार्क आदि इलाकों का निरिक्षण कर बरसाती पानी के निकास की व्यवस्था, जर्जर हुई सड़कों का पुननिर्मण तथा पार्कों के सौंदर्यकरण के लिए अधिकारियों को दिशानिर्देश जारी किये। इस दौरे में निगमायुक्त के साथ विधायक अनिल भारद्वाज, पार्षद मनोज यादव, रोहिणी जोन के उपायुक्त के. विजयन
निगम पार्षद अमृतलाल सिंघल व एन राजा, रेलवे के चीफ इंजिनियर, रविदास (इंजिनियरिंग इन चीफ दिल्ली नगर निगम), एनडीपीएल व जल बोर्ड केञ् वारिष्ठ अधिकारियों के अलावा ब्लाक काग्रेस अध्यक्ष रजेन्द्र्र्र तायल, ओ पी मल्होत्रा, इन्द्र कौशिक, प्रदेश कांग्रेस सचिव सतीश त्यागी, यूथ ब्लाक अध्यक्ष सुन्दर खारी, रूपेश खारी, राजेश यादव, नीरज भारद्वाज, ममता यादव, प्रदीप, मोनू यादव, महिला काग्रेस अध्यक्ष पूनम कवोच, मीना चौहान, सुरेन्द्र यादव, शैलेन्द्र वशिष्ठ आदि गणमान्य व्याक्ति उपास्थित थे। गौरतलब है कि क्षेत्र के विधायक अनिल भारद्वाज एवं निगम पार्षद मनोज यादव क्षेत्र के विकास के लिए तीव्र गति से कार्य कर रहे हैं।
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नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती दीक्षित ने रोहिणी सेक्टर-क्म्, अम्बेडकर भवन में एपैरल ट्रेनिंग एंड डिजाइन सेंटर-सिलेसिलाए वस्त्र, प्रशिक्षण और डिजाइन केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने महिन्द्रा सीएनजी चैम्पियन लोड करियर योजना के अंतर्गत 85 लाभार्थियों को चेक का वितरण भी किया।
दिल्ली में यह पहला एपैरल ट्रेनिंग डिजाइन सेंटर है जिसकी स्थापना एपैरल एक्सर्पोट प्रमोशन कौंसिल ने दिल्ली सरकार के साथ मिलकर की है। इसमें दिल्ली सरकार द्वारा पूरी तरह प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्संख्यक समुदाय और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवकों के लिए शुरू किए गए हैं। इसमें सिलेसिलाए वस्त्र निर्माण तकनीक, बुनाई वाले मैकेनिक कोर्स, सिलेसिलाए वस्त्र उत्पादन कोर्स आदि का प्रावधान है। यह पाठ्क्रम चार माह से एक वर्ष की अवधि के हैं। सिलेसिलाए वस्त्र उत्पादन पाठ्यक्रम के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं की गई। इससे युवकों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। अन्य पाठ्यक्रमों के लिए आठवीं और दसवीं कक्षा पास किए युवक फायदा उठा सकते हैं।
रोहिणी का यह केंञ्द्र सिलेसिलाए वस्त्र उद्योग में युवकों को प्रशिक्षण देने के मकसद से तैयार किया गया है। इसके लिए अनुसूचित जाति/जनजाति वित्त और विकास निगम ने 30 लाख रुपये का अनुदान दिया है ताकि 45 आधुनिक मशीनें, प्रशिक्षण उपकरण और कार्यालय उपकरण खरीदें जा सके। यहां हर वर्ष 500 युवकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस केंद्र को बहुत कम समय में चालू किया गया है और यहां इस समय 98 युवक प्रशिक्षण ले रहे हैं। केंद्र में पूरी संख्या में प्रशिक्षक नियुक्त किए गए हैं। केन्द्र युवकों को कई अन्य रियायतें भी दे रहा है।
इस केंद्र में अन्य अल्पकालिक पाठयक्रम की भी व्यवस्था है जैसे राजमिस्त्री, नल मरम्मत, बिजली की वॉयरमैन, कारपेंटर आदि। डीएसएफडीसी ने अम्बेडकर भवन में इस केंद्र के लिए मुफत स्थान उपलब्ध कराया है जबकि एपैरल एक्सपोर्ट कौंसिल ने अन्य व्यवस्था की है। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवकों को संबंधित उद्योग में रोजगार प्राप्त करने में मदद दी जाएगी। श्रीमती दीक्षित ने केन्द्र का दौरा किया और युवकों को प्रवेश-पत्र वितरित किए।
उन्होंने कहा कि इससे युवकों को रोजगार प्राप्त करने में काफी मदद मिलेगी। विकास मंत्री राजकुमार चौहान ने समारोह की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि यह केन्द्र युवकों को प्रशिक्षण प्रदान करने में निर्णायक भूमिका अदा करेगा। उन्होंने इस केंद्र के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री और एपैरल एक्सपोर्ट कौंसिल का धन्यवाद किया।
