राहुल के फ्लॉप शो से कांग्रेस सकते में (अंक 41)
May 21st, 2007 by admin
नई दिल्ली। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में पूरी ताकत झौंक देने के बावजूद पार्टी की सीट व वोट प्रतिशत दोनों ही कम हो जाने से कांग्रेस के थिंक-टैंक की चिंता काफी बढ़ गई है। पार्टी के नेता भले ही अभी यह खुलकर स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के मतदाताओं पर राहुल गांधी का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। मगर दबी जुबान से वह यह भी कह रहे हैं कि जल्दबाजी में राहुल नामक ब्रह्मास्त्र को इस्तेमाल करने के विपरीत परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी को उतारने के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दो धड़ों में बंट गए हैं। एक धड़े का कहना है कि उत्तर प्रदेश में टुकड़ों में बंटी पार्टी को एकजुट और कार्यकर्ताओं को सक्रिय किए बिना राहुल गांधी को चुनाव प्रचार में उतारने का फैसला पूरी तरह से गलत था। इस धड़े के अनुसार जंग खाई मशीनरी में भले ही कितना शक्तिशाली ईंधन डाल दिया जाए, वह नहीं चलेगी। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति इसी जंग खाई मशीनरी के समान ही है। इसे चलाने के लिए राहुल गांधी की शक्ति व ऊर्जा दोनों ही जाया कर दी गई। इस धड़े के नेताओं का यह भी कहना है कि अगर राहुल गांधी को विधानसभा चुनावों में स्टार प्रचारक के तौर पर उतारने का फैसला लिया गया था तो न केवल इस संबंध में लगभग एक साल पहले से तैयारियां करने के साथ राहुल को भी चुनाव प्रक्रिया शुरु होते ही मैदान में उतार देना चाहिए था। ऐसा करने से पार्टी में नई जान पैदा होती और उसकी सीटें भी बढ़ जाती। मगर यह महत्वपूर्ण दोनों कदम उठाए बिना ही राहुल गांधी को चुनाव प्रचार में उतार दिया गया। अपने व्यक्तित्व के करिश्मे की वजह से राहुल गांधी अपने रोड शो व अन्य कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटाने में तो कामयाब रहे मगर पार्टी की गुटबाजी व निर्जीव संगठन के कारण भीड़ में जुटे लोग मतदाता नहीं बन पाए। जिसकी वजह से पार्टी को खास सफलता नहीं मिल पाई। कांग्रेस के भीतर यह कहने वालों की भी कमी नहीं है कि जब तक उत्तर-प्रदेश में पार्टी के स्थापित नेताओं के स्थान पर नए लोगों को मौका नहीं दिया जाएगा, तब तक वहां मजबूत संगठन की कल्पना करना बेमानी होगा। दरअसल इन स्थापित नेताओं के स्वार्थ की वजह से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। इस धड़े का यह भी कहना है कि राहुल गांधी के मुंह से उलटे-सीधे बयान दिलवाने वाले नेताओं ने पार्टी को फायदा पहुंचाने के बजाय खुद राहुल को ही विवादों का केन्द्र बना दिया। इन बयानों की वजह से जहां कंग्रेस बैकफुट पर चली गई वहीं विरोधियों को भी उस पर आक्रमण करने का मौका मिल गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि या पार्टी को पूरी ताकत के साथ राहुल गांधी के साथ खड़ा होना चाहिए या फिर उन्हें स्टार प्रचारक की हैसीयत से इन चुनावों से दूर ही रखना ठीक था। दूसरी ओर राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश का भावी नेता बनाने और उन्हें चुनाव प्रचार में उतारने का फैसला लेने वाले धड़े का कहना है कि यह एकदम सही फैसला था। यह ठीक है कि राहुल गांधी के प्रचार करने के बावजूद पार्टी की सीटों में इजाफा नहीं हुआ है। मगर उनकी वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं में भविष्य के प्रति आस बंधी है। उन क्षेत्रों में पहली बार कांग्रेस का झंडा दिखाई दिया है जहां 15 साल से कोई कांग्रेस का नाम लेने वाला भी नहीं था। राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम व राहुल गांधी के नाम की आड़ लेकर कांग्रेस केञ् दोनों धड़ों के बीच शह और मात का खेल चल रहा है।