कोरियर सेवा विदेशी हाथों में सौंपने की तैयारी (अंक 42)
May 26th, 2007 by admin
नई दिल्ली। सरकार ने अन्य सेवा क्षेत्रों की तरह अब कोरियर सेवा के द्वार भी विदेशी कंपनियों के लिए खोल देने का फैसला लिया है। इसके लिए उसने संसद में डाक अधिनियम में संशोधन करने संबंधी विधेयक पेश किया है। यह विधेयक अगर जस का तस पारित कर दिया गया तो इससे भारतीय कोरियर व्यवसाय पूरी तरह से तबाह हो जाएगा और इससे जुड़े लगभग 50 लाख लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा। इतना ही नहीं सरकार के इस कदम से व्यापारिक दस्तावेज, व्यावसायिक जानकारी, सामाजिक आयोजन के निमंत्रण पत्र व अन्य डाक सामग्री भेजने के लिए कोरियर कंपनियों पर निर्भर रहने वालों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। संसद में पेश किए गए डाक अधिनियम संशोधन संबंधी विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि कोरियर कंपनियों को 150 ग्राम तक डाक सामग्री भेजने की अनुमति नहीं होगी। 150 ग्राम तक की डाक सामग्री डाक घरों के माध्यम से ही भेजी जा सकेगी। जबकि आंकड़े बताते हैं कि कोरियर कंपनियों के माध्यम से भेजे जाने वाली डाक सामग्री का औसत वजन 20 से 200 ग्राम के बीच होता है। इस संशोधन विधेयक में यह प्रावधान भी किया गया है कि कोरियर कंपनियां अपने माध्यम से भेजे जाने वाली डाक सामग्री के एवज में स्पीड पोस्ट की तुलना में ढाई गुना व साधारण डाक का पांच गुना अधिक शुल्क वसूल करेंगी। इन दोनों ही प्रावधान का कोरियर व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और इससे छोटे व मध्यम श्रेणी की अधिकांश कोरियर कंपनियों के संचालकों के पास अपना कारोबार बंद करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचेगा। जिसकी वजह से कोरियर व्यवसाय से जुड़े 50 लाख लोगों के बेरोजगार हो जाने की आशंका पैदा हो गई है।इस विधेयक की प्रस्तावना में कहा गया है कि इसके प्रावधान उन कोरियर कंपनियों पर लागू नहीं होंगे जिनमें 51 प्रतिशत या उससे अधिक विदेशी पूंजी लगी हुई है। इससे साफ जाहिर होता है कि इस संशोधन विधेयक का मूल उद्देश्य कोरियर सेवा के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को बढ़ावा देना ही है। हालांकि सरकार ने इसका उद्देश्य दूरदराज के इलाकों में डाक पहुंचाने के काम से होने वाले नुकसान की भरपाई करने के साथ ही डाक व्यवस्था को मजबूती प्रदान करना बताया है। हैरानी की बात तो यह है कि आर्थिक सुधार कार्यक्रम को लागू करने के लिए सरकार संयुक्त व सरकारी उद्यम व उपक्रमों का विनिवेश कर रही है। इतना ही नहीं उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने व बाजार में खुली प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के नाम पर बड़ी-बड़ी कंपनियों को रिटेल कारोबार के क्षेत्र में उतरने की अनुमति दे रही है। दूसरी ओर इस तरह के संशोधन विधेयक के जरिए वह भारतीय कोरियर कंपनियों को समाप्त करने जा रही है। आकाश गंगा कोरियर कंपनी के चेयरमैन डा. सुभाष अग्रवाल ने सभी राजनीतिक दलों से एकमत होकर इस संशोधन विधेयक को पारित होने से रोकने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि कोरियर कंपनियां चलाने वाले संचालक तो दूसरा कारोबार शुरु कर अपनी आजीविका का प्रबंध कर सकते हैं। मगर सरकार के कदम की वजह से अगर कोरियर कंपनियां बंद करने की नौबत आ गई तो इनमें नौकरी कर रहे लाखों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा। इसकी वजह से डाक सामग्री भेजने वाले आम नागरिकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि सरकारी डाक व्यवस्था लचर हो जाने की वजह से अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह से खो चुकी है। डा. अग्रवाल केञ् अनुसार सरकार सभी क्षेत्रों में सरकारी डाक घरों की व्यवस्था नहीं है। जिन इलाकों में डाकघर हैं भी वह शाम को पांच बजे बंद हो जाते हैं। जबकि कोरियर कंपनियों की सेवा एक टेलीफोन दूर है और देर रात तक उपलब्ध है। कोरियर कंपनियां डाक सामग्री सही व्यक्तियों के हाथ में और 24 से 48 के बीच पहुंचा देती हैं। इतना ही नहीं डाक पहुंचाने में देरी होने के मामले में कोरियर कंपनी को उपभोक्ता अदालत तक में घसीटा जा सकता है। इसके विपरीत सरकारी डाक विभाग से महीने तक तो पूछताछ भी नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में डाक व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है तो उसे कोरियर कंपनियों का गला घोंटने के बजाय स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना चाहिए।