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नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने कहा कि दिल्ली की जेल न केवल भारत बल्कि पूरे ऐशिया में बेहतर जेलों में से एक हैं। तिहाड़ और रोहिणी जेल में सीसीटीवी कैमरों के लग जाने से न केवल उसकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी बल्कि खूंखार कैदियों पर नजर रखने के साथ-साथ जेल प्रबंधन में लगे कर्मचारियों की गतिविधियों को भी बारीकी से देखा जा सकेगा। श्रीमती दीक्षित तिहाड़ जेल परिसर में सीसीटीवी कंट्रोल रूम का उदघाटन कर रही थीं। उद्घाटन समारोह के अवसर पर तिहाड़ जेल के महानिदेशक श्री बी.के. गुप्ता के अलावा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
श्रीमती दीक्षित ने कहा कि तिहाड़ जेल में कैदियों की संख्या अधिक होने से उन पर नजर रखे जाने में काफी दिक्कतें आ रही थीं। इसके अलावा तिहाड़ जेल केञ् कर्मचारी द्वारा कैदियों से किए जा रहे व्यवहार पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए नजर रखी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि तिहाड़ जेल में 227 सीसीटीवी कैमरों के लग जाने के बाद जेल के वरिष्ठ अधिकारियों को परिसर की सुरक्षा की देखरेख करने में आसानी होगी। इन सीसीटीवी कैमरों के लगने से न केवल सभी की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेञ्गी बल्कि उनकी रिकॉर्डिंग भी की जा सकेगी। पहले चरण में लगे कैमरों से 400 हेक्टेयर क्षेत्र में फेले जेल परिसर पर नजर रखी जा सकेगी। रोहिणी जेल में भी फ्क् सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं। इन कैमरों के जरिए जेल की ड्यूढ़ी, वार्ड चक्कर, मुख्य द्वार, साक्षात्कार कक्ष, अत्याधिक सुरक्षा वाले वार्ड, अंदरूनी कंट्रोल रूम और अस्पताल आदि स्थानों पर नजर रखी जा सकेगी। इस परियोजना पर लगभग 2.72 करोड़ रुपए की लागत आई है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि तिहाड़ जेल को हर तरह से हाईटेक बनाया जा रहा हे। उसी कड़ी में सीसीटीवी कैमरे इन जेलों में लगोय जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तिहाड़ जेल एक तरह से आत्म सुधार केन्द्र के रूप में कार्य कर रही है ताकि यहां रह-रहे कैदी आत्म सुधार के बाद जेल से छूटने पर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। सरकार कैदियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही हैं ताकि जेलों से निकलने के बाद उनको सामान्य जीवन व्यतीत करने में किसी प्रकार की कोई कठिनाई न आये। कैदियों के लिए जेल में मेडिटेशन, खेल-कूद आदि का निरंतर आयोजन किया जाता है। तिहाड़ जेल में कैदियों को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण भी दिए जाते हैं वे हर प्रकार से सक्षम होने के साथ-साथ जेल में से छूटने के बाद अपने परिवार का भली-भांति भरण पोषण कर सके। तिहाड़ जेल में कैदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को बाजार में भेजा जाता है। इन उत्पादों के प्रचार के लिए समय-समय पर प्रदर्शनी भी लगाई जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तिहाड़ जेल में क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण जेल प्रशासन पर कार्य का बोझ अधिक बढ़ जाता है साथ ही विचाराधीन कैदियों और सजायाफता कैदियों की बेहतर देखभाल नहीं हो पाती। इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने मंडोली, नरेला, घिटोरनी, बापरौला में नई जेलों का निर्माण करने का निर्णय लिया है। इसमें से कुछ जेलों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
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नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने कहा है कि राजधानी में जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य देखभाल का दायरा बढ़ाने के लिए सरकार भरसक प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वसथ माँ से स्वस्थ शिशु, स्वस्थ समाज और स्वस्थ देश का निर्माण होता है। जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य देखभाल के समय अगर सभी संभावित बीमारियों की आशंका समाप्त कर दी जाये ओर हर प्रकार के टीके समय पर शिशु को लगवाये जायें तो बीमारियों के प्रकोप को संकुचित किया जा सकता है। श्रीमती दीक्षित आज श्री दादा देव मातृ एवं शिशु चिकित्सालय, डाबड़ी में ओपीडी सेवाओं के उदघाटन अवसर पर जनसमूह को संबोधित कर रही थीं। 44 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 64 बिस्तर के इस अस्पताल का हालांकि अभी कुछ निर्माण कार्य शेष है लेकिन यहां ओपीडी सेवाओं की शुरुआत कर स्थानी यगरीब और जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था चालू कर दी गई है। समारोह में दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. योगानंद शास्त्री ने मुख्य अतिथी के रूप में और स्थानीय सांसद श्री सज्जान कुमार ने सम्मानित अतिथि के रूप में भाग लिया। समारोह की अध्यक्षता स्थानीय विधायक श्री महाबल मिश्रा ने की।
