माया ने शीला को निराश किया (अंक 42)
May 26th, 2007 by admin
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की गद्दी चौथी बार संभालने के बाद अपने ‘लाव-लश्कर’ के साथ दिल्ली आई बसपा ‘सुप्रीमो’ ने अपने दो दिन के प्रवास के दौरान कार्यकर्ताओं से लेकर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्षा सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह तक के साथ मुलाकात की। मगर दिल्ली की मुक्यमंत्री शीला दीक्षित को मिलने का समय न देकर उन्हें निराश करने के साथ ही सोनिया बिहार जल शोधन संयंत्र के लिए उत्तर प्रदेश के जरिए कच्चा पानी न मिलने की समस्या के हल होने की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया।मायावती ने मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के तुरंत बाद ही दिल्ली के साथ चले आ रहे बस विवाद सुलझाने के लिए पहल करते हुए राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को दिल्ली भेजा था। इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री की दिलचस्पी व भावना के मद्देनजर दिल्ली के परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ सकारात्मक रवैया अपनाया। जिसकी वजह से वर्षों से लंबित चला आ रहा यह विवाद हल हो गया। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के इस तरह के रवैये को देखते दिल्ली सरकार के अधिकारियों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित मायावती की दिल्ली यात्रा के दौरान उनसे मुलाकात कर सोनिया विहार जल शोधन संयंत्र को कच्चा पानी न मिलने के कारण लोगों की मांग के अनुसार पेयजल आपूर्ति न होने की समस्या से अवगत कराएंगी तो इसका हल अवश्य निकल जाएगा। खासकर जब मायावती को शीला दीक्षित यह बताएंगी कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने केवल राजनीतिक कारणों की वजह से ही टिहरी बांध से सोनिया विहार जल शोधन संयंत्र के लिए आने वाले कच्चे पानी को बीच से ही रोक लिया था। अधिकारियों का मानना था कि इस दलील को सुनकर सोनिया विहार जल शोधन संयंत्र की क्षमता के अनुसार पानी का उत्पादन न हो पाने की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। जिससे दिल्ली में पेयजल आपूर्ति की स्थिति में सुधार होगा।अधिकारियों को यह भी आशा थी कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मुलाकात के दौरान 2010 के प्रस्तावित कॉमनवेल्थ खेलों के लिए यमुना के किनारे होने वाले निर्माण कार्य में आ रही बाधाएं भी दूर की जा सकेंगी।इधर दिल्ली सरकार के अधिकारी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के साथ होने वाली मुलाकात को लेकर तरह-तरह के मंसूबे बांध रहे थे। उधर मुख्यमंत्री मायावती ने दिल्ली सरकार से मुलाकात का समय मांगने के प्रस्ताव पर गौर तक नहीं किया।इस संबंध में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने ‘अपनी दिल्ली’ को बताया कि दिल्ली सरकार ने मायावती से उनकी दिल्ली यात्रा के दौरान मुलाकात का समय देने का अनुरोध किया था। मगर पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों में व्यस्तता की वजह से मायावती मुलाकात का समय नहीं दे पाई।
श्रीमती दीक्षित ने कहा कि सोनिया विहार जल शोधन संयंत्र के लिए कच्चा पानी पाने की राह में आने वाली बाधा को दूर करने व अन्य मुद्दों के बारे में वह मायावती से दुबारा दिल्ली आने पर मिलेंगी। यदि जरूरत पड़ी तो वह अपने प्रतिनिधि को बातचीत के लिए लखनऊ भी भेज सकती हैं। शीला दीक्षित उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के मुलाकात का समय न दिए जाने के पीछे भले ही उनकी व्यस्तता को कारण बता रही हैं, मगर हकीकत कुछ और ही है।भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार दिल्ली सरकार की ओर से मुलाकात का समय मांगने का अनुरोध पत्र मिलने के बाद मायावती के खासमखास सतीश चंद्र मिश्रा व कैबिनेट सचिव शशांक शेखर ने उनका ध्यान पिछले दिनों शीला दीक्षित द्वारा उत्तर प्रदेश व बिहार के प्रवासी नागरिकों के बारे में की गई प्रतिकूल टिप्पीणी पर दिलाया। जिस पर न केवल विपक्षी दलों ने बल्कि कांग्रेस पार्टी ने भी कड़ा रुख अपनाया था। जिसके चलते शीला दीक्षित को इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगनी पड़ी थी। इन दोनों ने मायावती को समझाया कि उनके शीला दीक्षित से ऐसे समय में मिलने से दिल्ली में रहने वाले उत्तर प्रदेश के मूल नागरिकों की भावना आहत होंगी। इतना ही नहीं इस मुलाकात के दौरान अगर उन्होंने सोनिया विहार जल शोधन संयंत्र को कच्चे पानी की आपूर्ति के बारे में किसी प्रकार का कोई भरोसा दिया तो दिल्ली सरकार उसका श्रेय खुद को देने का प्रयास करेगी। अगर मायावती ने इस संबंध में किसी प्रकार से सहायता करने से इन्कार किया तब भी दिल्ली सरकार पूर्ववर्ती सरकार की तरह ही उनकी सरकार को भी कठघरे में खड़ा करने में अपनी ओर से कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ेगी। दोनों ही हालात में फायदा सिर्फ दिल्ली सरकार को ही होगा।इसके साथ ही सतीश चंद्र मिश्रा ने अगले वर्ष होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मतदाताओं को अपनी पैठ बढ़ाने और दिल्ली की पेयजल की समस्या इस प्रकार से हल करने का सुझाव दिया, जिससे इसका पूरा श्रेय मुख्यमंत्री मायावती को मिल सके।राजनीतक प्रेक्षकों के अनुसार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अकेले दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बाद से राष्ट्रीय राजनीति में मायावती का कद व हैसीयत काफी बढ़ गई है। यही वजह है कि संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने न केवल अकेले में उनसे मुलाकात की बल्कि प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की ओर से उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के लिए आयोजित दोपहर के भोज में भी सोनिया मौजूद थी। इसे देखते हुए मायावती के लिए शीला दीक्षित से मिलना अपना वक्त बर्बाद करने जैसा ही था।मुख्यमंत्री मायावती द्वारा मुलाकात का समय न दिए जाने की वजह से जहां शीला दीक्षित व उनके समर्थकों में मायूसी फैल गई। वहीं इससे मुख्यमंत्री विरोधी विधायक काफी खुश हैं। इनमें वे विधायक भी शामिल हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश व बिहार के प्रवासी निवासियों के प्रति की गई शीला दीक्षित की टिप्पणी को लेकर बवाल खड़ा किया था।इन विधायकों से जुड़े लोगों का दावा है कि उनके प्रयास की वजह से मायावती शीला दीक्षित को मायूस छोड़कर लखनऊ लौट गई। क्योंकि वह भी शीला दीक्षित की टिप्पणी से खफा थीं। यही वजह है कि उन्होंने शीला को मिलने तक का समय नहीं दिया।