बढ़ सकती है जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें
May 6th, 2007 by admin
विश्वत सेन
नई दिल्ली। भारत की जीवन रक्षक दवाइयों पर संयुक्त राज्य अमेरिका की नजर पहले से ही टिकी थी अब उसकी नजर इन दवाइयों के दामों पर लगी है। वह भारतीय दवा कंपनियों पर अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बनाकर जीवन रक्षक दवाइयों की कीमत बढ़ाने की फिराक में हैं। क्योंकि इन दवाइयों का पेटेंट उसे नहीं मिल सका है। संयुक्त राज्य अमेरिका जीवन रक्षक दवाइयों में अस्थमा केञ् इनहेलर, नाकों में स्प्रे करने वाली दवाइयों, गैंस, कब्ज की दवाइयां, कैंसर की दवाइयां, त्वचा रोग संबंधी दवाइयां, व त्वचा संक्रमण को रोकने वाली दवाइयों की कीमत बढ़ाकर अपनी दवाइयों को भारत में लाने का अथक प्रयास कर रहा है। इसकेञ लिए वह उपरोक्त दवाइयों का उत्पादन करने वाली रैनबैक्सी, डॉ. रेड्डी, जीडस काडिया और सन फार्मा आदि कंपनियों पर अमेरिका और भारत के संयुक्त प्रयास से जीवन रक्षक दवाइयों पर शोध करने दबाव बना रहा है। सूत्रों के अनुसार उपरोक्त जीवन रखक दवाइयों केञ शोध में संयुक्त राज्य अमेरिका के संस्थान को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। मैनकाइन्ड फार्मा के प्रबंध निदेशक आर.सी. जुनेजा का कहना है कि अस्थमा, त्वचा रोग, कैंसर, बुखार, त्वचा संक्रमण व अनय संक्रामक बीमारियों की दवाइयों की कीमत है। इसलिए भारतीय दवा कंपनियों के साथ तालमेल स्थापित करके अमेरिका भारत के बाजारों में अपनी पैठ बनाना चाहता है। इसलिए वह शोध कराने के लिए दवा कंपनियों पर दबाव बना रहा है।