श्रीमती दीक्षित ने कहा कि इस अस्पताल को कुछ महीनों में पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा और यह अस्पताल जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में आदर्श केंद्र बनकर सामने आयेगा। उन्होंने कहा कि जच्चा-बच्चा की देखभाल केञ् लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। दिल्ली सरकार का यह लक्ष्य है कि शिशुओं में बीमारियों की आशंका पूरी तरह समाप्त कर दी जाये। निरोगी शिशु ही पूरी तरह सक्रिय और सजग बचपन का आनंद ले सकता है।
श्रीमती दीक्षित ने यह भी कहा कि देश के नौनिहाल यदि स्वस्थ होंगे तो देश तेजी से प्रगति कर सकेगा। उन्होंने कहा कि पश्चिमी दिल्ली में 750 बिस्तर के अतिआधुनिक अस्पताल का निर्माण कार्य द्वारका में शुरु होने वाला है। इससे इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोत्तम बनाने में मदद मिल सकेगी। श्रीमती दीक्षित ने कहा कि दिल्ली सरकार ने विगत नौ वर्षों में कई नए अस्पताल जनता को समर्पित किए हैं। इतना ही नहीं अस्पतालों में रख-रखाव और आधुनिक सेवाओं ओर परीक्षण सेवाओं की उपलब्ध पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार की लाडली योजना से कन्या के जन्म को समाज के लिए महत्वपूर्ण साबित करने का प्रयास किया गया है। कन्याओं को शिक्षित करने में भी यह योजना उल्लेखनीय योगदान देगी। उनकी सरकार चाहती है कि माँ और लड़की दोनों को पूरा सम्मान दिया जाए क्योंकि कन्या जब बोलने लगती है तो सबसे पहले उसके मुंह से माँ शब्द निकलता है। श्रीमती दीक्षित ने विश्वास व्यक्त किया कि दिल्ली सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर सकेगी।
श्रीमती दीक्षित ने कहा कि उनकी सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के प्रति सजग है। दिल्ली में विधवा, वरिष्ठस्न् नागरिक और विकलांग पेंशन को बढ़ाया गया है जो अब पूरे देश में सबसे अधिक है। अब 1,000 रुपए प्रतिमाह पेंशन मिल रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हरी-हरी बसें न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक हैं बल्कि वह इस बात का भी प्रतीक हैं कि दिल्ली का हरित क्षेत्र निरंतर बढ़ रहा है। प्रदूषण पर नियंत्रण करने के दिल्ली सरकार के प्रयासों की सबने सराहना की है। दिल्ली में सीएनजी से चलने वाली बसों का विश्व का सबसे बड़ा बेड़ा है। युवकों को रोजगार देने के मामले में दिल्ली सरकार ने पिछले दिनों आईटीआई छात्रों को 3000 नौकरीयां मुहैया कराने में मदद दी।
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. योगानंद शास्त्री ने केवल दिल्ली के लोगों की स्वास्थ्य देखभाल करते हैं बल्कि पड़ोसी राज्यों के लोग भी इससे फायदा उठाते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली में अस्पतालों के अलावा औषधालयों को भी आधुनिक बनाने का काम शुरु कर दिया है। सरकार, दिल्ली नगर निगम के 32 जच्चा-बच्चा केंद्रों को भी सुचारू बनाने के लिए बड़ी धनराशि खर्च करने वाली है। स्थानीय सांसद श्री सज्जान कुमार ने कहा कि दिल्ली के चहुंमुखी विकास से आम आदमी को फायदा मिल रहा है और आने वाले समय में सुविधाओं का दायरा और बढ़ेगा। स्थानीय विधायक श्री महाबल मिश्रा ने कहा कि लोगों की भावनाओं को देखते हुए इस अस्पताल नाम श्री दादा देव मातृ एवं शिशु चिकित्सालय रखा गया है।
