ऐसे हैं हमारे सांसद (अंक 43)
Jun 5th, 2007 by admin
नई दिल्ली। छोटी-छोटी बातों को लेकर आए दिन संसद में तूफान उमड़ा देने वाले और कई-कई दिन तक संसद की कार्यवाही न चलने देने वाले सांसदों को जनहित संबंधी मुद्दों की कतई परवाह नहीं है। कम से कम पिछले दिनों संसद में पेश किए गए डाक अधिनियम में संशोधन करने संबंधी विधेयक के बारे में कई सांसदों द्वारा की गई प्रतिक्रिया से तो ऐसा ही लगता है।
भारतीय कूरियर व्यवसाय को पूरी तरह से तबाह कर इससे जुड़े 50 लाख लोगों को बेरोजगारी के कगार तक पहुंचाने और इस व्यवसाय के दरवाजे विदेशी कंपनियों के लिए खोल देने वाला यह विधेयक जब संसद में पेश किया गया तब भी इस पर ज्यादा हो-हल्ला नहीं हुआ। बाद में भी अधिकांश सांसदों ने इस विधेयक को पढ़ने तक की जहमत गवारा नहीं की। कूरियर व्यवस्था से जुड़े लोगों से जनहित विरोधी इस विधेयक की जानकारी मिलने के बाद ‘अपनी दिल्ली’ ने इस संबंध में राज जानने के लिए कई सांसदों से संपर्क किया। इन सभी का यह कहना था कि उन्हें इस तरह का विधेयक संसद में पेश किए जाने की जानकारी तो है मगर उन्होंने अभी तक इसका विस्तृत अध्ययन नहीं किया है। इसका अध्ययन करने के बाद ही वह इस बारे में कुछ कह सकेंगे।इस तरह के जनविरोधी विधेयक के बारे में कांग्रेस के सांसदों की चुप्पी तो समझ में आती है। सत्तापक्ष का सदस्य होने के नाते वह अपनी ही सरकार की ओर से पेश किए गए विधेयक का विरोध या आलोचना नहीं कर सकते हैं। अगर वह ऐसा करते हैं तो उन्हें ऐसा करने पर पार्टी का अनुशासन तोड़ने केञ् मामले में आला कमान को जवाब तक देना पड़ सकता है। यही वजह है कि कांग्रेस सांसद इस विधेयक पर चुप्पी साधे हुए हैं।मगर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के सांसदों के समक्ष तो ऐसी कोई मजबूरी नहीं है। वैसे भी विपक्ष में होने के नाते सरकार के गलत या सही फैसलों का विरोध करना उनका हक है। डाक अधिनियम संशोधन संबंधी विधेयक तो पूरी तरह से जनविरोधी है। जिसका विपक्ष को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह पुरजोर तरीके से विरोध करना चाहिए था। विरोध करना तो दूर उनका यह कहना कि उन्होंने अभी तक इस विधेयक को पढ़ा नहीं है पढ़ने पर अगर उन्हें इसमें कुछ भी गलत लगा तो वह इसका विरोध अवश्य करेंगे। उनका यह बयान आसानी से गले उतरने वाला तर्क नहीं है।भाजपा सांसदों के इस प्रकार के रुख से लगता है कि उन्हें व्यर्थ में हल्ला मचाना और व्यर्थ के कामों में अपनी ऊर्जा नष्ट करना ज्यादा पसंद है। बनिस्पद जनहित संबंधी मुद्दे उठाकर जनता को राहत पहुंचाने के कार्य करना।इस मामले में वामदलों की चुप्पी भी कम आश्चर्यजनक नहीं है। बात बात पर सरकार को आंखें दिखाने और सर्वहारा वर्ग के मुद्दे को जोरशोर से उठाने वाले वामदल सांसदों ने भी इस विधेयक का अब तक विरोध नहीं किया है और न ही इस पर अभी तक किसी प्रकार की प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सांसदों के इस प्रकार के रवैये से स्पष्ट है कि जनहित मुद्दों से वास्तव में उनका कोई लेना-देना नहीं है।