नकवी बनेंगे यूपी के मुख्यमंत्री (अंक - 39)
May 6th, 2007 by admin
संजय गुप्ता
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में पहुंच चुका है। विभिन्न एजेंसियों द्वारा किये गए एक्जिट पोल में जो आंकड़े उभर कर आ रहे हैं उसके मुताबिक इस बार भी यूपी में त्रिशंकू विधानसभा के आसार ही नजर आ रहे हैं। इन सर्वेक्षणों के मुताबिक बसपा करीब 125 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर आ सकती है, जबकि भाजपा 115 से 125 सीटों के साथ दूसरे, सपा 90 से 100 सीटों के साथ तीसरे तथा कांग्रेस 30 से 40 सीटें लेकर चौथे स्थान पर रह सकती है। इसके अलावा 15 से 30 विधायक निर्दलीय के रूप में विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर सकते हैं। यदि उपरोक्त सर्वे पर यकीन किया जाए तो किसी भी दल द्वारा गठबंधन सरकार बनाने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा है। ऐसे में केवल बसपा, भाजपा व सपा ही तीन ऐसी पार्टी हैं जिनमें से किसी दो का गठबंधन होने पर यूपी में सरकार का गठन संभव है, अन्यथा प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू होना निश्चित है। यदि अतीत की बात की जाए तो अपने पुराने अनुभवों को देखते हुए भाजपा की बसपा सुप्रीमों मायावती के साथ पटरी बैठना मुश्किल दिखाई पड़ता है। जबकि मायावती व मुलायम के बीच 36 का आंकड़ा होने के कारण इन दोनों पार्टियों के बीच भी गठबंधन बनने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। उधर कांग्रेस, बसपा की आंखों की किरकिरी बने मुलायम पर सीबीआई का शिकंजा कसने से सपा सुप्रीमों चारों ओर से परेशानियों में घिरे नजर आ रहे हैं। वह इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि यदि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है तो यूपी की सत्ता परोक्ष रूप से कांग्रेस के हाथ में आ जाएगी, जिसके चलते उन पर कानून का शिकंजा और अधिक कस जाएगा। इसी तरह यदि बसपा सुप्रीमों मायावती कांग्रेस व अन्य छोटे दलों के अलावा निर्दलियों के समर्थन से यूपी की सात्ता में काबिज होने में कामयाब हो गई तो उनका सबसे पहला निशाना मुलायम सिंह ही होंगे। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक इन्हीं सभी संभावनाओं को देखते हुए सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह अंदर खाने भाजपा से गठजोड़ करने की जुगत में लगे हैं। हालांकि यह बात अभी तक किसी के गले नहीं उतर रही है, लेकिन अपनी जान बचाने के लिए वह यह कदम भी उठा सकते हैं। वैसे भी कहावत है कि राजनीति में कोई किसी का स्थायी मित्र अथवा स्थायी दुश्मन नहीं होता है। सूत्रों के मुताबिक मुलायम भाजपा से गठजोड़ करने की सूरत में मुस्लिम कार्ड का इस्तेमाल करते हुए भाजपा के किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री बनाने की शर्त रख सकते हैं। साथ ही उपमुख्यमंत्री के लिए अपने पुत्र अखिलेश यादव अथवा अपने भाई शिवपाल सिंह यादव को आगे कर सकते हैं। ऐसा करने से मुलायम सिंह एक ओर जहां अपनी मुसीबतों को कुछ कम करने में कामयाब हो जाएंगे वहीं अपने मुस्लिम वोट बैंक को भी यह कह कर सुरक्षित रखने की कोशिश करेंगे कि उन्होंने देश के सबसे बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री एक मुस्लिम समुदाय के नेता को बनवाया है। यदि ऐसा संभव हो गया तो भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी की लाटरी खुल सकती है। क्योंकि भाजपा के पास उत्तर प्रदेश में नकवी के अलावा कोई और अन्य मुस्लिम नेता नहीं है। ऐसे में भाजपा भी लाभ की स्थिति में होगी। क्योंकि एक ओर जहां उसे वर्षों बाद उत्तर प्रदेश में सात्ता सुख भोगने का मौका मिल जाएगा वहीं दूसरी ओर नकवी के मुख्यमंत्री बनने से मुस्लिम समुदाय का हितैषी बनने का बहाना भी मिल जाएगा।