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नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने युवा इंजीनियरों को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक विकास के इस युग में उन्हें आम जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य करने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे इंजीनियरों के समक्ष आज देश को परम्परागत विकास के क्षेत्र में आगे ले जाने की सबसे बड़ी चुनौती है और उन्हें अपनी प्रतिभा का प्रयोग कर समाज के विश्व के सबसे अच्छे ज्ञान नगरों में से एक बनाने के लिए कृतसंकल्प है। मुख्यमंत्री आज उत्तरी दिल्ली के बवाना स्थित स्थिति दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा की गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उप-राज्यपाल स्वर्ण पदक और मुख्यमंत्री स्वर्ण पदक और अन्य छात्रों को डिग्रियां वितरित की।
श्रीमती दीक्षित ने डीएसई के स्नातकों केञ् उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न प्रकार के अनुसंधार जैसे मून रोवर, सौर वाहन, जलगत वाहन, अनमैंड एरियल वाहन और एफ-1,ए-टी.वी., एसएमवी आदि करके पूरे विश्व में अपनी ख्याति अर्जित की है। उन्होंने आगे कहा कि वे एक नए इंजीनियरिंग व्यवसाय के माध्यम से एक विश्वस्तर के लघु और मध्यम उद्योगों को विकसित करने के लिए नई प्रणाली का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने साथ-साथ तकनीकी विज्ञान के समुचित विकास के लिए कॉलेज और उद्योग जगत के मध्य सहयोग पर बल दिया। उन्होंने युवा स्नातकों को भागीदारी योजना का निमंत्रण देते हुए कहा कि इससे दिल्लीवासियों के ज्ञान और अनुभव में वृद्घि होगी।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर वेदव्रत ने अपने दीक्षांत भाषण में कहा कि डीसीई के प्रयासों से समाज को ही नहीं बिल्क पूरे देश को फायदा हुआ है। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया वे इंजीनियरिंग एवं तकनीक के माध्यम से इस देश के लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए कार्य करे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उच्च क्षमता वाली तकनीकी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कार्य करे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उच्च क्षमता वाली तकनीकी शिक्षा एक आदर्श शिक्षक पर ही निर्भर करती है जिसकी आज के समय में बहुत कमी खल रही है। उन्होंने प्रतिभाशाली इंजीनियरों को शिक्षा अनुसंधान जैसे व्यवास को अपनाने पर जोर दिया।
कॉलेज के निदेशक प्रोफेसर अशोक भट्टाचार्य ने कहा कि डीएसई में तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान करने की परंपरा का निर्वाह करते हुए क्षेत्रों जैसे वैकल्पिक ईंधन, कंपोजिट मैटेरियल, कंडक्टिंग मैटेरियल, वीएसएलआई डिजाइन और एम्बेडिड सिस्टम, इमेजप्रोसेसिग, इन्फोरेमेशन सिक्योरिटी वाटर, क्वालिटी, भूकंप इंजीनियरिंग, डिजास्टर मैजेमेंट और नैना टेक्नोलॉजी आदि में नयी ऊचाइयों को छूआ है।
इस अवसर पर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रोफेसर पी.बी. शर्मा और दिल्ली सरकार के तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. नरेन्द्र कुमार ने अपने विचार रखे।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने बीई की 456, बी. टेक की 101 व पोस्ट गे्रेजुऐट की 132 उपाधियां सफल छात्रों को वितरित की। उन्होंने उपराज्यपाल का स्वर्ण पदक अल्पेश चड्ढा को उनके शैक्षणिक व्यावसायिक व शिक्षणेतर गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए एवं मुख्यमंत्री स्वर्ण पदक ललित कुमार को प्रदान किया।
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नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने पृथ्वी दिवस के अवसर पर कहा कि पूरी धरती का पर्यावरण खतरे में है और हम सभी मिलकर इसके बचाव के लिए सार्थक प्रयास करने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने सभी संसाधनों का सही उपयोग करने के साथ-साथ उन पर अपनी निर्भरता को भी घटना चाहिए और उन्हें फिर से इस्तेमाल लायक बनाया जाना चाहिए। श्रीमती दीक्षित ने आगे कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी के 205 स्कूलों में वर्षा जल संचयन योजना लागू करेगी जिसके लिए 40 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संरक्षण के लिए यह जरूरी हो गया है कि हम अधिक से अधिक सीएफएल बल्बों का इस्तेमाल करें। अगर सीएफएल बल्बों का इस्तेमाल पूरी तरह से दिल्ली में किया जाए तो 1200 मेगावॉट तक बिजली बचाई जा सकती है। मुख्यमंत्री दिल्ली सचिवालय में आयोजित पृथ्वी दिवस कार्यशाला में आए 200 स्कूलों के इको-क्लब के सदस्यों को संबोधित कर रही थीं। इस अवस पर पर्यावरण विभाग के सचिव जे.के. दादू के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
श्रीमती दीक्षित ने आगे कहा कि पूरे विश्व में पर्यावरण की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इतना ही नहीं ग्लोबल वार्मिंग से हाने वाले खतरे से हम सभी को सचेत होना होगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को हरा-भरा बनाकर पृथ्वी को हम प्रदूषण के खतरे से काफी हद तक बचा सकते हैं वर्ना वह दिन भी दूर नहीं कि यह पृथ्वी लोगों के रहने लायक नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने राजधानी के हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए अधिक पेड़ लगाने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के बच्चे इस काम में हमेशा से पर्यावरण दूत की भूमिका निभाते आ रहे हैं। यही वजह है कि दिल्ली सरकार 1900 से अधिक स्कूलों में इको-क्लब की स्थापना पहले ही कर चुकी है और अब 200 नए स्कूलों को इस योजना में शामिल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिक से अधिक रिसाइकिल पेपर के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा करके हम प्रतिवर्ष 40,000 से अधिक पेड़ों को बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक संस्थानों में रिसाइकिल पेपर के इस्तेमाल को अनिवार्य बना देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने बच्चों का आह्वन किया वे वातावरा को साफ-सुथरा बनाने के लिए अपने आसपास कम से कम सात पेड़ लगाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण के लिए सरकार सीएफएल बल्बों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। अभी तक पांच लाख सीएफएल बल्ब बिक चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली के 35 स्कूलों में सोलर वॉटर हीटर स्थापित किए जा चुके हैं जबकि भ् और स्कूलों में शीघ्र ही सोलर वॉटर हीटर लगाए जाएंगे। इस सिस्टम को लगाने पर केंद्र और दिल्ली सरकार अपनी ओर से सब्सिडी मुहैया करा रही है। श्रीमती दीक्षित ने साथ ही साथ यह भी कहा कि बिजली और पानी सीमित साधन के रूप में हैं इसलिए इनका इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करना चाहिए। रिसाइकिल पानी का इस्तेमाल साफ-सफाई, बागवानी और अन्य कार्यों में किया जा सकता है क्योंकि ज्यादातर लोग पीने के पानी का इस्तेमाल साफ-सफाई और अन्य कार्यों में कर पीने के पानी की बर्बादी करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार बैटरी चालित कारों की खरीद को बढ़ावा दे रही है ताकि प्रदूषण में कमी लाई जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि भवनों के निर्माण में भी इको-फ्रेंडली सामानों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। साथ ही प्लास्टिक की थैलियों के बजाए जूट और कपड़े के बैग के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में 50-60 लाख गाडि़यां सड़कों पर दौड़ रही हैं। इनसे पर्यावरण को हमेशा खतरा बना रहता है। महानगरों में आर्थिक संपन्नता लगातार बढ़ती जा रही है यही वजह है कि कई घरो में तीन-चार गाडि़यां इस्तेमाल की जा रही हैं।
इसलिए यह जरूरी हो गया है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और सुविधा संपन्न बनाया जाए जिससे लोग निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर सकें। इस दिशा में दिल्ली सरकार ने मेट्रो, वातानुकूलित लो फलोर बसें, एवं लो फलोर बसें चलाकर यात्रियों को आधुनिक आरामदायक एवं सुविधा संपन्न सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा मे ठोस पहल की है।
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नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने कहा है कि राजधानी की सभी अनधिकृत कॉलोनियों का दिल्ली सरकार समुचित विकास करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अनधिकृत कॉलोनियों में रह रहे लोगों को सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि वे बेहतर जीवनशैली में रह सके।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय से अधिकार मिलने के बाद दिल्ली सरकार ने 1409 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नियमित होने के बाद अनधिकृत कॉलोनियों में रह रहे 40 लाख लोग लाभाविन्त होंगे। श्रीमती दीक्षित प्रगति मैदान में अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण प्रक्रिया के बारे में आयोजित भागीदारी कार्यशाला के समापन समारोह में बोल रही थीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के अलावा दिल्ली के शहरी विकास मंत्री राजकुमार चौहान, विधायक सर्वश्री वीर सिंह धिंगान, बलजोर सिंह, बलराम तंवर के अलावा सभी जिलो की अनधिकृत कॉलोनियों के निवासी कल्याण समिति के सदस्य उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने संबंधी अधिसूचना जारी करने का अधिकार केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा दिल्ली सरकार को देने से अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने और अन्य कार्यों को तेजी से पूरा करने तथा अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में आसानी होगी। श्रीमती दीक्षित ने कहा कि दिल्ली की सभी अनधिकृत कॉलोनियों में विकास कार्य पहले से ही पूरे कराये जा रहे हैं और अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने संबंधी अधिसूचना जारी हो जाने के बाद सभी संबंधित एजेन्सियों से विकास कार्य युद्घ स्तर पर शुरू करने को कहा गया है ताकि अनधिकृत कॉलोनियों में सुविधाओं से वंचित लोगों को सभी जरूरी सुविधा मुहैया कराई जा सके।
श्रीमती दीक्षित ने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों के विकास के लिए पहले से ही अनधिकृत कॉलोनी विकास बोर्ड का गठन किया जा चुका है और 2800 करोड़ रुपये की राशि इस मद में आंवटित की जा चुकी है उन्होंने अनधिकृत कॉलोनियों में रह रहे लोगों को बधाई दी कि उनके सतत् संघर्ष के बाद अब उन्हें अनधिकृत कॉलोनियों में रहने का सुनहरा अवसर मिलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित कराने में दिल्ली सरकार ने दिल्ली नगर निगम, डीडीए और केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखा उसी का परिणाम है कि आज इन कॉलोनियों को नियमित करने की कार्यवाही शुरू होने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बिजली के मीटर तेज चलने और विभिन्न कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को बेवजह तंग करने की शिकायतें भी मिल रही हैं। इन बातों से दिल्ली सरकार पूरी तरह वाकिफ है और सरकार ने इन कंपनियों को साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि वे बिजली कटौती अधिक न करें जिससे आने वाली गर्मियों में बिजली कटौती से लोगों को परेशानी न झेलनी पड़े। उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां बिजली की कटौती गर्मियों में करती है तो इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने से भी सरकार नहीं चूकेगी।
उन्होंने कहा कि बिजली की खपत कम करने वाले उपभोक्ताओं को गर्मी और सर्दियों में 150-200 यूनिट प्रतिमाह खपत करने पर एक रुपये की छूट मिलेगी।
श्रीमती दीक्षित ने भागीदारी को जनता के सशक्तिकरण की प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि इससे ऐसी प्रणाली विकसित की गई है जिसमें नागरिक अपने आरडब्ल्यूए के माध्यम से न केवल सरकार की नीतियों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं बल्कि इन नीतियों के निर्माण और निगरानी में भी मदद देते हैं।
शहरी विकास मंत्री राजकुमार चौहान ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री के सतत प्रयासों से ही अनधिकृत कॉलोनियों में विकास कार्यों की शुरूआत हो पाई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से अधिकार मिलने के बाद अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का सपना अब दिल्ली सरकार पूरा करेगी।
चार दिवसीय भागीदारी कार्यशाला में विभिन्न जिलों की निवासी कल्याण समितियों के 700 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लेकर कॉलोनियों से संबंधित अपने सुझाव दिए।
इससे पहले श्रीमती दीक्षित ने ऑब्जवर रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए अपनी सरकार की भागीदारी पहल पर विचार व्यक्त किए। श्रीमती दीक्षित ने कहा कि भागीदारी एक एक आंदोलन बन गया है जिसने लोगों को एक साथ लाकर खड़ा किया है और उनमें दिल्ली के प्रति अपनेपन, खुद के विश्वास और जिम्मेदारी की भावना जागृत की है और जनता निर्णय की भागीदारी में शामिल हुई हैं। भागीदारी पहल में इको-क्लब, विद्यालय कल्याण समितियां, सांझा प्रयास, आरडब्ल्यूए, आपकी रसोई आदि शामिल हैं। शुरू में भागीदारी में 11 समूह शामिल हुए थे जिनकी संख्या बढ़कर
2,000 हो गई है। यह संतोष का विषय है कि लगभग 2,000 और समूह इसमें शामिल हो गए हैं जो कि अनधिकृत कॉलोनियों की आरडब्ल्यूए हैं। इससे सरकार और जनता के बीच भागीदारी की गति तेज होगी।
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नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर बजट सत्र के दौरान लिये गए महत्वपूर्ण निर्णयों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि राजधानी के लिए यह अत्यंत महत्व का विषय है कि विधानसभा ने इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिक संस्थान दिल्ली विधेयक 2007 को सर्वसम्मति से पारित किया। कई सर्वेक्षणों और अध्ययनों से पता चला कि आईटी क्षेत्र में योग्य मानव संसाधन की जबरदस्त किल्लत है। यह कमी 2010 तक गंभीर रूप ले लेगी। उच्च गुणवत्तापूर्ण की तकनीकी शिक्षा संस्थाओं में दाखिले में नाकाम रहने के कारण दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र के काफी विद्यार्थियों को विदेशी संस्थाओं या पत्राचार माध्यम से शिक्षा हासिल करनी पड़ती है।
सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से और स्वास्थ्य, जीव विज्ञान, ई-प्रशासन और वित्त, रक्षा से संबंधित आईटी के कार्यों और उद्योगों में आईटी के उपयोग पर जोर देने के पहलपूर्ण रवैये से उत्कृटता हासिल करने के लिए शीघ्र दिल्ली में आईआईआईटी दिल्ली नामक संस्थान स्थापित किया जाएगा। संस्थान में प्रारंभ में पहले शिक्षा वर्ष 2008-2009 में 125 अंडर एनआईसीटी कैम्पस में एक अलग भवन में चालू किया जाएगा। पांच वर्ष के बाद इस संस्थान के वित्तीय रूप से पूर तरह सक्षम बन जाने की उम्मीद है।
श्रीमती दीक्षित ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेल शुरू होने से पहले दिल्ली को सुंदर और साफ शहर बनाने के उद्देश्य से सरकार सम्पित्त को बदरंग करने पर काबू पाने केञ् लिए कृतसंकल्प है। संपित्त में इमारत, झोपड़ी, अन्य निर्माण, दीवार, पेड़, खम्भे आदि शामिल हैं। अतः इन पर पेंट, सजावट ,लिखना आदि को अपराध माना जाएगा जिसके लिए कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है। दिल्ली संपत्ति बदरंग रोक विधेयक-2007 को भी विधानसभा ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। इस विधेयक में संपत्ति को बाहर से विकृत और खराब करने की प्रवृत्ती पर रोक लगाने पर का प्रावधान है। विधानसभा ने दिल्ली गुरूद्वारा संशोधन विधेयक-2008 को भी मंजूरी दे दी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उर्जा क्षेत्र के लिए वर्ष 2008-2009 में 1015.65 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है। सरकार ने डीईआरसी के नए मल्टीईयर रिटेल ऑर्डर के जरिए बिजली की दरों में वृद्घि को बेअसर करने के लिए एक वर्ष की अवधि के वास्ते सभी घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने का फैसला किया है। इस प्रकार दरें 2004-05 के स्तर पर बनी रहेंगी। इससे 23 लाख घरेलू और 9,410 कृषि उपभोक्ताओं को फायदा होगा। सरकार ने प्रतिमाह गैर पीक और पीक महीनों में क्रमशः 150 और 200 यूनिट की खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को एक रुपया प्रति यूनिट सब्सिडी देने का फैसला किया है। इसके अलावा दिल्ली विद्युत बोर्ड और डेसू के समय की बकाया राशि माफ की गई है जो कि 2,539 करोड़ रुपए बनती है। घरेलू क्षेत्र में 2004 में बिजली की दरों में बढोत्तिरी नहीं की गई। उन्होंने बताया कि उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है। कोई भी उपभोक्ता मामूली दर पर निष्पक्ष रूप से केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान, भारत सरकार से अपने मीटर की जांच करा सकता है। दिल्ली एकमात्रा ऐसा राज्य है जहां ऊर्जा संरक्षण के लिए सीएफएल और सोलर हीटर के इस्तेमाल पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकार दिल्ली को विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृतसंकल्प है। दो वर्ष के बाद दिल्ली विद्युत के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा बल्कि उसके पास अतिरिक्त बिजली होगी। इस समय वितरण कंपनियों या बिजली क्षेत्र की अन्य कंपनियों को कोई अनुदान नहीं दिया जा रहा और इस प्रकार हो रही बचत का इस्तेमाल ढांचागत विकास और जनता के कल्याण के लिए किया जा रहा है।
दिल्ली में पानी की कुल सप्लाई में काफी बढोत्तरी हुई है। 1997 में यह 570 एमजीडी थी जो अब 815 एमजीडी हो गई है। दिल्ली में दिसंबर 2009 तक एक समान जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 53 नए भूमिगत जलाशय चालू हो जाएंगे। दिल्ली जल बोर्ड की इंटरसेप्टर सीवर योजना पर काम किया जा रहा है जिसके लिए मैसर्स इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को चुना गया है। उम्मीद है कि यमुना 2010 तक साफ-सुथरी दिखने लगेगी। 150 किलोमीटर ट्रंक सीवर में से 100 मिलोमीटर को चालू कर दिया गया है। पहली बार दिल्ली के सभी 189 देहाती गांवों में सीवर बिछाने का काम शुरु किया गया है। इसे दो वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। उन सभी अनधिकृत कॉलोनियों में भी पानी और सीवर की लाइनें बिछाने का काम किया जा रहा है जहां यह तकनीकी रूप से संभव है।
दिल्ली सरकार की अपने योजना बजट के 84 प्रतिशत भाग के सदुपयोग के कारण कार्य निष्पादन की सराहना करते हुए योजना आयोग ने फरवरी, 2008 में दिल्ली की योजनार राशि एक हजार करोड़ रुपए बढ़ा दी। योजना आयोग ने लाडली स्कीम की भी काफी सराहना की और कहा कि इसे कन्या भ्रूण हत्या पर काबू पाने, कन्याओं की शिक्षा और अस्पतालों में जनम की आवश्यकता के साथ जोड़ा गया है। इस स्कीम के अंतर्गत कन्या की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न चरणों में सरकार प्रोत्साहन राशि जमा कराती है जो उसे 18 वर्ष का होने पर लगभग एक लाख रुपया मिल जाती है।
योजना आयोग ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि स्कूल और अस्पताल स्थापित करने के लिए निजी भागीदारी को व्यापक बनाने में वह परामर्शदाता की भूमिका निभायेगा।
डीटीसी की लो फलोर, सेमी लो फलोर, एसी लो फलोर, एसी सेमी लो फलोर और स्टैण्डर्ड सीएनजी की कुल मिलाकर, 3,000 बसें मार्च 2009 तक खरीदने के लिए 1, 018 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की गई है। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में वर्ष 2008-2009 में एक हजार और बिस्तरों की व्यवस्था की जायेगी जबकि 2007-2008 में केवल 359 बिस्तर मुहैया कराये गये थे। भारतीय वन सर्वेक्षण की 2005 की रिपोर्ट में दिल्ली में हरित क्षेत्र का विस्तार करने के लिए दिल्ली सरकार की भूमिका की सराहना की गई है। यह हरित क्षेत्र 2007 में बढ़कर 300 वर्ग किलोमीटर से भी अधिक हो गया। वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और विकलांग व्यक्तियों की मासिक पेंशन म् रुपए से बढ़ाकर एक हजार रुपए करदी गई है।
अंत में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सरकार ने वर्ष 2008-2009 में राष्ट्रमण्डल खेल की परियोजनाओं के लिए 1, 189 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं। 2007-2008 में इस काम पर लगभग 461 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। बढ़ी हुई राशि से राष्ट्रमण्डल खेल 2010 को सफलतापूर्वक आयोजित करने हेतु समुचित ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराने की सरकार की वचनबद्घता प्रतीत होती है। दिल्ली की जनता ने महसूस कर लिया है कि मौजूदा सरकार राष्ट्रमण्डल खेल 2010 को दिल्ली के इतिहास में अविस्मरणीय बना सकेगी।
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